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Survive In Space: अंतरिक्ष में बिना स्पेस सूट कितनी देर जिंदा रह सकता है इंसान, सांस रोकने के बाद कितना होगा सर्वाइवल?

Survive In Space: अंतरिक्ष में स्पेस सूट का इस्तेमाल किया जाता है. आइए जानते हैं अगर यह ना हो तो इंसान कितनी देर तक जिंदा रह सकता है.

Survive In Space:  अंतरिक्ष में स्पेस सूट का इस्तेमाल किया जाता है. आइए जानते हैं अगर यह ना हो तो इंसान कितनी देर तक जिंदा रह सकता है.

Survive In Space: अंतरिक्ष शांत और काफी खामोश लग सकता है, लेकिन इंसानी शरीर के लिए यह काफी खतरनाक माहौल बनाता है. स्पेस सूट के बिना वहां पर जिंदा रहने का समय मिनट में नहीं बल्कि सेकंड में मापा जाता है. आइए जानते हैं कि अंतरिक्ष में बिना स्पेस सूट के इंसान कितने देर तक जिंदा रह सकता है.

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अंतरिक्ष के वैक्यूम में एक इंसान स्पेस सूट के बिना सिर्फ  90 से 120 सेकंड तक ही जिंदा रह सकता है. ऐसा इसलिए नहीं होता कि शरीर तुरंत फट जाता है, बल्कि इसलिए होता है कि ऑक्सीजन की कमी और प्रेशर कम होने की वजह से जरूरी अंग जल्दी खराब हो जाते हैं.
अंतरिक्ष के वैक्यूम में एक इंसान स्पेस सूट के बिना सिर्फ 90 से 120 सेकंड तक ही जिंदा रह सकता है. ऐसा इसलिए नहीं होता कि शरीर तुरंत फट जाता है, बल्कि इसलिए होता है कि ऑक्सीजन की कमी और प्रेशर कम होने की वजह से जरूरी अंग जल्दी खराब हो जाते हैं.
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दिमाग ऑक्सीजन सप्लाई पर निर्भर होता है. अंतरिक्ष में जाने के बाद खून में मौजूद ऑक्सीजन दिमाग को सिर्फ 10 से 15 सेकंड तक ही काम करने दे सकती है. उसके बाद ऑक्सीजन की कमी की वजह से इंसान बेहोश हो जाते हैं.
दिमाग ऑक्सीजन सप्लाई पर निर्भर होता है. अंतरिक्ष में जाने के बाद खून में मौजूद ऑक्सीजन दिमाग को सिर्फ 10 से 15 सेकंड तक ही काम करने दे सकती है. उसके बाद ऑक्सीजन की कमी की वजह से इंसान बेहोश हो जाते हैं.
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अगर कोई इंसान अंतरिक्ष में सांस रोकने की कोशिश करता है तो बाहरी प्रेशर की कमी की वजह से फेफड़ों के अंदर की हवा तेजी से फैलती है. इससे फेफड़े फट सकते हैं. यही वजह है कि एस्ट्रोनॉट्स को ऐसी स्थिति में तुरंत सांस छोड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है.
अगर कोई इंसान अंतरिक्ष में सांस रोकने की कोशिश करता है तो बाहरी प्रेशर की कमी की वजह से फेफड़ों के अंदर की हवा तेजी से फैलती है. इससे फेफड़े फट सकते हैं. यही वजह है कि एस्ट्रोनॉट्स को ऐसी स्थिति में तुरंत सांस छोड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है.
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लगभग जीरो प्रेशर में लार, आंसू और जीभ पर मौजूद नमी जैसे तरल पदार्थ शरीर के तापमान पर उबलने लगता हैं. हालांकि इससे गंभीर सूजन और बेचैनी होती है लेकिन त्वचा और खून की नसें इतनी मजबूत होती हैं कि शरीर को फटने से रोक सके.
लगभग जीरो प्रेशर में लार, आंसू और जीभ पर मौजूद नमी जैसे तरल पदार्थ शरीर के तापमान पर उबलने लगता हैं. हालांकि इससे गंभीर सूजन और बेचैनी होती है लेकिन त्वचा और खून की नसें इतनी मजबूत होती हैं कि शरीर को फटने से रोक सके.
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कोई भी इंसान तुरंत नहीं जमता. अंतरिक्ष एक वैक्यूम है इस वजह से गर्मी तेजी से बाहर नहीं निकल सकती. हालांकि सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आने की वजह से कुछ ही सेकंड में गंभीर रेडिएशन बर्न हो सकते हैं.
कोई भी इंसान तुरंत नहीं जमता. अंतरिक्ष एक वैक्यूम है इस वजह से गर्मी तेजी से बाहर नहीं निकल सकती. हालांकि सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आने की वजह से कुछ ही सेकंड में गंभीर रेडिएशन बर्न हो सकते हैं.
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अगर इंसान को लगभग 60-90 सेकंड के अंदर प्रेशर वाले माहौल में वापस लाया जाता है तो जिंदा रहने की संभावना कहीं ज्यादा होती है. तेजी से प्रेशर बढ़ने से दिमाग को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है.
अगर इंसान को लगभग 60-90 सेकंड के अंदर प्रेशर वाले माहौल में वापस लाया जाता है तो जिंदा रहने की संभावना कहीं ज्यादा होती है. तेजी से प्रेशर बढ़ने से दिमाग को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है.

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