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चीयर्स कैसे बना जाम का हिस्सा, जानिए इसके पीछे का रोचक किस्सा

जाम उठाने से पहले चीयर्स कहने की परंपरा सिर्फ खुशी जताने तक सीमित नहीं है, इसके पीछे सदियों पुराना इतिहास जुड़ा है. आइए जानें कि इसका इतिहास क्या है और यह क्यों कहा जाता है.

जाम उठाने से पहले चीयर्स कहने की परंपरा सिर्फ खुशी जताने तक सीमित नहीं है, इसके पीछे सदियों पुराना इतिहास जुड़ा है. आइए जानें कि इसका इतिहास क्या है और यह क्यों कहा जाता है.

महफिल सजी हो, गिलास हाथ में हो और सब एक साथ बोल उठें चीयर्स. यह दृश्य आज आम है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जाम टकराने से पहले यही शब्द क्यों कहा जाता है? क्या यह सिर्फ खुशी जताने का तरीका है या इसके पीछे कोई गहरी कहानी छिपी है? इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि चीयर्स सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है. आइए जानें.

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आज शराब पीने से पहले चीयर्स कहना एक आम आदत है. जैसे फोन पर बात शुरू करने से पहले हैलो कहते हैं, वैसे ही जाम उठाने से पहले चीयर्स बोला जाता है, लेकिन यह शब्द यहां तक कैसे पहुंचा?
आज शराब पीने से पहले चीयर्स कहना एक आम आदत है. जैसे फोन पर बात शुरू करने से पहले हैलो कहते हैं, वैसे ही जाम उठाने से पहले चीयर्स बोला जाता है, लेकिन यह शब्द यहां तक कैसे पहुंचा?
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इतिहासकारों के अनुसार चीयर्स शब्द फ्रेंच भाषा के पुराने शब्द chiere से निकला है, जिसका मतलब चेहरा या भाव होता था. 18वीं शताब्दी तक आते-आते यह शब्द खुशी जताने या किसी का हौसला बढ़ाने के अर्थ में इस्तेमाल होने लगा. धीरे-धीरे यह सामाजिक समारोहों और दावतों का हिस्सा बन गया.
इतिहासकारों के अनुसार चीयर्स शब्द फ्रेंच भाषा के पुराने शब्द chiere से निकला है, जिसका मतलब चेहरा या भाव होता था. 18वीं शताब्दी तक आते-आते यह शब्द खुशी जताने या किसी का हौसला बढ़ाने के अर्थ में इस्तेमाल होने लगा. धीरे-धीरे यह सामाजिक समारोहों और दावतों का हिस्सा बन गया.
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चीयर्स से जुड़ी एक लोकप्रिय कहानी मध्यकालीन यूरोप से आती है. उस दौर में जहर देकर हत्या करना आम साजिशों में शामिल था. इसलिए जब लोग साथ बैठकर शराब पीते थे, तो गिलास आपस में जोर से टकराते थे.
चीयर्स से जुड़ी एक लोकप्रिय कहानी मध्यकालीन यूरोप से आती है. उस दौर में जहर देकर हत्या करना आम साजिशों में शामिल था. इसलिए जब लोग साथ बैठकर शराब पीते थे, तो गिलास आपस में जोर से टकराते थे.
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माना जाता था कि गिलास टकराने से थोड़ी-सी शराब एक-दूसरे के प्यालों में मिल जाती है. इससे यह भरोसा बनता था कि अगर किसी एक गिलास में जहर है, तो वह सबमें बराबर बंट जाएगा और कोई एक व्यक्ति निशाना नहीं बनेगा. हालांकि इतिहासकार इसे पूरी तरह प्रमाणित तथ्य नहीं मानते, लेकिन यह कहानी काफी मशहूर है.
माना जाता था कि गिलास टकराने से थोड़ी-सी शराब एक-दूसरे के प्यालों में मिल जाती है. इससे यह भरोसा बनता था कि अगर किसी एक गिलास में जहर है, तो वह सबमें बराबर बंट जाएगा और कोई एक व्यक्ति निशाना नहीं बनेगा. हालांकि इतिहासकार इसे पूरी तरह प्रमाणित तथ्य नहीं मानते, लेकिन यह कहानी काफी मशहूर है.
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एक और मान्यता मध्ययुगीन अंधविश्वासों से जुड़ी है. उस समय लोग मानते थे कि बुरी आत्माएं और नकारात्मक शक्तियां इंसानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. गिलास टकराने की आवाज तेज होती थी. माना जाता था कि इस आवाज से बुरी आत्माएं दूर भागती हैं. कुछ जगहों पर लोग जाम टकराने के बाद थोड़ा-सा पेय जमीन पर भी गिरा देते थे, ताकि वह हिस्सा आत्माओं के लिए अर्पित माना जाए और पीने वाले सुरक्षित रहें.
एक और मान्यता मध्ययुगीन अंधविश्वासों से जुड़ी है. उस समय लोग मानते थे कि बुरी आत्माएं और नकारात्मक शक्तियां इंसानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. गिलास टकराने की आवाज तेज होती थी. माना जाता था कि इस आवाज से बुरी आत्माएं दूर भागती हैं. कुछ जगहों पर लोग जाम टकराने के बाद थोड़ा-सा पेय जमीन पर भी गिरा देते थे, ताकि वह हिस्सा आत्माओं के लिए अर्पित माना जाए और पीने वाले सुरक्षित रहें.
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चीयर्स को आस्था से भी जोड़ा जाता है. कई प्राचीन सभ्यताओं में देवताओं को शराब या रक्त अर्पित करने की परंपरा थी. किसी भी जश्न या युद्ध से पहले देवताओं के नाम पर पेय चढ़ाया जाता था.
चीयर्स को आस्था से भी जोड़ा जाता है. कई प्राचीन सभ्यताओं में देवताओं को शराब या रक्त अर्पित करने की परंपरा थी. किसी भी जश्न या युद्ध से पहले देवताओं के नाम पर पेय चढ़ाया जाता था.
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इंटरनेशनल हैंडबुक ऑफ अल्कोहल एंड कल्चर जैसे शोध ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि जाम उठाने की परंपरा संभवत: इसी धार्मिक रिवाज से विकसित हुई. लोग जाम उठाकर ईश्वर का नाम लेते थे और फिर उसे पीते थे. समय के साथ यह धार्मिक भाव कम होता गया और सामाजिक परंपरा ज्यादा मजबूत हो गई.
इंटरनेशनल हैंडबुक ऑफ अल्कोहल एंड कल्चर जैसे शोध ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि जाम उठाने की परंपरा संभवत: इसी धार्मिक रिवाज से विकसित हुई. लोग जाम उठाकर ईश्वर का नाम लेते थे और फिर उसे पीते थे. समय के साथ यह धार्मिक भाव कम होता गया और सामाजिक परंपरा ज्यादा मजबूत हो गई.

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