एक्सप्लोरर

100 दिन, सीधा संवाद: 'सहयोग कार्यक्रम' बिहार में सुशासन की नई संस्कृति की ओर एक महत्वपूर्ण कदम

किसी भी राज्य की प्रगति केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स या निवेश के आंकड़ों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से तय होती है कि आम नागरिक को सरकारी सेवाएं कितनी सहजता, पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से मिल रही हैं. सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि सरकार और जनता के बीच की दूरी कम हो, संवाद मजबूत हो और शिकायतों का समाधान व्यवस्था की प्राथमिकता बने. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार के पहले 100 दिनों में शुरू किया गया 'सहयोग कार्यक्रम' इसी सोच को व्यवहार में उतारने का प्रयास प्रतीत होता है.

एक उद्यमी के तौर पर मेरा मानना है कि किसी भी संस्था की सबसे बड़ी ताकत उसके हितधारकों का विश्वास होता है. निजी क्षेत्र में हम लगातार यह सीखते हैं कि ग्राहक की समस्या को जितनी जल्दी और पारदर्शी तरीके से हल किया जाएगा, संस्था की विश्वसनीयता उतनी ही मजबूत होगी. यही सिद्धांत शासन-प्रशासन पर भी लागू होता है. जब सरकार स्वयं नागरिकों तक पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनती है और समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा तय करती है, तब प्रशासन केवल आदेश देने वाली व्यवस्था नहीं रह जाता, बल्कि सेवा देने वाली व्यवस्था बनता है.

'सहयोग कार्यक्रम' की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें नागरिक को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने के बजाय प्रशासन उसके दरवाजे तक पहुंच रहा है. पंचायत स्तर पर नियमित सहयोग शिविर आयोजित करना और स्थानीय स्तर पर समस्याओं के समाधान का प्रयास करना प्रशासन को विकेंद्रीकृत और अधिक प्रभावी बनाता है. वहीं, जिन मामलों का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाता, उन्हें मुख्यमंत्री स्वयं राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में सुनते हैं. लोकतांत्रिक शासन में इस तरह का सीधा संवाद जवाबदेही की भावना को और मजबूत करता है.

आज के दौर में डिजिटल तकनीक सुशासन की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बन चुकी है. बिहार सरकार द्वारा विकसित रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (RTMS) इस दिशा में एक सकारात्मक पहल है. शिकायतों की ऑनलाइन ट्रैकिंग, प्रत्येक आवेदन की निगरानी और 30 दिनों के भीतर समाधान का लक्ष्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने की क्षमता रखता है. इससे नागरिकों को यह भरोसा मिलता है कि उनकी शिकायत किसी फाइल में दबकर नहीं रह जाएगी, बल्कि उसकी प्रगति पर लगातार नजर रखी जाएगी.

मुझे इस पहल का मानवीय पक्ष भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण लगता है. अक्सर देखा जाता है कि गरीब और ग्रामीण परिवार दस्तावेजों की कमी, जानकारी के अभाव या प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते. यदि अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे आवेदन को केवल कागजात की कमी के आधार पर खारिज न करें, बल्कि आवेदक की मदद करें, तो यह शासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है. किसी भी प्रभावी प्रशासन की पहचान केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि नागरिकों के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण भी होती है.

इन 100 दिनों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत करोड़ों रुपये की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से लाखों लाभार्थियों के खातों में भेजना भी प्रशासनिक दक्षता का संकेत है. बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के लिए समय पर पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और सम्मान का माध्यम है. इसी तरह मुख्यमंत्री सोलर योजना के जरिए स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और बिजली खर्च कम करने की दिशा में प्रयास भविष्य की जरूरतों के अनुरूप एक दूरदर्शी पहल कही जा सकती है.

हालांकि, किसी भी प्रशासनिक मॉडल की वास्तविक परीक्षा उसके निरंतर और प्रभावी क्रियान्वयन में होती है. 'सहयोग कार्यक्रम' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पंचायत स्तर पर आयोजित शिविर नियमित रूप से संचालित हों, शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो, डिजिटल निगरानी प्रणाली प्रभावी ढंग से काम करे और अधिकारियों की जवाबदेही लगातार बनी रहे. यदि इन पहलुओं पर समान गंभीरता बनी रहती है, तो यह व्यवस्था लंबे समय तक जनविश्वास कायम रखने में सफल हो सकती है.

एक उद्योगपति होने के नाते मेरा अनुभव कहता है कि किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विश्वसनीयता होती है. सरकारों के लिए भी यही सिद्धांत लागू होता है. जब नागरिक यह महसूस करते हैं कि उनकी बात सुनी जा रही है, उनकी समस्याओं का समाधान तय समय में हो रहा है और प्रशासन जवाबदेह है, तब लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है.

मेरे विचार से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार के पहले 100 दिनों में शुरू किया गया 'सहयोग कार्यक्रम' बिहार में जन-केंद्रित, जवाबदेह और तकनीक-संचालित शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. यदि यह मॉडल इसी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ता है, तो आने वाले समय में यह केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए सुशासन का एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है. लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति भी यही है कि सरकार और जनता के बीच संवाद निरंतर बना रहे और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
Advertisement
Advertisement
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

अमेरिकी धरती पर US को भारत ने जमकर सुनाया, जयशंकर बोले- 'दिखावा खत्म'
अमेरिकी धरती पर US को भारत ने जमकर सुनाया, जयशंकर बोले- 'दिखावा खत्म'
मिशन-27 के लिए अखिलेश का 27 हजार वाला प्लान, जानें क्या है रणनीति?
मिशन-27 के लिए अखिलेश का 27 हजार वाला प्लान, जानें क्या है रणनीति?
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा SC, CJI से वकील बोले - गंभीर मसला
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा SC, CJI से वकील बोले - गंभीर मसला
क्रिकेट में आया एक, जानें भारत को अब तक किस खेल में मिले सबसे ज्यादा गोल्ड?
क्रिकेट में आया एक, जानें भारत को अब तक किस खेल में मिले सबसे ज्यादा गोल्ड?

वीडियोज

एक सोशल मीडिया स्टार की 'सुसाइड मिस्ट्री' !
चालान नहीं भरेंगे तो बिजली कटेगी!
प्रवेश वर्मा थप्पड़ कांड की पूरी क्रोनोलॉजी, कब क्या हुआ?
भारी बारिश से नेपाल में तबाही, पलभर में जमींदोज हुई इमारतें!
मस्जिद पर एक्शन, खड़े हनुमान पर सवाल...उज्जैन में क्यों बढ़ा विवाद?

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
अमेरिकी धरती पर US को भारत ने जमकर सुनाया, जयशंकर बोले- 'दिखावा खत्म'
अमेरिकी धरती पर US को भारत ने जमकर सुनाया, जयशंकर बोले- 'दिखावा खत्म'
मिशन-27 के लिए अखिलेश का 27 हजार वाला प्लान, जानें क्या है रणनीति?
मिशन-27 के लिए अखिलेश का 27 हजार वाला प्लान, जानें क्या है रणनीति?
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा SC, CJI से वकील बोले - गंभीर मसला
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा SC, CJI से वकील बोले - गंभीर मसला
क्रिकेट में आया एक, जानें भारत को अब तक किस खेल में मिले सबसे ज्यादा गोल्ड?
क्रिकेट में आया एक, जानें भारत को अब तक किस खेल में मिले सबसे ज्यादा गोल्ड?
'गले में रुद्राक्ष, थाली में मटन…' शहजाद पूनावाला पर सिवेत तोमर ने किया तीखा वार
'गले में रुद्राक्ष पहन मटन खाते हैं शहजाद', सिवेत तोमर का खुलासा
कितने साल के हुए अभिजीत दीपके? बर्थडे विश करते हुए आशुतोष रांका बोले- 'तुमने ही...'
कितने साल के हुए अभिजीत दीपके? बर्थडे विश करते हुए आशुतोष रांका बोले- 'तुमने ही...'
एशियन गेम्स: अगर बारिश में धुल गया क्रिकेट का फाइनल, तो किसे मिलेगा गोल्ड मेडल? जानें नियम
अगर बारिश में धुल गया क्रिकेट का फाइनल, तो किसे मिलेगा गोल्ड मेडल? जानें नियम
निशिकांत दुबे ने सुभाष गर्ग पर किया मानहानी का केस, कहा- अब कोर्ट करेगा फैसला
निशिकांत दुबे ने सुभाष गर्ग पर किया मानहानी का केस, कहा- अब कोर्ट करेगा फैसला
Embed widget