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किसान भाई ऐसे कर सकते हैं बादाम की खेती, हर 7 महीने में होगी तगड़ी कमाई

Almonds Cultivation Tips: बादाम की खेती से अब कम मेहनत में बंपर मुनाफा कमा सकते हैं. अगर किसान भाई अब ट्रेडिशनल फार्मिंग से हटकर कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो यह तरीका किस्मत बदल सकता है.

Almonds Cultivation Tips: आजकल के दौर में जब हर कोई हेल्थ कॉन्शियस हो रहा है. तब बादाम जैसी सुपरफूड की डिमांड मार्केट में आसमान छू रही है. बादाम की खेती अब सिर्फ ठंडे इलाकों में ही नहीं होती है. बल्कि नई वैरायटीज और मॉडर्न एग्रीकल्चर टेक की वजह से इसे अलग-अलग क्लाइमेट में भी उगाया जा रहा है. अगर आप भी अपनी ट्रेडिशनल खेती से हटकर कुछ नया ट्राई करने की सोच रहे हैं. तो बादाम एक शानदार ऑप्शन है. 

इसकी खास बात यह है कि एक बार पौधा सेट हो जाए तो यह आपको सालों साल तगड़ी इनकम देता रहता है. सही प्लानिंग के साथ आप अपने खेत को एक मुनाफे वाली मशीन में बदल सकते हैं. चलिए जानते हैं कि कैसे आप बादाम की स्मार्ट फार्मिंग शुरू कर सकते हैं और 7 महीने में ही इससे मोटा पैसा कमा सकते हैं.

ऐसे शुरू करें बादाम की खेती

बादाम की खेती की सफलता पूरी तरह से इस बात पर टिकी है कि आपने अपने इलाके के हिसाब से कौन सी वैरायटी चुनी है. आजकल ऐसी कई मॉडर्न किस्में आ गई हैं जो कम ठंड वाली जगहों पर भी अच्छा परफॉर्म करती हैं. मिट्टी की जांच कराना बहुत जरूरी है. क्योंकि बादाम के पौधों को अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा पसंद आती है.

  • ग्राफ्टेड पौधों का ही चुनाव करें क्योंकि इनमें बीमारियां कम लगती हैं और ये जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं.
  • पौधों के बीच सही गैपिंग रखें जिससे कि हर पेड़ को प्रॉपर धूप और हवा मिल सके जिससे ग्रोथ फास्ट हो.

अच्ची वैरायटी और बेहतर लेआउट ही आपके बाग की लंबी उम्र और क्वालिटी की गारंटी है.

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बादाम की खेती के लिए जरूरी बातें

बादाम के पौधों को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है. लेकिन उनकी जड़ों में पानी जमा नहीं होना चाहिए वरना फंगस का खतरा बढ़ जाता है. इसके लिए ड्रिप इरिगेशन सबसे बेस्ट और मॉडर्न तरीका है. जो पानी की बचत भी करता है और सीधा जड़ों तक नमी पहुंचाता है. समय-समय पर मिट्टी में ऑर्गेनिक खाद और जरूरी माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स डालने से फलों का साइज और मिठास दोनों बढ़ते हैं.

  • गर्मियों के पीक सीजन में मल्चिंग का इस्तेमाल करें ताकि जमीन की नमी धूप की वजह से जल्दी न उड़े.
  • हर सीजन में सॉइल टेस्टिंग के आधार पर ही खाद की डोज तय करें जिससे कि पेड़ों को ओवर-फर्टिलाइजिंग से बचाया जा सके.

पानी और पोषण का सही बैलेंस ही आपके बादाम को मार्केट में प्रीमियम रेट दिलाएगा.

हर 7 महीने बाद होगी कमाई

बादाम के पेड़ों पर आमतौर पर जनवरी-फरवरी के आसपास फूल आने शुरू होते हैं और अगस्त-सितंबर तक फसल पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है. यानी किसान को अपनी मेहनत का फल लगभग 7 महीने के इस सीजनल पीरियड में मिल जाता है. अगर मुनाफे के आंकड़ों पर नजर डालें. तो एक स्वस्थ और मैच्योर पेड़ से सालाना 15 से 25 किलो तक बादाम मिल सकते हैं. मार्केट में बादाम के दाम हमेशा हाई रहते हैं. जिससे किसानों को अपनी लागत के मुकाबले बेहतरीन रिटर्न मिलता है.

  • सीजन की शुरुआत में पेड़ों की प्रॉपर प्रूनिंग और खाद मैनेजमेंट पर ध्यान दें ताकि फल की क्वालिटी ए-ग्रेड की हो.
  • लोकल मार्केट के बजाय सीधे होलसेलर्स या ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट्स से जुड़ें जिससे आपको बीच के कमीशन का घाटा न हो.

सही समय पर हार्वेस्टिंग और स्मार्ट मार्केटिंग के जरिए आप हर सीजन में अपनी जेब भर सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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