कैश, बेनामी संपत्ति और भारी भ्रष्टाचार! झारखंड भर्ती घोटाले में ED की रडार पर 150 लोग, जल्द एक्शन
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और घोटाले की जांच का दायरा बढ़ गया है. ईडी की जांच के दायरे में करीब 150 लोग हैं. जल्द ही ईडी कई ठिकानों पर कार्रवाई कर सकती है.

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय गड़बड़ी के एंगल से जांच शुरू कर दी है. ईडी की जांच के दायरे में करीब 150 लोग बताए जा रहे हैं. इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व पदाधिकारी, सदस्य, अधिकारी-कर्मचारी और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोग शामिल हैं.
अलग-अलग पहलुओं पर ईडी कर रही जांच
ईडी की जांच का दायरा अब केवल परीक्षा में हुई कथित धांधली तक सीमित नहीं है, बल्कि बेनामी संपत्ति, नकद लेनदेन और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार से जुड़े पहलुओं तक भी पहुंच गया है. ईडी की जांच के दायरे में आए इन लोगों की भूमिका के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में कथित वित्तीय लेनदेन और अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है.
कई ठिकानों पर जल्द हो सकती है कार्रवाई
एबीपी न्यूज से बातचीत में ईडी के सूत्रों ने बताया कि मामले में जल्द ही कई ठिकानों पर कार्रवाई की जा सकती है. इसके लिए अलग-अलग स्तर पर कई जांच टीमें बनाई गई हैं.
मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे
जांच के दौरान संबंधित लोगों के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है. ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के पीछे किसी तरह का आर्थिक लेनदेन हुआ था या नहीं.
कई दिनों से चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन
बता दें कि रांची में कई दिनों से जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. वे परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि दोषियों पर कार्रवाई हो और भर्ती प्रक्रिया में सुधार हो.
विपक्ष के निशाने पर झारखंड सरकार
विरोध के बीच आंदोलनकारी छात्रों ने झारखंड विधानसभा के पास भी प्रदर्शन किया था. उनको सुरक्षाबलों ने आगे जाने से रोक दिया था. उन पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया था. इस पूरे में झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार विपक्ष के निशाने पर भी है. विपक्ष के नेता आरोप लगा चुके हैं कि सोरेन सरकार जानबूझकर मामले की सीबीआइ जांच कराने से बच रही है.
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