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हवाई जहाज की सीटों के लिए नीला रंग ही क्यों चुनती हैं एयरलाइंस? मार्केटिंग या साइंस क्या है इसका कारण?
कुछ एयरलाइंस ने ग्रे, लाल या हरे रंग का प्रयोग भी किया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर नीला अब भी सबसे लोकप्रिय विकल्प है. आइए जानें कि इसके पीछे की खास वजह आखिर क्या है.
जब भी आप किसी फ्लाइट में बैठते हैं, एक चीज लगभग हर बार समान मिलती है- सीटों का नीला रंग. चाहे घरेलू उड़ान हो या इंटरनेशनल, इकोनॉमी हो या बिजनेस क्लास, नीला रंग जैसे प्लेन का स्थायी हिस्सा बन चुका है. क्या यह सिर्फ संयोग है या इसके पीछे कोई सोची-समझी रणनीति? क्या एयरलाइंस सिर्फ स्टाइल के लिए ऐसा करती हैं, या फिर इसके पीछे साइंस, मनोविज्ञान और करोड़ों रुपये का गणित छिपा है?
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हकीकत यह है कि हवाई जहाज की सीटों का रंग यूं ही तय नहीं होता है. यह फैसला कई स्तर पर सोच-विचार के बाद लिया जाता है. दुनिया की बड़ी एयरलाइंस जैसे IndiGo, American Airlines और Lufthansa सहित ज्यादातर कंपनियों ने अपने केबिन इंटीरियर में नीले शेड को प्रमुखता दी है.
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इसके पीछे तीन बड़े कारण माने जाते हैं- मेंटेनेंस, मनोविज्ञान और ब्रांडिंग. एयरलाइंस के पास हर उड़ान के बाद विमान को पूरी तरह साफ करने के लिए बहुत सीमित समय होता है. खासकर छोटी दूरी की उड़ानों में, जहां एक ही विमान दिन में कई चक्कर लगाता है. ऐसे में सीटों पर पड़े दाग-धब्बे जल्दी नजर न आएं, यह बेहद जरूरी होता है.
Published at : 14 Feb 2026 06:56 AM (IST)
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