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चाकू आर-पार, फिर भी सुरक्षित! कमाल का है सॉलिड-स्टेट पावर बैंक, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी
Soild State Power Bank में इस्तेमाल होने वाली बैटरी पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों से अलग होती है.
स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ पावर बैंक हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं. लेकिन पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी वाले पावर बैंकों से जुड़ी आग लगने, ओवरहीटिंग और विस्फोट जैसी घटनाएं अक्सर चिंता का कारण बनती हैं. ऐसे में अब सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक चर्चा में है जिसे एनर्जी स्टोरेज का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि ये पावर बैंक इतने सुरक्षित हैं कि इनमें चाकू आर-पार कर देने पर भी आग लगने का खतरा बेहद कम रहता है.
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सॉलिड-स्टेट पावर बैंक में इस्तेमाल होने वाली बैटरी पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरियों से अलग होती है. सामान्य बैटरियों में तरल इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल किया जाता है जबकि सॉलिड-स्टेट बैटरी में ठोस इलेक्ट्रोलाइट मौजूद होता है. यही तकनीक इन्हें अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाती है. तरल इलेक्ट्रोलाइट वाली बैटरियों में लीकेज, शॉर्ट सर्किट और थर्मल रनअवे जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं सॉलिड-स्टेट बैटरियां इन जोखिमों को काफी हद तक कम कर देती हैं.
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पारंपरिक बैटरियों में यदि किसी कारण से छेद हो जाए तो अंदर मौजूद ज्वलनशील पदार्थ आग पकड़ सकते हैं. लेकिन सॉलिड-स्टेट बैटरियों में ज्वलनशील तरल पदार्थ नहीं होता. यही वजह है कि बैटरी को नुकसान पहुंचने या उसमें छेद होने पर भी आग लगने और विस्फोट का खतरा काफी कम रहता है. यही कारण है कि कई कंपनियां इस तकनीक को इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन और पोर्टेबल चार्जिंग डिवाइसों में इस्तेमाल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं.
Published at : 01 Jun 2026 02:42 PM (IST)
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मेघा प्रसादसीनियर एडिटर (पॉलिटिकल अफेयर्स)
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