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धान की फसल बोने से पहले सावधान हो जाएं किसान, पैदावार को आधा कर सकता है ये रोग

Paddy Crops Tips:धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाले खैरा रोग से बचाव के लिए किसानों को बुवाई से पहले ही अलर्ट होना पड़ेगा. इन तरीकों से इस इस बीमारी को सही समय पर रोका जा सकता है.

Paddy Crops Tips:धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाले खैरा रोग से बचाव के लिए किसानों को बुवाई से पहले ही अलर्ट होना पड़ेगा. इन तरीकों से इस इस बीमारी को सही समय पर रोका जा सकता है.

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह सीजन बेहद महत्वपूर्ण है. लेकिन बुवाई से पहले एक ऐसी खतरनाक बीमारी के बारे में जान लेना जरूरी है, जो आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह रोग आपकी धान की पैदावार को सीधे आधा यानी 50% तक कम कर सकता है.

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धान में लगने वाले खैरा रोग धान के पौधों को अंदर से खोखला और कमजोर बना देता है. शुरुआत में किसान इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे खेत में फैल जाती है. सही समय पर पहचान न होने से पूरी फसल बर्बाद होने की नौबत आ जाती है.
धान में लगने वाले खैरा रोग धान के पौधों को अंदर से खोखला और कमजोर बना देता है. शुरुआत में किसान इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे खेत में फैल जाती है. सही समय पर पहचान न होने से पूरी फसल बर्बाद होने की नौबत आ जाती है.
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इस रोग के लक्षणों की बात करें तो धान की पत्तियां हल्की पीली पड़ने लगती हैं. कुछ समय बाद इन पत्तियों पर कत्थई या लाल-भूरे रंग के छोटे-छोटे धब्बे साफ दिखाई देने लगते हैं. पौधा एकदम से बौना रह जाता है, उसका विकास पूरी तरह रुक जाता है और जड़ें भी ठीक से नहीं फैल पाती हैं.
इस रोग के लक्षणों की बात करें तो धान की पत्तियां हल्की पीली पड़ने लगती हैं. कुछ समय बाद इन पत्तियों पर कत्थई या लाल-भूरे रंग के छोटे-छोटे धब्बे साफ दिखाई देने लगते हैं. पौधा एकदम से बौना रह जाता है, उसका विकास पूरी तरह रुक जाता है और जड़ें भी ठीक से नहीं फैल पाती हैं.
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कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक धान में खैरा रोग लगने की सबसे बड़ी वजह मिट्टी में जिंक यानी जस्ते की भारी कमी होना है. जब खेत की मिट्टी में जिंक का लेवल कम हो जाता है, तो पौधे जरूरी पोषक तत्व नहीं ले पाते. नर्सरी तैयार करते समय या रोपाई के तुरंत बाद यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है.
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक धान में खैरा रोग लगने की सबसे बड़ी वजह मिट्टी में जिंक यानी जस्ते की भारी कमी होना है. जब खेत की मिट्टी में जिंक का लेवल कम हो जाता है, तो पौधे जरूरी पोषक तत्व नहीं ले पाते. नर्सरी तैयार करते समय या रोपाई के तुरंत बाद यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है.
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इस घातक बीमारी से अपनी फसल को बचाने का सबसे सही समय रोपाई से ठीक पहले का होता है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं. अगर मिट्टी में जिंक की कमी पाई जाती है. तो बुवाई और रोपाई की तैयारी करते समय ही इसका परमानेंट इलाज कर लेना चाहिए.
इस घातक बीमारी से अपनी फसल को बचाने का सबसे सही समय रोपाई से ठीक पहले का होता है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं. अगर मिट्टी में जिंक की कमी पाई जाती है. तो बुवाई और रोपाई की तैयारी करते समय ही इसका परमानेंट इलाज कर लेना चाहिए.
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खैरा रोग को रोकने के लिए जिंक सल्फेट का इस्तेमाल सबसे अचूक और रामबाण उपाय माना जाता है. खेत की आखिरी जुताई के समय प्रति एकड़ के हिसाब से सही मात्रा में जिंक सल्फेट मिट्टी में मिला देना चाहिए. ऐसा करने से पौधों को शुरुआती स्टेज से ही पूरा पोषण मिलता है और बीमारी का खतरा टल जाता है
खैरा रोग को रोकने के लिए जिंक सल्फेट का इस्तेमाल सबसे अचूक और रामबाण उपाय माना जाता है. खेत की आखिरी जुताई के समय प्रति एकड़ के हिसाब से सही मात्रा में जिंक सल्फेट मिट्टी में मिला देना चाहिए. ऐसा करने से पौधों को शुरुआती स्टेज से ही पूरा पोषण मिलता है और बीमारी का खतरा टल जाता है
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अगर रोपाई के बाद खड़ी फसल में इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जिंक सल्फेट और बुझे हुए चूने का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. बुवाई से पहले की गई थोड़ी सी सावधानी और सही मात्रा में जिंक का इस्तेमाल किसानों को भारी नुकसान से बचा सकता है और बंपर पैदावार दे सकता है.
अगर रोपाई के बाद खड़ी फसल में इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जिंक सल्फेट और बुझे हुए चूने का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. बुवाई से पहले की गई थोड़ी सी सावधानी और सही मात्रा में जिंक का इस्तेमाल किसानों को भारी नुकसान से बचा सकता है और बंपर पैदावार दे सकता है.

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