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Exclusive: रिश्ता टूटने से बचाना है तो आशुतोष राणा का यह ‘गोल्डन रूल’ अभी जान लीजिए, खोल देगा आपकी आंखें

Ashutosh Rana Interview: आशुतोष राणा ने बताया क्यों टूट रहे हैं आज के रिश्ते? शादी को लेकर दिया सबसे बड़ा ‘गोल्डन रूल’, जो आज की जनरेशन के रिश्तों और शादी को लेकर बेहद आवश्यक है.

आज की इस भागती-दौड़ती जिंदगी में जहां इंसान के पास भौतिक सुख-सुविधाओं के तमाम साधन मौजूद हैं, वहीं दो चीजें कहीं पीछे छूटती नजर आ रही हैं. पहली चुनौती गहरे और सच्चे रिश्तों को बचाए रखने की है, तो दूसरी चुनौती मन की शांति यानी अध्यात्म से जुड़े रहने की है.

आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z और Millennials) के सामने सबसे बड़ा संकट यही है कि वे इन दोनों के बीच संतुलन कैसे कायम करें. इसी सिलसिले में मशहूर अभिनेता, लेखक और दार्शनिक आशुतोष राणा ने अपनी नई स्पिरिचुअल पहल 'दुर्लभ दर्शन' (6D VR टेक्नोलॉजी के जरिए महाकाल और अयोध्या के दर्शन) के मौके पर एबीपी लाइव से एक खास बातचीत की.

इस संवाद में उन्होंने जीवन, अध्यात्म और आज की पीढ़ी के बदलते रिश्तों को लेकर कुछ बेहद गहरे और व्यावहारिक सूत्र दिए हैं, जिन्हें सनातन धर्म के दर्शन और पौराणिक प्रमाणों के साथ समझना बेहद जरूरी है.

रिश्तों की शुरुआत और ठहराव का अनूठा सूत्र

आशुतोष राणा ने आज के वैवाहिक जीवन और रिलेशनशिप की सबसे बड़ी कमजोरी पर चोट करते हुए एक अद्भुत बात कही है. उनका मानना है कि कोई भी रिश्ता शुरू करने से पहले हमें पूरी जागरूकता के साथ सामने वाले इंसान को समझ लेना चाहिए, यानी तब अपनी पूरी आंखें खुली रखनी चाहिए.

लेकिन एक बार जब आप किसी के साथ रिश्ते के बंधन में जुड़ जाते हैं, तो उसके बाद अपनी आधी आंखें बंद कर लेनी चाहिए. इसका सीधा सा मतलब यह है कि रिश्ता बन जाने के बाद हर छोटी-मोटी कमी को कुरेदने या उस पर शिकायत करने के बजाय कुछ बातों को अनदेखा करना भी जरूरी होता है.

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सनातन दर्शन भी यही सिखाता है कि इस संसार में कोई भी मनुष्य पूर्ण नहीं है और हर किसी में कुछ गुण तो कुछ दोष अवश्य होते हैं. श्रीमद्भगवद्गीता के अठारहवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने भी यही कहा है कि जैसे अग्नि हमेशा धुएं से ढकी रहती है, वैसे ही हर मनुष्य या हर कर्म में कोई न कोई कमी या दोष जरूर होता है.

पौराणिक संदर्भों में देखें तो माता सीता और भगवान श्रीराम के जीवन में भी यही संतुलन दिखता है, जहां विवाह से पहले पात्रता को परखा गया लेकिन विवाह के बाद दोनों ने एक-दूसरे की मानवीय सीमाओं को स्वीकार कर केवल प्रेम और कर्तव्य को सर्वोपरि रखा.

आज के दौर में रिश्ते इसलिए जल्दी टूट रहे हैं क्योंकि लोग शादी के बाद अपने पार्टनर को बदलने की कोशिश में लग जाते हैं, जबकि आधी आंखें बंद करने का मतलब उदासीनता नहीं बल्कि सामने वाले को उसकी कमियों के साथ स्वीकार करने की परिपक्वता है.

सलाहकार नहीं बल्कि एक संवेदनशील श्रोता बनें

इस बातचीत के दौरान आशुतोष राणा ने एक और बेहद महत्वपूर्ण व्यावहारिक बात उठाई जो आज के दौर में संवादहीनता को दूर कर सकती है. उन्होंने कहा कि जब भी आपका जीवनसाथी या कोई अपना अपनी कोई परेशानी आपके साथ साझा करे, तो तुरंत उसे कोई समाधान या सलाह देने की कोशिश मत कीजिए.

दरअसल, ज्यादातर लोगों के पास अपनी समस्याओं का हल पहले से ही मौजूद होता है, उन्हें बस एक ऐसा संवेदनशील कान चाहिए होता है जो बिना उन्हें जज किए या बिना किसी पूर्वाग्रह के उनकी बात को पूरे धैर्य के साथ सुन सके.

भारतीय दर्शन में भी 'श्रवण' यानी गहरे से सुनने को सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, चाहे वह अध्यात्म का क्षेत्र हो या व्यावहारिक जीवन का. इसका सबसे बड़ा प्रमाण महाभारत के युद्ध क्षेत्र में मिलता है, जब अर्जुन भारी अवसाद और दुविधा से घिरे हुए थे.

Exclusive: रिश्ता टूटने से बचाना है तो आशुतोष राणा का यह ‘गोल्डन रूल’ अभी जान लीजिए, खोल देगा आपकी आंखें

उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने तुरंत उपदेश देना शुरू नहीं किया, बल्कि वे गीता के पहले अध्याय में चुपचाप अर्जुन की हर पीड़ा, उनके आंसुओं और उनके तर्कों को सुनते रहे. जब अर्जुन अपनी पूरी बात कहकर शांत हो गए, तब जाकर कृष्ण ने बोलना शुरू किया.

आज के रिश्तों में लोग समझने के लिए नहीं बल्कि तुरंत पलटकर जवाब देने या खुद को सही साबित करने के लिए सुनते हैं, जबकि किसी अपने की बात को बिना किसी जजमेंट के ध्यान से सुन लेना ही उसके आधे मानसिक तनाव को समाप्त कर देता है.

श्रीराम और महादेव के चरित्र से आधुनिक जीवन की सीख

आशुतोष राणा ने भगवान श्रीराम और देवों के देव महादेव के चरित्र को आज की पीढ़ी के लिए एक महान सीख के रूप में प्रस्तुत किया है. उन्होंने समझाया कि यदि हमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम से कुछ सीखना है, तो यह सीखना चाहिए कि धर्म और मर्यादा का निर्वाह कैसे किया जाता है, चाहे वह मित्र का धर्म हो, शत्रु का धर्म हो, पुत्र का हो या फिर पति का.

वहीं दूसरी ओर भगवान शिव के चरित्र से हमें यह सीखना चाहिए कि जीवन की तमाम विसंगतियों के बीच संगति और सामंजस्य कैसे स्थापित किया जाता है.

अगर महादेव के परिवार को देखें तो वहां हर स्तर पर विरोधी स्वभाव के जीव एक साथ रहते हैं, जैसे महादेव के गले में सांप है तो उनके पुत्र कार्तिकेय का वाहन मोर है, जो एक-दूसरे के कड़वे दुश्मन हैं. इसके बावजूद वहां परम शांति है, जो यह सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों और अलग स्वभाव के लोगों के बीच तालमेल कैसे बैठाया जाए.

आज के आधुनिक परिवारों में वैचारिक मतभेद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि हम महादेव के इस सूत्र को अपना लें कि भिन्न स्वभाव के बावजूद एक साथ प्रेमपूर्वक कैसे रहा जाता है, तो किसी भी परिवार को बिखरने से बचाया जा सकता है.

विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम है दुर्लभ दर्शन

इंटरव्यू के अंत में आशुतोष राणा ने अपनी नई आध्यात्मिक पहल 'दुर्लभ दर्शन' का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी का सबसे बेहतरीन इस्तेमाल वही है जो इंसान को भटकाने के बजाय उसकी जड़ों और परमात्मा से जोड़ने का काम करे.

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जो बुजुर्ग, बीमार या अत्यधिक व्यस्त लोग भौतिक रूप से बाबा महाकाल की भस्म आरती या अयोध्या धाम नहीं जा पाते हैं, वे इस 6D VR (वर्चुअल रियलिटी) तकनीक के माध्यम से घर बैठे ही उस पूरी दिव्यता और तृप्ति का साक्षात अनुभव कर सकते हैं.

यह पहल इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि विज्ञान और आध्यात्मिकता एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं. जहां विज्ञान मनुष्य के बाहरी जीवन को सुगम और तीव्र बनाता है, वहीं अध्यात्म उसके अंतर्मन को धीरज और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है.

अंततः यही कहा जा सकता है कि आज के बदलते दौर में मजबूत रिश्ते सिर्फ खोखले शब्दों से नहीं, बल्कि सच्ची समझ, धैर्य, भरोसे और एक-दूसरे को गहरे से सुनने की आदत से ही जीवित रह सकते हैं.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q. आशुतोष राणा ने रिश्तों के बारे में क्या कहा?
A. उन्होंने कहा कि रिश्ता बनाने से पहले व्यक्ति को अच्छी तरह समझें, लेकिन रिश्ता बनने के बाद छोटी-छोटी कमियों को स्वीकार करना सीखें.

Q. रिश्तों में सबसे जरूरी क्या है?
A. सामने वाले को बिना जज किए धैर्यपूर्वक सुनना और उसकी कमियों को स्वीकार करना.

Q. श्रीराम और भगवान शिव से क्या सीख मिलती है?
A. श्रीराम मर्यादा और कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देते हैं, जबकि भगवान शिव विपरीत स्वभाव के लोगों के बीच सामंजस्य बनाकर रहने की सीख देते हैं.

Q. दुर्लभ दर्शन क्या है?
A. यह 6D VR तकनीक आधारित आध्यात्मिक पहल है, जिसके माध्यम से लोग घर बैठे महाकाल और अयोध्या के दर्शन का वर्चुअल अनुभव कर सकते हैं.

यह भी पढे़ं- NEET लीक से लेकर मंदिर घोटाले तक, जुलाई में क्यों सुलगने जा रही है देश की राजनीति?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

वंशिका शर्मा को मीडिया इंडस्ट्री में 3 साल से ज़्यादा का अनुभव है और वह इस समय ABP लाइव के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने ABP की English वेबसाइट के लिए भी काम किया है और नोएडा से ‘सास बहु और साज़िश’ के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को संभाला और लीड किया, जहाँ एंटरटेनमेंट से जुड़ा कंटेंट सीधे दर्शकों तक पहुँचाया. फिलहाल वह एंटरटेनमेंट बीट देख रही हैं, जहाँ वह बॉलीवुड और टीवी कलाकारों के साथ-साथ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के अच्छी तरह से प्लान किए गए, मज़ेदार और जानकारी से भरपूर इंटरव्यू करती हैं. उनका तरीका ऐसा रहता है कि बातचीत दिलचस्प भी हो और दर्शकों को कुछ नया जानने को भी मिले. पढ़ने और घूमने की शौकीन हैं और नई जगहें एक्सप्लोर करना उन्हें पसंद है. नए लोगों से मिलना-जुलना और उनकी कहानियाँ जानना उन्हें खास तौर पर आकर्षित करता है. सोशल मीडिया पर वह काफी एक्टिव रहती हैं और अपनी पोस्ट्स, इंटरव्यू और कंटेंट के ज़रिए लोगों से जुड़े रहना पसंद करती हैं. वंशिका इम्पैक्टफुल एंटरटेनमेंट जर्नलिज़्म की राह पर आगे बढ़ रही हैं और उनका मानना है कि मनोरंजन की खबरें भी जिम्मेदारी और समझदारी के साथ दिखाई जानी चाहिए. 

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