सिर्फ प्रॉपर्टी नहीं, अब ऑनलाइन अकाउंट्स की भी बनती है वसीयत, जानें कैसे
Digital Will: डिजिटल वसीयत का उद्देश्य आपकी ऑनलाइन संपत्तियों, डिजिटल खातों और उनकी पहुंच को सुरक्षित रूप से भरोसेमंद व्यक्ति तक पहुंचाना है. यह पारंपरिक वसीयत से पूरी तरह अलग व्यवस्था है.

Digital Will Planning: आज के समय में ज्यादातर लोगों की जिंदागी डिजिटल दुनिया का एक अहम हिस्सा बन चुका है. निवेश, ई-वॉलेट, ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट, बैंक खाते, क्लाउड स्टोरेज और कई जरूरी दस्तावेज अब ऑनलाइन के मध्याम से हमें आसानी मिलती है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर किसी के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो उसके डिजिटल संपत्तियों और ऑनलाइन खातों का हकदार कौन होगा.
हालांकि, कई लोग डिजिटल वसीयत और पारंपरिक वसीयत का ऑनलाइन माध्यम समझ लेते है, जबकि ऐसा सही नहीं है. पारंपरिक वसीयत में जमीन-जायदाद और दूसरी संपत्तियों का बंटवारा किया जाता है. वहीं, डिजिटल वसीयत का खास मकसद आपकी ऑनलाइन संपत्तियों, डिजिटल खातों और उनकी पहुंच (एक्सेस) को आपके किसी भरोसेमंद व्यक्ति तक महफूज पहुंचना.
पारंपरिक वसीयत और डिजिटल वसीयत में क्या है फर्क?
- पारंपरिक वसीयत जमीन, मकान, दुकान, सोना, नकदी जैसी भौतिक संपत्तियों के बंटवारे के लिए बनाई जाती है.
- यह एक कानूनी दस्तावेज होती है, जिसे लिखित रूप में तैयार किया जाता है.
- जरूरत पड़ने पर इसका रजिस्ट्रेशन भी कराया जा सकता है.
- डिजिटल वसीयत ईमेल, ऑनलाइन बैंक खाते, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टोकरेंसी, क्लाउड स्टोरेज और सोशल मीडिया अकाउंट जैसी डिजिटल संपत्तियों के इंतेजाम के लिए बनाई जाती है.
- इसे ऑनलाइन तैयार किया जा सकता है.
- इसके जरिए कोई व्यक्ति यह फैसला कर सकता है कि उसके मरने के बाद डिजिटल संपत्तियों का एक्सेस और अधिकार किसे मिलेगा.
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भारत में क्या है इसकी कानूनी स्थिति?
भारत में सिर्फ ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक रूप से बनाई गई डिजिटल वसीयत को पूरी तरह से कानूनी मान्यता नहीं मिली है. ऐसे में अगर आप डिजिटल वसीयत तैयार करते है, तो उसे कानूनी तौर पर वैध बनाने लिए आपको उसका प्रिंट निकालकर उस पर दो गवाहों की मौजूदगी का साइन करना पड़ेगा. इसके बाद ही अदालत इसे वैध वसीयत के रूप में स्वीकार करेगा.
कैसे बनाएं डिजिटल वसीयत?
- किसी भरोसेमंद ऑनलाइन विल मेकिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें.
- या फिर आप खुद कंप्यूटर पर लिखकर उसका प्रिंट निकाल लें.
- सुरक्षा के लिए पासवर्ड कभी भी सीधे तौर पर न लिखें.
- वसीयत में अपने सभी जरूरी डिजिटल अकाउंट्स और उनके यूजरनेम की जानकारी दें.
- डिजिटल वसीयत को अपनी कानूनी वसीयत के साथ जोड़ें और कानूनी सलाह लेकर तैयार करें.
- समय-समय पर नए अकाउंट या बदलाव के मुताबिक आप अपने डिजिटल वसीयत को अपडेट करते रहें.
- साथ ही यह भी बताएं कि आपके बाद नॉमिनी को पासवर्ड या एक्सेस की जानकारी कहां और कैसे मिलेगी.
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