Utility Latest News: होम लोन की EMI से परेशान, क्या बैलेंस ट्रांसफर से मिलेगा फायदा? फैसला लेने से पहले पढ़ें ये 5 बातें
Home Loan Balance Transfer: क्या आप भी होम लोन की EMI से परेशान हैं, तो यह खबर आपके लिए है. होम लोन बैलेंस ट्रांसफर से जुड़े इन पांच बातों का खास ध्यान रखें, नहीं तो भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

Home Loan EMI: आपमें से कई लोगों ने EMI पर न जानें कितनी सारी चीजें ले रखी होंगी. लेकिन, उनमें से एक आपका अपना घर भी हो सकता है. अगर आपको होम लोन की ऊंची EMI ने परेशान कर रखा है तो यह खबर आपके लिए है. होम लोन की EMI से निजात पाने के लिए बैलेंस ट्रांसफर यानी (Home Loan Balance Transfer) आपके लिए बेहद ही अच्छा विकल्प हो सकता है. जहां, आप आसानी से कम ब्याज दर पर ही EMI के कम बोझ को उठा सकते हैं. लेकिन, इस बात का खास ध्यान रखें कि फैसला लेने से पहले ब्याज दर में न सिर्फ अंतर बल्कि कागजी कार्रवाई और नए बैंक की साख (Reputation) समेत कई अन्य नियमों पर जोर जरूर डालें.
आखिर क्या है होम लोन बैलेंस ट्रांसफर?
आपमें से बेहद ही कम लोगों को होम लोन बैलेंस ट्रांसफर के बारे में जानकारी होगी. दरअसल, होम लोन बैलेंस ट्रांसफर में आप अपने होम लोन को बैंक या फिर किसी तरह के दूसरे संस्थान में ट्रांसफर कर सकते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य केवल लोगों को कम ब्याज दर पर फायदा देने के साथ-साथ (EMI) के बोझ को पूरी तरह से कम करना है. लेकिन, फैसला लेने से पहले इन पांच महत्वपूर्ण बातों का खास ध्यान रखें.
टैक्स की टेंशन खत्म! 'Kar Saathi' देगा आपके हर सवाल का जवाब, ITR फाइलिंग हुई अब और भी आसान
1. ब्याज दर में अंतर को करें पहचान (Interest Rate Spread)
होम लोन ट्रांसफर तभी आपकी पूरी तरह से मदद करता है जब नए बैंक और पुराने बैंक की ब्याज दर में पूरी तरह से अंतर देखने को मिले. उदाहरण के लिए, अगर नया बैंक मौजूदा दर से कम 0.5 प्रतिशत से लेकर 1 प्रतिशत पर कम ब्याज दे रहा है तो आप इससे लंबी अवधि में बड़ी बचत कर सकते हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ किसी तरह का अंतर नहीं होने पर अन्य खर्चों की वजह से आपको यह महंगा भी पड़ सकता है.
2. प्रोसेसिंग फीस और अतिरिक्त लागत (Hidden Costs)
यह तो सभी जानते हैं कि ट्रांसफर की प्रक्रिया किसी भी तरह से मुफ्त नहीं होती है. जहां, नया बैंक आपके पैस प्रोसेसिंग फीस, लीगल फीस के अलावा मूल्यांकन शुल्क जिससे (Assessment Fee) भी कहा जाता है, ये तमाम चीजों को बैंक आपसे वसूल करता है. फैसला लेने से पहले आप इस बात का खास ध्यान रखें कि शुल्हों पर होने वाले खर्च और ब्याज में होने वाली बचत कम है भी या फिर नहीं.
3. लोन की बची हुई अवधि (Remaining Tenure)
लोन ट्रांसफर का सबसे ज्यादा फायदा शुरुआत के कुछ 5-8 सालों में देखने को मिलता है. जहां, आप ब्याज के भुगतान को ज्यादा करने में जुटे होते हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ अगर आपने लोन का 90 प्रतिशत हिस्सा चुका दिया है तो आपकी अवधि जल्द ही खत्म होने वाली है. इस दौरान आपको ट्रांसफर करने के लिए किसी भी तरह का कोई खास फायदा नहीं दिया जाता है.
4. नए बैंक की साख और क्या है पारदर्शिता? (Credibility)
जानकारी के मुताबिक, नए बैंक की सर्विस क्वालिटी और पारदर्शिता के नियमों के बारे में जानने की सबसे ज्यादा जरूरत है. जहां, कई ऐसे बैंक है जो कम ब्याज का विज्ञापन तो देते हैं लेकिन नियमों के साथ-साथ शर्तों को पूरी तरह से सख्त बना देते हैं.
5. टॉप-अप लोन देता है सुविधा (Top-Up Loan Benefit)
इतना ही नहीं, आज के समय में कई बैंक बैलेंस ट्रांसफर के साथ ग्राहकों को टॉप-अप लोन की सुविधा देते हैं. जिसका अर्थ है कि आप अपने लोन के ऊपर अतिरिक्त राशि को हासिल भी कर सकते हैं. जहां, इस फंड का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा के अलावा अन्य जरूरतमदों को पूरा किया जा सकता है.
Source: IOCL


























