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ये है देश की सबसे स्लो ट्रेन... फिर भी लोग इसमें सफर करने को रहते हैं बेताब! जानिए इसमें ऐसा क्या खास है

रेल को लेकर लोगों के मन में बड़ी दिलचस्पी रहती है. इसीलिए आज हम आपको भारत की सबसे धीमी ट्रेन के बारे में बताएंगे. हैरानी वाली बात ये है कि तब भी इस ट्रेन से लोग सफर करते हैं. जानते हैं क्यों...?

रेल को लेकर लोगों के मन में बड़ी दिलचस्पी रहती है. इसीलिए आज हम आपको भारत की सबसे धीमी ट्रेन के बारे में बताएंगे. हैरानी वाली बात ये है कि तब भी इस ट्रेन से लोग सफर करते हैं. जानते हैं क्यों...?

नीलगिरी पैसेंजर ट्रेन (सोर्स: गूगल)

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बड़ी बात यह है कि भारत की ये ट्रेन इतनी धीमी गति से चलती है कि इस ट्रेन का नाम यूनेस्को की विश्व धरोहर में भी शामिल है. इस ट्रेन का नाम 'मेट्टूपालयम ऊटी नीलगिरी पैसेंजर ट्रेन' है. यह ट्रेन पहाड़ो में चलती है और 326 मीटर की ऊंचाई से 2203 मीटर तक की ऊंचाई तक का सफर तय करती है. नीलगिरी पर्वतीय रेलवे के अंतर्गत आने वाली यह ट्रेन 46 किलोमीटर की दूरी 5 घंटों में तय करती है और इस दौरान यह 100 से ज्यादा पुल और कई छोटी-बड़ी सुरंगों से होकर गुजरती है.
बड़ी बात यह है कि भारत की ये ट्रेन इतनी धीमी गति से चलती है कि इस ट्रेन का नाम यूनेस्को की विश्व धरोहर में भी शामिल है. इस ट्रेन का नाम 'मेट्टूपालयम ऊटी नीलगिरी पैसेंजर ट्रेन' है. यह ट्रेन पहाड़ो में चलती है और 326 मीटर की ऊंचाई से 2203 मीटर तक की ऊंचाई तक का सफर तय करती है. नीलगिरी पर्वतीय रेलवे के अंतर्गत आने वाली यह ट्रेन 46 किलोमीटर की दूरी 5 घंटों में तय करती है और इस दौरान यह 100 से ज्यादा पुल और कई छोटी-बड़ी सुरंगों से होकर गुजरती है.
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इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं है कि यह ट्रेन सालों से ऐसे ही चल रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस ट्रेन में फर्स्ट और सेकंड क्लास की सुविधाएं हैं. यह ट्रेन वेलिंगटन, केटी, कुन्नूर, अरवंकाडु और लवडेल स्टेशनों से होकर चलती है.
इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं है कि यह ट्रेन सालों से ऐसे ही चल रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस ट्रेन में फर्स्ट और सेकंड क्लास की सुविधाएं हैं. यह ट्रेन वेलिंगटन, केटी, कुन्नूर, अरवंकाडु और लवडेल स्टेशनों से होकर चलती है.
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दरअसल, मेट्टूपालयम और कुन्नूर के बीच का रास्ता इतना सुंदर है कि संयुक्त राष्ट्र के यूनेस्को ने साल 2005 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दे दिया था. यही कारण है कि लोग इस ट्रेन में सफर करना पसंद करते हैं और सुंदर प्राकृतिक नज़ारों का आनंद लेते हैं.
दरअसल, मेट्टूपालयम और कुन्नूर के बीच का रास्ता इतना सुंदर है कि संयुक्त राष्ट्र के यूनेस्को ने साल 2005 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दे दिया था. यही कारण है कि लोग इस ट्रेन में सफर करना पसंद करते हैं और सुंदर प्राकृतिक नज़ारों का आनंद लेते हैं.
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एक रिपोर्ट के हिसाब से नीलगिरी पर्वतीय रेलवे का निर्माण 17 साल में पूरा हुआ था, जो साल 1891 में शुरू हुआ था. तब से लेकर आज तक यह ट्रेन मेट्टूपालयम से लेकर ऊटी रेलवे स्टेशन तक हर रोज चलती है.
एक रिपोर्ट के हिसाब से नीलगिरी पर्वतीय रेलवे का निर्माण 17 साल में पूरा हुआ था, जो साल 1891 में शुरू हुआ था. तब से लेकर आज तक यह ट्रेन मेट्टूपालयम से लेकर ऊटी रेलवे स्टेशन तक हर रोज चलती है.
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यह ट्रेन मेट्टूपालयम स्टेशन से सुबह 7:10 बजे चलती है और दिन में करीब 12 बजे ऊटी पहुंच जाती है. वापसी में यह दोपहर 2 बजे से ऊटी से निकलती है और शाम को 5:30 बजे मेट्टूपालयम स्टेशन पहुंच जाती है. जब भी टूरिस्ट यहां जाते हैं तो इस ट्रेन का मजा जरूर लेते हैं.
यह ट्रेन मेट्टूपालयम स्टेशन से सुबह 7:10 बजे चलती है और दिन में करीब 12 बजे ऊटी पहुंच जाती है. वापसी में यह दोपहर 2 बजे से ऊटी से निकलती है और शाम को 5:30 बजे मेट्टूपालयम स्टेशन पहुंच जाती है. जब भी टूरिस्ट यहां जाते हैं तो इस ट्रेन का मजा जरूर लेते हैं.

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