दिल्ली में सड़क हादसों ने तोड़ा 6 साल का रिकॉर्ड, रोजाना हो रही इतनी मौतें
दिल्ली की सड़कों पर हर दिन दम तोड़ रहे 5 लोग, पिछले 6 साल में सबसे जानलेवा रहा 2026; जानें आखिर क्यों दोपहिया सवार और पैदल चलने वाले बन रहे हादसों का सबसे आसान शिकार.

देश की राजधानी दिल्ली की सड़कें पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 के शुरुआती 9 महीनों में दिल्ली की सड़कों पर हादसों एक बेहद डरावना रूप देखने को मिला है. इस साल जनवरी से सितंबर के बीच दिल्ली में सड़क हादसों की वजह से हर दिन औ,तन 5 लोगों ने अपनी जान गंवाई है. यह आंकड़ा पिछले 6 साल में सबसे अधिक चिंताजनक है. आंकड़ों से साफ है कि राजधानी में तेज रफ्तार और खराब ट्रैफिक मैनेजमेंट की वजह से लगातार मासूम लोगों की जान जा रही है.
6 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हादसे और मौतें
दिल्ली में सड़क हादसों की स्थिति साल दर साल गंभीर होती जा रही है. साल 2021 में दिल्ली में हर दिन औसतन तीन मौतें होती थीं, जो साल 2022 से 2025 के बीच बढ़कर हर दिन 4 मौतों पर पहुंच गई थीं. लेकिन साल 2026 के पहले 9 महीनों में यह औसत बढ़कर हर दिन 5 मौतों पर पहुंच चुका है.
इसी तरह घायलों की संख्या भी साल 2021 के मुकाबले काफी बढ़ गई है. साल 2021 में हादसों में घायल होने वालों का दैनिक औसत 12 था, जो अब बढ़कर हर दिन 17 घायल व्यक्तियों पर पहुंच गया है, जो बहुत बड़ी चिंता का विषय है.
पैदल चलने वाले और दोपहिया चालक सबसे बड़े शिकार
सरकारी आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि दिल्ली की सड़कों पर मरने वाले कुल लोगों में से 81 प्रतिशत हिस्सेदारी पैदल चलने वालों और बाइक या स्कूटर सवारों की है. इस साल सितंबर महीने तक दिल्ली में सड़क हादसों के कारण कुल 1309 लोगों की मौत हो चुकी है. इन मौतों में से अकेले पैदल चलने वाले लोगों की संख्या लगभग 492 है. इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली में हर 5 में से दो मौतें उन मासूम लोगों की हो रही हैं, जो सिर्फ सड़क पार कर रहे थे या फुटपाथ पर चल रहे थे.
इन गाड़ियों की वजह से सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं
सड़क हादसों में शामिल गाड़ियों की पहचान परने पर पता चला है कि दुर्घटनाओं में कारों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत रही है. इसके बाद भारी ट्रकों के कारण 13 प्रतिशत हादसे हुए हैं, जबकि बसों की वजह से 6 प्रतिशत और ई-रिक्शा के कारण करीब 2.5 प्रतिशत दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं.
हालांकि, ई-रिक्शा से होने वाले हादसों की संख्या साल 2021 में सिर्फ 55 थी, जो साल 2025 में बढ़कर 163 तक पहुंच गई थी, और इस साल सितंबर तक 119 हादसे दर्ज हो चुके हैं. बसों से जुड़े हादसों की संख्या भी इस साल अब तक 79 पर पहुंच गई है.
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ट्रैफिक नियमों का सख्त पालन और सुरक्षित सड़क डिजाइन जरूरी
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ये ताजा आंकड़े राजधानी की सड़कों को ज्यादा सुरक्षित बनाने की बहुत बड़ी जरूरत को रेखांकित करते हैं. प्रशासन का मानना है कि खासकर पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए बड़े कदम उठाने होंगे.
इसके लिए ट्रैफिक नियमों को बेहद सख्ती से लागू करना, सड़कों की डिजाइन में सुधार करना, वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण रखना और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था करना बेहद जरूरी है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जब तक सड़कों की बनावट और लोगों की सोच में सुधार नहीं होगा, तब तक इन हादसों को पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं है.
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