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सुबह उठने से रात में सोने तक... आम आदमी दिनभर में कितने टैक्स देता है, कैसे काटी जाती है जेब?

सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक आम आदमी जाने-अनजाने में 20 से 25 तरह के इनडायरेक्ट टैक्स चुकाता है. आइए उस सभी टैक्स के बारे में आपको विस्तार से समझाते हैं.

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  • आयकर के बाद वस्तुओं पर अप्रत्यक्ष करों की मार.

एक आम भारतीय नागरिक सुबह उठने से लेकर रात को बिस्तर पर जाने तक अनजाने में टैक्स के भारी जाल में फंसा रहता है. दिनभर की हर छोटी-बड़ी गतिविधि में सरकार का हिस्सा तय होता है, जिसके चलते आम आदमी को हर कदम पर अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है. देश का शायद ही कोई ऐसा कोना या सेवा बची हो, जहां सीधे या परोक्ष रूप से कर की वसूली न की जा रही हो. सुबह के टूथपेस्ट से लेकर रात को कमरे में जलने वाले बिजली के बल्ब तक, हर उपभोग की वस्तु के पीछे टैक्स का एक लंबा चौड़ा गणित छिपा होता है, जो हर महीने घर का बजट बिगाड़ देता है. आइए जानते हैं कि दिनभर एक आम इंसान कितना टैक्स भरता है.

सुबह की शुरुआत 

दिन की शुरुआत में रसोई के कुछ बुनियादी सामानों पर सरकार ने राहत दे रखी है. सुबह के समय इस्तेमाल होने वाली ताजी सब्जियां, खुला दूध, बिना पैकेट वाला दही, खुला आटा और दालें जैसी आवश्यक वस्तुएं 0% टैक्स के दायरे में आती हैं. इन बेहद जरूरी खाद्य सामग्रियों पर कोई जीएसटी नहीं वसूला जाता है, ताकि समाज के हर वर्ग को बुनियादी पोषण आसानी से मिल सके. हालांकि, यह राहत केवल तब तक ही सीमित रहती है जब तक ये चीजें बिना ब्रांड या बिना पैकेट के सीधे बाजार से खरीदी जाती हैं.

चाय और नाश्ते पर टैक्स का तड़का

जैसे ही सुबह की शुरुआत पैकेटबंद उत्पादों और चाय-कॉफी से होती है, टैक्स का मीटर तुरंत चालू हो जाता है. सुबह की चाय, कॉफी, चीनी और मसालों के साथ-साथ सभी पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर सरकार सीधे 5% का टैक्स वसूलती है. इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी सुबह की ताजगी के पीछे भी टैक्स का योगदान शामिल होता है. रोजमर्रा के जीवन में इन चीजों का इस्तेमाल इतना अनिवार्य है कि आम आदमी बिना सोचे हर महीने इस टैक्स का भुगतान चुपचाप करता रहता है.

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प्रोसेस्ड फूड का महंगा स्वाद

नाश्ते की टेबल पर अगर थोड़ा बदलाव किया जाए, तो टैक्स का बोझ और ज्यादा बढ़ जाता है. अगर आप सुबह के समय फ्रूट जूस, प्रोसेस्ड फूड या बाजार से पैकेट वाला मक्खन इस्तेमाल करते हैं, तो इन सभी चीजों पर सीधे 12% की दर से टैक्स वसूला जाता है. डिब्बाबंद और रेडी-टू-ईट उत्पादों के बढ़ते चलन के कारण मिडिल क्लास के बजट पर यह टैक्स बहुत गहरा असर डालता है. इस तरह, थोड़ा सा आधुनिक जीवनशैली अपनाते ही टैक्स की दर दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है.

पर्सनल केयर और ग्रूमिंग की कीमत

सुबह तैयार होते समय वाशरूम में इस्तेमाल होने वाली पर्सनल केयर की चीजों पर भी टैक्स का बड़ा पहरा रहता है. रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले शैम्पू, टूथपेस्ट और साबुन जैसी जरूरी चीजों पर सरकार 5% का टैक्स वसूलती है. हालांकि, जैसे ही आप हैंड वॉश, माउथवॉश या परफ्यूम जैसी थोड़ी बेहतर श्रेणी की चीजों का रुख करते हैं, टैक्स का स्लैब सीधे छलांग लगाकर 18% पर पहुंच जाता है. इसका मतलब है कि खुद को साफ और स्वच्छ रखने के लिए भी भारी टैक्स देना पड़ता है.

घरेलू उपकरण और कपड़ों का खर्च

घर के अन्य जरूरी सामानों और कपड़ों की खरीदारी पर भी टैक्स का भारी बोझ जनता को उठाना पड़ता है. बाजार से खरीदे जाने वाले रेडीमेड कपड़ों से लेकर घर को आरामदायक बनाने वाले टीवी, फ्रिज और वाशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सरकार पूरे 18% की दर से जीएसटी वसूलती है. ये ऐसी चीजें हैं जिनके बिना आधुनिक जीवन की कल्पना करना मुश्किल है, इसलिए आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन घरेलू सामानों के टैक्स के रूप में चुकाने पर मजबूर होता है.

सफर और ईंधन की भारी मार

घर से बाहर पैर रखते ही परिवहन और ईंधन पर लगने वाला टैक्स आम आदमी की कमर तोड़कर रख देता है. अगर आप ऑफिस जाने के लिए कोई कैब बुक करते हैं, तो उस पर 18% का टैक्स लगता है. सबसे बड़ी चपत पेट्रोल और डीजल पर लगती है, जहां राज्य और केंद्र सरकार मिलकर करीब 50% से 60% तक भारी वैट (VAT) और उत्पाद शुल्क वसूलती हैं. इसके अलावा, अपनी गाड़ी से सड़क पर सफर करने के दौरान जगह-जगह लगने वाला टोल टैक्स जेब को और ज्यादा खाली कर देता है.

मनोरंजन और बाहर खाने का खर्च

वीकेंड या शाम के समय थोड़ा मनोरंजन करना और बाहर खाना खाना भी टैक्स के दायरे से अछूता नहीं है. किसी रेस्टोरेंट में बैठकर खाना खाने, मोबाइल रिचार्ज कराने यानी टेलीकॉम बिल चुकाने और बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने पर पूरे 18% का टैक्स वसूला जाता है. यहां तक कि सेहत बनाने के लिए जिम और फिटनेस सेंटर जाने पर भी 5% का टैक्स लगता है. इसका मतलब यह हुआ कि सेहत सुधारने से लेकर मनोरंजन करने तक, हर जगह सरकार का टैक्स पहले से ही मुस्तैद रहता है.

लग्जरी और बुरी आदतों पर कड़ा प्रहार

तनाव कम करने के लिए कोल्ड ड्रिंक पीना या तंबाकू जैसी चीजों का सेवन करना सबसे महंगा सौदा साबित होता है. सरकार ने महंगी कारों, तंबाकू उत्पादों और कोल्ड ड्रिंक्स जैसी चीजों को लग्जरी और हानिकारक श्रेणी में रखते हुए इन पर सबसे ज्यादा 40% तक का टैक्स लगा रखा है. इस श्रेणी में आने वाली हर चीज पर सबसे ऊंची दर से टैक्स वसूला जाता है, ताकि इनके उपभोग को कम किया जा सके, लेकिन इसका सीधा असर शौकिया तौर पर इस्तेमाल करने वालों की जेब पर बहुत भारी पड़ता है.

दोहरी मार से बेहाल आम जनता

भारत में एक आम नागरिक को अपनी पूरी कमाई पर हर तरफ से टैक्स की दोहरी मार झेलनी पड़ती है. पहले तो नौकरीपेशा और व्यापारी वर्ग अपनी मेहनत की कमाई पर सरकार को सीधे डायरेक्ट टैक्स यानी इनकम टैक्स देते हैं. इसके बाद, जो पैसा उनके पास बचता है, उसे बाजार में खर्च करते समय वे 20 से 25 तरह के इनडायरेक्ट टैक्स (GST) के रूप में दोबारा चुकाते हैं. इस तरह, कमाने से लेकर खर्च करने तक, आम आदमी की जेब लगातार कटती रहती है और उसका बजट बिगड़ता जाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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