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July 2026 Corporate World: छंटनी का खतरा या प्रमोशन की बहार? भारत की कुंडली से जानिए अपनी नौकरी का भविष्य

Prediction: जुलाई 2026 में नौकरी, प्रमोशन, सैलरी, AI, Layoff और कॉर्पोरेट सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा? भारत की स्वतंत्रता कुंडली, वर्षफल और ग्रह गोचर के आधार पर पढ़ें पूरा ज्योतिषीय विश्लेषण.

July 2026 Corporate World: क्या जुलाई 2026 में भारतीय कॉर्पोरेट जगत में बड़े पैमाने पर छंटनी (Layoffs) होने वाली है या मिड-ईयर परफॉर्मेंस रिव्यू में कर्मचारियों को तगड़ा सैलरी हाइक मिलेगा? वैश्विक स्तर पर बढ़ते एआई ट्रांसफॉर्मेशन (AI Transformation), ऑटोमेशन और बदलती हायरिंग ट्रेंड्स के बीच इस महीने आपका करियर किस मोड़ पर जाने वाला है?

जब बाजार की अनिश्चितता और आर्थिक दबाव बढ़ने लगते हैं, तो अक्सर लोग केवल सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने लगते हैं. लेकिन कॉर्पोरेट जगत के वास्तविक कमर्शियल ट्रेंड्स और भारतवर्ष की कुंडली के गहरे वित्तीय समीकरणों को एक साथ मिलाकर देखें, तो जुलाई 2026 का पूरा परिदृश्य एकदम साफ होकर सामने आ जाता है.

जुलाई का यह महीना कॉर्पोरेट वर्ल्ड में काम करने वाले लाखों प्रोफेशनल्स के लिए करियर की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है. एक तरफ जहां दुनिया भर की कंपनियां अपने Q1 रिजल्ट्स, अपस्किलिंग (Upskilling) और अप्रेजल साइकिल को अंतिम रूप देने में व्यस्त होंगी, वहीं दूसरी तरफ भारत की कुंडली में ग्रहों की एक ऐसी हलचल होने जा रही है जो सीधे आपके वर्कप्लेस, लीडरशिप और रोजगार (Jobs) को प्रभावित कर सकती है.

कॉर्पोरेट व्यवस्थाओं का 'री-इवैल्युएशन'

भारत की स्वतंत्रता कुंडली में वर्तमान समय में मंगल महादशा का प्रभाव चल रहा है. जुलाई 2026 का समय इसी महादशा के अंतर्गत आता है. जन्मकुंडली में मंगल द्वितीय भाव में मिथुन राशि के आर्द्रा नक्षत्र में स्थित है.

द्वितीय भाव राष्ट्रीय राजकोष, वित्तीय संसाधन, राजस्व, वाणी और आर्थिक स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है. ऐसे में इस अवधि में वित्तीय नीतियों, राजस्व प्रबंधन, कॉर्पोरेट निवेश और आर्थिक निर्णयों से जुड़े विषय अधिक प्रमुख रह सकते हैं.

वैदिक और मैदिनी ज्योतिष के नियमों के अनुसार, जब राजकोषीय भाव में मंगल जैसा आक्रामक ग्रह राहु जैसी तकनीकी और अनिश्चित अंतर्दशा के संपर्क में आता है, तो कॉर्पोरेट जगत में बड़े नीतिगत बदलाव देखने को मिलते हैं.

July 2026 Corporate World: छंटनी का खतरा या प्रमोशन की बहार? भारत की कुंडली से जानिए अपनी नौकरी का भविष्य

मैदिनी ताजिक वर्षफल (2026) के अनुसार यह वर्ष कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए अवसरों के साथ-साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा का भी संकेत देता है. वर्षेश और मुन्थेश के प्रभाव से लागत का दबाव, संचालन संबंधी चुनौतियां और आंतरिक प्रबंधन की जटिलताएं बढ़ सकती हैं.

विशेष रूप से आईटी, डिजिटल और डेटा-आधारित कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और वेंडर रिस्क जैसे विषय अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं. हालांकि वास्तविक व्यावसायिक परिणाम कंपनी की रणनीति, बाजार की स्थिति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेंगे.

कॉर्पोरेट व्यवस्था के लिहाज से इसका सीधा परिणाम यह होता है कि कंपनियां अपने पुराने सिस्टम्स, डेटा प्रोटेक्शन और खर्चों की दोबारा गहराई से समीक्षा (Audit & Re-evaluation) करना शुरू करती हैं. यही पैटर्न इस समय जमीन पर चल रहे वैश्विक आर्थिक संकट और घरेलू कॉर्पोरेट नीतियों में साफ झलकता है.

कहां बढ़ेंगे अवसर और कहां रहेगा दबाव?

1. IT, AI और फिनटेक (FinTech) सेक्टर

वैश्विक स्तर पर एआई अडॉप्शन (AI Adoption) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की मांग लगातार रिकॉर्ड बना रही है. भारत इस समय ग्लोबल इनहाउस सेंटर्स (India GCC Boom) के सबसे बड़े हब के रूप में उभर रहा है. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से राहु का संबंध सीधे आधुनिक तकनीक, एआई और कोडिंग से है.

ताजिक वर्षफल 2026 में मुन्था पंचम भाव (धनु राशि) में स्थित है, जिसे बुद्धिमत्ता, उच्च शिक्षा, नवाचार, रणनीति और निर्णय क्षमता का भाव माना जाता है. यह स्थिति संकेत देती है कि ज्ञान-आधारित क्षेत्रों, तकनीकी नवाचार और कौशल विकास को महत्व मिल सकता है.

ऐसे में जो प्रोफेशनल्स नई तकनीकों को अपनाने, रिस्किलिंग (Reskilling) और एआई आधारित कार्यप्रणालियों के साथ स्वयं को अपडेट कर रहे हैं, उनके लिए नए अवसर बनने की संभावना बढ़ सकती है.

वहीं आईटी, डिजिटल, फिनटेक और टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों के लिए भी नई साझेदारियों, परियोजनाओं या वैश्विक कारोबारी अवसरों की परिस्थितियां बन सकती हैं. हालांकि वास्तविक परिणाम कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति, वैश्विक मांग और बाजार की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेंगे.

2. स्टार्टअप (Startup Eco-system) और वेंचर कैपिटल

भारतीय स्टार्टअप्स में इस समय सेमीकंडक्टर इन्वेस्टमेंट्स और डीप-टेक पर भारी फोकस किया जा रहा है. हालांकि, मंगल-राहु की अंतर्दशा के कारण वित्तीय तरलता (Liquidity) पर दबाव रहेगा. इसका मतलब यह है कि जिन स्टार्टअप्स का पूरा फोकस बर्न-रेट कम करने और प्रॉफिटेबिलिटी पर है, वे तो स्थिर रहेंगे, लेकिन बिना ठोस बिजनेस मॉडल वाले नए वेंचर्स को फंडिंग की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है. हायरिंग के मामले में यहां बहुत ही चुनिंदा (Selective Hiring) का ट्रेंड रहेगा.

3. मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो (Manufacturing & Automobile)

वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे ऊर्जा और माल ढुलाई की लागत (Logistics Cost) बढ़ रही है. इसका सीधा असर भारत के मैन्युफैक्चरिंग, ऑटो और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर पर पड़ रहा है.

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव देखा जा सकता है. इस सेक्टर में काम करने वाले ऑपरेशंस और सप्लाई चेन प्रोफेशनल्स पर जुलाई के महीने में एफिशिएंसी बढ़ाने और केपीआई (KPI) को मेंटेन करने का भारी दबाव रहने के संकेत मिलते हैं.

4. बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं (BFSI)

मई-जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई (Retail Inflation) 3.9% और खाद्य महंगाई (Food Inflation) 4.8% के आसपास बनी हुई है. इस आर्थिक दबाव के बीच बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में कड़े क्रेडिट रिस्क असेसमेंट (Credit Risk Assessment) लागू किए जा रहे हैं. बैंकिंग प्रोफेशनल्स के लिए यह महीना खातों के ऑडिट, एनपीए (NPA) मैनेजमेंट और परफॉर्मेंस रिव्यू के लिहाज से बेहद व्यस्त रहने वाला है.

वर्कप्लेस लाइफ: अप्रेजल, सैलरी हाइक और कॉर्पोरेट पॉलिटिक्स

सैलरी हाइक (Salary Hike) और प्रमोशन की दिशा

जुलाई के उत्तरार्ध में, विशेष रूप से 16 जुलाई को जब सूर्य का गोचर भारत की जन्म-राशि (कर्क) पर होगा, तो कॉर्पोरेट जगत में लीडरशिप और अप्रेजल साइकिल से जुड़ी अटकी हुई फाइलें अचानक गति पकड़ सकती हैं.

सूर्य राजसत्ता और उच्च अधिकारियों का कारक है. यदि आपका परफॉर्मेंस रिव्यू शानदार रहा है, तो इस अवधि के बाद मैनेजमेंट की तरफ से आपके प्रमोशन या सैलरी हाइक को लेकर कोई बड़ी और सकारात्मक घोषणा की संभावना बन सकती है.

काम का दबाव और कॉर्पोरेट पॉलिटिक्स (Corporate Politics)

द्वितीय भाव की मंगल-राहु अंतर्दशा के कारण वर्कप्लेस का माहौल थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है. दूसरा भाव हमारी वाणी और संवाद की शैली को नियंत्रित करता है. वर्कप्लेस पर सहकर्मियों या सीनियर्स के साथ कम्यूनिकेशन गैप के कारण छोटी-छोटी बातों पर मतभेद या गलतफहमियां पैदा होने के आसार नजर आते हैं. इस महीने आंतरिक राजनीति (Internal Politics) के कारण कुछ प्रोफेशनल्स खुद को तनाव में पा सकते हैं.

जुलाई के 5 बड़े गोचर: कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स के लिए टाइमिंग का खेल

मंगल-राहु की अंतर्दशा एक बड़ा ढांचा तैयार करती है, लेकिन महीने के भीतर की सटीक तारीखें गोचर (Transit) से तय होती हैं. भारत की कुंडली के लग्न (वृषभ) और राशि (कर्क) के आधार पर जुलाई के इन 5 बड़े बदलावों को समझना बेहद जरूरी है-

4 जुलाई शुक्र का सिंह राशि में प्रवेश

सिंह राशि लग्न से चौथा भाव है जो सार्वजनिक भावनाओं और बड़ी संस्थाओं को दिखाता है. शुक्र कॉर्पोरेट जगत में विलासिता, ब्रांडिंग और बड़े निवेश का कारक है. इसका यहां आना लग्जरी गुड्स, रीयल एस्टेट और मीडिया कंपनियों में अचानक कमर्शियल एक्टिविटी बढ़ने की ओर इशारा करता है.

7 जुलाई वक्री बुध का मिथुन राशि में आना

बुध संचार, डेटा, हिसाब-किताब और कॉर्पोरेट एग्रीमेंट्स का स्वामी है. 7 से 24 जुलाई के बीच बुध की उल्टी चाल (वक्री स्थिति) यह चेतावनी देती है कि कंपनियों में डेटा मिसमैनेजमेंट, साइबर अटैक्स या सर्वर में तकनीकी खराबी (Technical Glitches) की आशंका बढ़ सकती है. किसी भी नए कॉन्ट्रैक्ट या ईमेल का जवाब देने से पहले दो बार री-चेक करना आवश्यक होगा.

16 जुलाई सूर्य का कर्क राशि में गोचर

सूर्य का यह गोचर सीधे देश की जन्म-राशि पर होगा. इसके प्रभाव से कंपनियों के टॉप मैनेजमेंट (CEO/HR Levels) द्वारा बड़े और कड़े फैसले लिए जा सकते हैं. कार्यक्षेत्र में आपकी परफॉर्मेंस को सीधे उच्च अधिकारियों द्वारा मॉनिटर किया जाएगा, जो आपके करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकता है.

24 जुलाई बुध का मिथुन राशि में मार्गी होना

बुध के सीधा चलने से परीक्षाओं, ऑडिट और डेटा से जुड़े विवादों में स्पष्टता आनी शुरू होगी. यदि आपका कोई इंटरव्यू या जॉब चेंज का मामला अटका हुआ था, तो 24 जुलाई के बाद उसमें फाइनल डिसीजन आने की स्थितियां बनेंगी.

27 जुलाई शनि का मीन राशि में वक्री होना

मीन राशि लग्न से एकादश भाव (संसद, बड़े संगठन, और कॉर्पोरेट नेटवर्किंग) है. शनि का वक्री होना प्रक्रियाओं को थोड़ा धीमा करता है. महीने के आखिरी हफ्ते में कॉर्पोरेट नेटवर्किंग या किसी बड़े कूटनीतिक समझौते में थोड़ी देरी हो सकती है, जिससे आपकी पुरानी रणनीतियों को दोबारा परखने की ज़रूरत पड़ेगी.

जुलाई 2026 में सफल होने का मूलमंत्र

मंगल-राहु की यह अंतर्दशा और जुलाई की जमीनी कॉर्पोरेट परिस्थितियां दोनों एक ही बात प्रमाणित करती हैं, यह समय आंख बंद करके बैठ जाने का नहीं, बल्कि खुद को लगातार अपग्रेड करने का है. जो प्रोफेशनल्स इस महीने इन तीन बातों का ध्यान रखेंगे, वे हर संकट को पार कर जाएंगे-

वाणी और गुस्से पर कड़ा काबू

कार्यक्षेत्र में होने वाली किसी भी मीटिंग में अपनी भाषा को बेहद प्रोफेशनल और संयमित रखें. जल्दबाजी में दिया गया कोई भी गलत बयान आपकी साख को नुकसान पहुंचा सकता है.

अपस्किलिंग (Upskilling) पर फोकस

यदि आप आईटी, बैंकिंग या टेक सेक्टर में हैं, तो नई तकनीकों (AI/Automation) को सीखने में संकोच न करें. पांचवें भाव की मुंथा साफ दिखाती है कि इस महीने आपकी बुद्धिमत्ता ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है.

डेटा सिक्योरिटी को लेकर अलर्ट रहें

खासकर 7 से 24 जुलाई के बीच किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन या महत्वपूर्ण ईमेल को भेजने से पहले उसके फैक्ट्स को अच्छी तरह जांच लें.

जुलाई 2026 का यह महीना कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स के लिए आक्रमण और अपनी योग्यता साबित करने का एक बेहतरीन और खुला मौका है. सफलता केवल इस बात पर निर्भर करेगी कि आप वर्कप्लेस की आंतरिक राजनीति से खुद को दूर रखते हुए अपनी स्किल और परफॉर्मेंस पर कितना फोकस कर पाते हैं. सही समय पर लिया गया एक समझदारी भरा फैसला आपके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है.

यह भी पढ़ें- जुलाई 2026 की 3 सबसे लकी राशियां, करियर से लेकर बैंक बैलेंस तक सबकुछ बदलेगा

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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