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Viral Engineer Story: Adobe से छूटी नौकरी तो अब स्कूल बस चला रहा ये इंजीनियर, नहीं मानी हार

25 साल तक टेक इंडस्ट्री में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने नई नौकरी न मिलने पर स्कूल बस ड्राइवर बनने का फैसला किया. Adobe के पूर्व कर्मचारी जेम्स स्ट्रॉन की यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल है.

एक समय था जब जेम्स स्ट्रॉन अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते थे. कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर कोड लिखना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था. लेकिन जब नौकरी चली गई, तो उन्होंने एक साल से भी ज्यादा समय तक नई नौकरी तलाशने की कोशिश की. हजारों आवेदन भेजे, इंटरव्यू दिए और कंपनियों के जवाब का इंतजार किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. आखिरकार उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया.

एक साल तक ढूंढी नौकरी, लेकिन नहीं मिला मौका

अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स में रहने वाले जेम्स स्ट्रॉन ने लिंक्डइन पर अपनी कहानी शेयर की. उन्होंने बताया कि टेक इंडस्ट्री में नई नौकरी खोजने का सफर बेहद मुश्किल रहा. उनके मुताबिक, कई बार उन्हें नजरअंदाज किया गया, कई जगहों पर जवाब तक नहीं मिला और कुछ इंटरव्यू तो ऐसे रहे जहां सामने वाले पहुंचे ही नहीं.

Adobe से स्कूल बस तक का सफर

जेम्स ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा टेक सेक्टर में बिताया. वह Adobe में करीब 25 साल तक सीनियर सॉफ्टवेयर क्वालिटी इंजीनियर रहे, लेकिन नौकरी छूटने के बाद हालात बदल गए. लंबे इंतजार के बाद उन्होंने फैसला किया कि अब वह अपने स्थानीय स्कूल जिले में बस ड्राइवर के रूप में नई शुरुआत करेंगे.

कम सैलरी, लेकिन ज्यादा सुकून

जेम्स ने माना कि नई नौकरी की कमाई उनकी पुरानी टेक जॉब से काफी कम होगी. इसके बावजूद वह इस बदलाव को लेकर उत्साहित हैं. उनका कहना है कि उन्हें नए काम में खुशी दिखाई दे रही है और वहां काम करने वाले लोग बेहद अच्छे और जमीन से जुड़े हुए हैं.

'कंप्यूटर नहीं, अब 40 फीट की बस चलाऊंगा'

अपने पोस्ट में जेम्स ने लिखा कि अब वह कंप्यूटर के बजाय 40 फीट लंबी स्कूल बस चलाने जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि शायद यही उनका आखिरी करियर हो. उन्होंने उन लोगों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया.

टेक इंडस्ट्री पर निकाला दर्द

जेम्स ने टेक कंपनियों और भर्ती करने वाले लोगों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई कंपनियां बिना ठीक से देखे ही उम्मीदवारों को रिजेक्ट कर देती हैं. उनका मानना है कि इंडस्ट्री को लोगों के साथ बेहतर व्यवहार करना सीखना होगा.

लोग बोले- काम छोटा या बड़ा नहीं होता

जेम्स की कहानी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनका समर्थन किया. कई यूजर्स ने कहा कि स्कूल बस ड्राइवर का काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी बड़ी टेक कंपनी में काम करना. एक यूजर ने लिखा कि शायद अब जेम्स बच्चों की जिंदगी पर ऐसा असर डाल पाएंगे जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी.

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दूसरों ने भी सुनाई अपनी कहानी

कमेंट सेक्शन में कई लोगों ने बताया कि वे भी नौकरी की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं. एक व्यक्ति ने लिखा कि वह 13 किताबें प्रकाशित कर चुका है, लेकिन फिर भी नौकरी नहीं मिल रही. मजबूरी में वह Amazon Flex के लिए डिलीवरी का काम कर रहा है. उसने दावा किया कि पिछले तीन साल में उसने हजारों आवेदन और सैकड़ों इंटरव्यू दिए, लेकिन अब तक स्थायी नौकरी नहीं मिली.

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शेख इंजमाम उल हक

हजरत शेख इंजमाम को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. भारत की शाही संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के गवाह राजस्थान से उनका संबंध है. भारत की शिक्षा नगरी के तौर पर मशहूर कोटा उनकी कर्मभूमि है, जहां हर साल हजारों युवक बड़े-बड़े सपने लेकर, आईआईटी–जेईई और नीट की तैयारी के लिए इस शहर को अपना बसेरा बनाते हैं, लेकिन इंजमाम को इस शहर का ये माहौल रास नहीं आया और उन्होंने डॉक्टर, इंजीनियर बनने के बजाए पत्रकार बनने का फैसला किया. हालांकि, कोटा से 72 किमी दूर एक छोटे से गांव सीसवाली में जन्म लेने वाले इंजमाम ने इंटरमीडियट तक की पढ़ाई इसी शहर से की.

बचपन से हिंदी में रुचि और लगाव उन्हें पत्रकारिता के लिए दिल्ली खींच लाया. जहां उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में MA और एम.फिल. की डिग्री भी हासिल की.

इंडिया न्यूज़ और विकिपीडिया के लिए कार्य करने के बाद इंजमाम एबीपी लाइव से बतौर ट्रेनी जुड़े और अब प्रमोट होकर बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शेख इंजमाम का हिंदी और उर्दू से खासा लगाव है और दोनों भाषाओं में शौकिया शायरी भी करते हैं. उन्होंने कई कविताएं रची हैं और अनेक साहित्यिक लेखों का सृजन किया है. साहित्य की एक अन्य विधा व्यंग्य भी उनका पसंदीदा विषय है.

ट्रेंडिंग और राजनीति उनकी पसंदीदा बीट है. राजनीतिक खबरों पर पैनी नजर की वजह से वो रोजाना के ट्रेंड और सोशल मीडिया पर पनपने वाले विचारों की बखूबी समझ रखते हैं.

शेख इंजमाम को घूमना पसंद है और उन्होंने भारत के कई शहरों और देहात का सफर किया है और वहां के रीति रिवाज, रहन सहन और सामाजिक ताने बाने को खूब समझते हैं.

इंजमाम को फिल्में देखने और गाने सुनने का भी शौक है. अमरीश पुरी और सलमान खान को वह अपने पसंदीदा अभिनेताओं में शुमार करते हैं. सूफी और क्लासिकल म्यूजिक भी उन्हें रुहानी सुकून देता है. उन्हें फिल्मी अभिनेताओं, कलाकारों और नेताओं के इंटरव्यू देखने का भी शौक है.

भाषा पर मजबूत पकड़ और लेखन की विभिन्न शैली में गहरी समझ रखने की वजह से वो खूबसूरत अंदाज़ में बड़ी आसानी से खबरों को पेश करने में सफल रहते हैं.

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