Excise Policy: शराब के शौकीनों और ब्रांड्स के लिए बड़ी खबर, नई शराब नीति लागू, इस सरकार ने पेश किया नया मॉडल
Karnataka Liquor Policy: अगर आप भी शराब के शौकीन हैं तो ये खबर आपके लिए है. कर्नाटक सरकार ने पूरे राज्य में नई आबकारी नीति को लागू कर दिया है. नए मॉडल के तहत टैक्स संरचना में बड़ा बदलाव किया गया है.

Karnataka Government: कर्नाटक सरकार की नई आबकारी नीति (Excise Policy) प्रदेशभर में लोगू हो गई है. भारत के सबसे बड़े शराब बाजारों में से एक होने के नाते कर्नाटक सरकार के इस बड़े कदम के बाद से पूरे देशभर के शराब उद्योग में बेहद ही बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है. जहां, इस नीति के तहत अब टैक्स शराब की कुल मात्रा पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद वास्तविक एल्कोहल की मात्रा के आधार पर तय किया जाएगा.
टैक्स संरचना में किया गया बड़ा बदलाव
पुरानी व्यवस्था के बारे में बात की जाए तो एक्साइज ड्यूटी 'बल्क लीटर' (Bulk Litre) पर ही पहले आधारित थी, यानी बोतल में भरे कुल तरल पदार्थ की मात्रा पर टैक्स लगाया जाता है. तो वहीं, अब पुरानी नीति को बदलकर 'एल्कोहल कंटेंट मॉडल' कर दिया गया है. जिसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि अब सरकार केवल उस शुद्ध एल्कोहल पर टैक्स लेगी जो उस बोतल के अंदर है.
सरकार द्वारा किए गए इस बड़े बदलाव से बाजार को अब दो हिस्सों में बांटने की कोशिश की जा रही है. जहां, एक तरफ प्रीमियम ब्रांड्स के दामों को घटाया जा रहा है, तो वहीं सस्ते ब्रांड्स तेजी से महंगे हो रहे हैं.
सस्ती शराब और प्रीमियम ब्रांड्स पर पड़ा असर
इतना ही नहीं, रोजमर्रा के शराब ब्रांड्स में आमतौर पर एल्कोहल की सांद्रता (Concentration) 25 प्रतिशत से 40 प्रतिशत के बीच में ही होती है. लेकिन, पुरानी व्यवस्था में इन पर टैक्स का बोझ सबसे ज्यादा कम था, लेकिन अब वास्तविक एल्कोहल यूनिट्स पर टैक्स लगने से इन कंपनियों की लागत में बढ़ोतरी की जा रही है. नोमुरा (Nomura) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस श्रेणी की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिल सकता है.
तो वहीं, अब दूसरी तरफ प्रीमियम ब्रांड्स (जैसे स्कॉच या महंगी व्हिस्की) के लिए यह नीति पूरी तरह से वरदान साबित होते हुए नज़र आ रही है. जहां, पहले इनकी कीमत के आदार पर सबसे ज्यादा टैक्स लगाया जाता था. अब टैक्स स्लैब को और भी ज्यादा सरल बनाने के लिए इनकी प्रभावी टैक्स को पूरी तरह से कम किया जा रहा है. हांलाकि, ऐसे भी अनुमान लानए जा रहे हैं कि प्रीमियम सेगमेंट की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत की कमी देखने को मिल सकती है.
कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार की क्या है स्थिति?
दरअसल, इस मामले को लेकर बाजार विश्लेषकों ने जानकारी देते हुए बताया कि इस नीति से United Spirits जैसी कंपनियों को सबसे बड़ा फायदा मिलने वाला है. जहां, उनके पोर्टफोलियो का 90 प्रतिशत हिस्सा प्रीमियम कैटेगरी का है. इसके साथ ही, Radico Khaitan जैसी कंपनियों की बिक्री में भी उछाल की उम्मीद जताई जा रही है. तो वहीं, विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि कीमतें कम होने से लोग अब सस्ते ब्रांड्स छोड़कर प्रीमियम ब्रांड्स की तरफ तेजी से आगे बढ़ेंगे, जिससे कंपनियों की जल्द ही वॉल्यूम ग्रोथ भी बढ़ेगी.






















