नेपाल एयरपोर्ट पर क्यों होते हैं भारतीय सुरक्षाकर्मी, कब लागू हुई यह व्यवस्था?
वर्ष 1999 के IC-814 कंधार विमान अपहरण के बाद से काठमांडू एयरपोर्ट पर भारतीय सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जो भारतीय एयरलाइंस के यात्रियों की दोहरी सुरक्षा जांच करके उड़ानों को सुरक्षित बनाते हैं.

नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जब भी भारत जाने वाली किसी एयरलाइंस का विमान उड़ान भरने वाला होता है, तो यात्रियों की सुरक्षा जांच की एक विशेष और अतिरिक्त प्रक्रिया पूरी की जाती है. यह चेकिंग नेपाल की पुलिस के साथ-साथ वहां मौजूद भारतीय सुरक्षाकर्मी अपनी अलग स्क्रीनिंग प्वाइंट पर करते हैं. वैश्विक स्तर पर नेपाल एकमात्र ऐसा देश है जहां किसी दूसरे देश के अधिकारियों को अपने एयरपोर्ट पर सुरक्षा चेकिंग की विशेष अनुमति मिली हुई है. पिछले 26 वर्षों से लगातार जारी यह अनोखी व्यवस्था भारतीय विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है.
त्रिभुवन एयरपोर्ट पर भारतीय सुरक्षाकर्मियों की तैनाती
काठमांडू के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय विमानन सेवाओं के यात्रियों की चेकिंग के लिए एक समर्पित स्क्रीनिंग प्वाइंट बनाया गया है. इस केंद्र पर हर समय 12 से 15 सुरक्षा कर्मचारियों की एक विशेष टीम तैनात रहती है. इस दल में मुख्य जांच और यात्रियों की शारीरिक तलाशी का काम 6 से 8 भारतीय सुरक्षाकर्मी खुद संभालते हैं. वे यात्रियों के हैंड बैग और सामान की गहराई से दोबारा जांच करते हैं ताकि कोई भी संदिग्ध वस्तु विमान के अंदर न पहुंच सके.
कंधार विमान अपहरण कांड का इतिहास
इस असाधारण व्यवस्था की नींव 24 दिसंबर 1999 को घटी उस भयानक घटना के बाद पड़ी थी, जिसने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया था. उस दिन इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 ने 190 यात्रियों को लेकर काठमांडू से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. हवा में ही 5 हथियाबंद आतंकवादियों ने इस विमान को हाईजैक कर लिया और अमृतसर, लाहौर व दुबई के रास्ते अफगानिस्तान के कंधार ले गए. एक हफ्ते तक चले इस तनावपूर्ण संकट के बाद भारत सरकार को जेल में बंद मसूद अजहर समेत तीन दुर्दांत आतंकियों को रिहा करना पड़ा था.
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5 महीने तक उड़ानों पर रोक और द्विपक्षीय समझौता
कंधार कांड में नेपाल एयरपोर्ट की सुरक्षा में हुई भारी चूक सामने आने के बाद भारत सरकार ने कड़ा कदम उठाया और इंडियन एयरलाइंस की काठमांडू के लिए चलने वाली सभी उड़ानें तुरंत निलंबित कर दीं. लगातार 5 महीनों तक दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क पूरी तरह ठप्प रहा, जिससे आम यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा. स्थिति को सामान्य करने के लिए 7 मई 2000 को नेपाल के तत्कालीन विदेश मंत्री चक्र प्रसाद बस्तोला भारत पहुंचे. दोनों देशों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद 1 जून 2000 से उड़ानें दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी, लेकिन इसके लिए भारतीय सुरक्षाकर्मियों द्वारा यात्रियों की दोहरी जांच की शर्त को अनिवार्य रूप से लागू किया गया.
एयर इंडिया और इंडिगो के यात्रियों की विशेष दोहरी जांच
वर्तमान में काठमांडू का त्रिभुवन एयरपोर्ट दुनिया की 30 से भी अधिक अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस की उड़ानों का संचालन करता है. हालांकि, भारत के अलावा किसी भी अन्य विदेशी देश या एयरलाइंस के यात्रियों के लिए इस तरह की विशेष दोहरी सुरक्षा जांच का कोई नियम लागू नहीं है. भारत की केवल दो प्रमुख एयरलाइंस- एयर इंडिया और इंडिगो के यात्रियों को ही काठमांडू से बोर्डिंग पास मिलने के बाद इस द्वितीय स्तर की भारतीय सुरक्षा चेकिंग से गुजरना पड़ता है.
नेपाल एयरपोर्ट के सुरक्षा तंत्र का विस्तार और ढांचागत बदलाव
बीते 26 वर्षों में काठमांडू एयरपोर्ट के सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी बड़ा सुधार किया गया है. जहां वर्ष 2000 में पूरे हवाई अड्डे पर केवल 100 पुलिसकर्मी तैनात थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 500 से अधिक हो चुकी है. तकनीकी रूप से भी अब एयरपोर्ट पर 30 एक्स-रे मशीनें, 20 वॉक-थ्रू मेटल डिटेक्टर, 80 हैंडहेल्ड डिटेक्टर और नजर रखने के लिए 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे सक्रिय हैं. इसके बावजूद भारतीय एयरलाइंस के लिए अतिरिक्त जांच का नियम लगातार जारी रखा गया है.

नेपाल सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी
हाल ही में नेपाल के पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अनिल कुमार सिन्हा की देखरेख में तैयार की गई एक उच्च स्तरीय रिपोर्ट ने त्रिभुवन एयरपोर्ट की सुरक्षा पर फिर से सवाल खड़े किए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, एयरपोर्ट पर सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली विभिन्न नेपाल एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की भारी कमी है. आधुनिक तकनीकों के बावजूद आज भी वहां पारंपरिक और मैन्युअल तरीके से तलाशी ली जाती है. इसी प्रशासनिक ढिलाई और सुरक्षा में संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी को आज भी बेहद आवश्यक माना जाता है.
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