50000 सैलरी फिर भी बैंक बैलेंस जीरो? आज ही समझें 'जीरो सेविंग सिंड्रोम' और इससे बचने का तरीका
Zero Saving Salary Syndrome: 'जीरो सेविंग सैलरी सिंड्रोम' एक ऐसा ट्रेंड है, जो बढ़ते खर्च, पैसे से जुड़ी बुरी आदतों और लाइफस्टाइल के दबाव की वजह से बढ़ रहा है.

Zero Saving Salary Syndrome: महीने में 50000 रुपये की सैलरी कोई कम नहीं है, लेकिन ज्यादातर लोग इतनी तनख्वाह मिलने के बावजूद महीने के आखिर तक आते-आते कुछ ही पैसा सेविंग्स कर पाते हैं. कई बार तो बचत बिल्कुल भी नहीं हो पाती. इस पैटर्न को 'जीरो सेविंग सैलरी सिंड्रोम' कहा जाता है. यह एक ऐसा ट्रेंड है, जो बढ़ते खर्च, पैसे से जुड़ी बुरी आदतों और लाइफस्टाइल के दबाव की वजह से बढ़ रहा है.
'जीरो सेविंग सैलरी सिंड्रोम' एक ऐसी स्थिति है, जिसमें इंसान ठीक-ठाक कमा लेने के बावजूद सेविंग्स नहीं कर पाता है. कई बार तो स्थिति इतनी बुरी हो जाती है कि महीने के आखिर तक पूरी सैरी खर्च हो जाने से व्यक्ति को दूसरों से कर्ज भी लेना पड़ जाता है. इसके पीछे कम इनकम वजह नहीं, बल्कि सही मैनेजमेंट न होना और खर्च करने की प्राथमिकताओं में गड़बड़ी होना है.
क्या है 'जीरो सेविंग सिंड्रोम'?
- लाइफस्टाइल- इनकम बढ़ने के साथ-साथ लोग अपनी लाइफस्टाइल पर खर्च और फिजूलखर्ची को बढ़ा रहे हैं.
- बजटिंग का असर- यह ट्रैक न कर पाना कि पैसा कहां खर्च हो रहा है.
- क्रेडिट कार्ड और EMI का जाल- 'बाय नाउ, पे लेटर' (BPNL) और बिना सोचे-समझे महंगी चीजें किश्तों पर खरीदना.
- इमरजेंसी फंड की कमी- आपातकाल की स्थिति में अचानक आए खर्चों के लिए कोई बचत न होना, जिससे बार-बार कर्ज लेना पड़ता है.
50-30-20 फॉर्मूले की लें मदद
50-30-20 बजटिंग का नियम पैसे मैनेज करने का एक आसान लेकिन असरदार तरीका है. यह तरीका आपकी इनकम को तीन कैटेगरी में बांटता है:-
- 50000 की सैलरी में 50 परसेंट या आधी सैलरी उन खर्चों के लिए है, जिनके बिना आपका काम नहीं चल सकता. इसमें मकान का किराया/EMI, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की स्कूल फीस, आवश्यक दवाएं और मिनिमम सैलरी. अगर इसमें आपका खर्च 25000 से ज्यादा चला जा रहा है, तो आपको अपनी जीवनशैली में कटौती करने की जरूरत है.
- 30 परसेंट सैलरी यानी कि 15000 जीवनशैली और शौक के लिए रखें. इनमें मनोरंजन, बाहर खाना-पीना, घूमना-फिरना और लाइफस्टाइल से जुड़ी चीजें शामिल हैं.अगर किसी महीने पैसे की तंगी हो, तो इसमें भी कटौती की जा सकती है.
- 20 परसेंट की सैलरी यानी कि 10000 रुपये बचत और निवेश के लिए रखी जाए. इसमें सख्ती लाकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि बचत आपकी पहली प्राथमिकता बने. इसके लिए सैलरी आते ही पहले 10000 रुपये को अलक करें या ऑटो-डेबिट सेट कर लें. बचे हुए 40000 को आप ऊपर बताए गए फार्मुले के हिसाब से मैनेज करें.
ये भी पढ़ें:
Source: IOCL
























