55 रुपए से 18000 तक... वेतन आयोग ने कैसे बदली कर्मचारियों की माली हालत, जानें साल दर साल कितना बढ़ी सैलरी
8th Pay Commission News: सातवें पे कमीशन की शुरुआत कैसे हुई और किस तरह पे कमीशन में समय समय पर बदलाव आया है? जानिए कब-कब कितनी सैलरी बढ़ी. पढ़ें ये पूरी रिपोर्ट.

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग यानी पे कमीशन को लेकर बैठकों का दौर जारी है. अभी केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वेतन मिलता है. ध्यान रहे कि एक वेतन आयोग का कार्यकाल 10 साल का माना जाता है. क्योंकि यह 2016 से लागू हुआ था, इसलिए तार्किक रूप से इसकी अवधि 2026 तक मानी जा रही है.
अब क्योंकि 7वें पे कमीशन का कार्यकाल लगभग खत्म हो गया है, ऐसे में सभी की नजर 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं. इसी बीच आपको बताते हैं कि पहले से सातवें पे कमीशन की शुरुआत कैसे हुई और किस तरह पे कमीशन में समय समय पर बदलाव आया है.
आजादी से अबतक बने 7 वेतन आयोग
आजादी के बाद से अब तक कुल सात वेतन आयोग बनाए जा चुके हैं. पहला वेतन आयोग मई 1946 में लागू हुआ था, जबकि सातवां वेतन आयोग 2014-15 में लागू किया गया. Upstox की रिपोर्ट के मुताबिक नीचे दी गई टेबल से इसे आसानी से समझिए.
| केंद्रीय वेतन आयोग | मिनिमम पे (रुपये के आधार पर) | मैक्सिमम पे (रुपये के आधार पर) | कम्प्रेशन रेशियो |
| पहला वेतन आयोग | 55 | 2000 | 36.4 |
| दूसरा वेतन आयोग | 80 | 3000 | 37.5 |
| तीसरा वेतन आयोग | 196 | 3500 | 17.9 |
| चौथा वेतन आयोग | 750 | 8000 | 10.7 |
| पांचवा वेतन आयोग | 2550 | 26000 | 10.2 |
| छठवां वेतन आयोग | 7000 | 80000 | 11.4 |
| सातवां वेतन आयोग | 18000 | 225000 | 12.5 |
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वेतन आयोग का शुरुआती ढांचा
पहले वेतन आयोग से लेकर सातवां वेतन आयोग तक सैलरी स्ट्रक्चर में कई सुधार किए गए, जिनका उद्देश्य कर्मचारियों की सैलरी, DA और सुविधाओं को बेहतर बनाना रहा है. शुरुआत में वेतन आयोगों की सैलरी का ढांचा काफी आसान था, इसमें बेसिक पे के साथ कुछ सीमित भत्ते शामिल होते थे. लेकिन जैसे-जैसे महंगाई की मार लोगों की जेब पर पड़ने लगी, वैसे- वैसे ही वेतन आयोग ने भी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन किया.
महंगाई भत्ते को मिला महत्व
तो वहीं तीसरे और चौथे वेतन आयोग के दौरान महंगाई भत्ता (DA) को ज्यादा महत्व दिया गया, जिससे कर्मचारीयों की आर्थिक स्थिति पर कोई प्रभाव ना पड़े. इसके बाद पांचवें वेतन आयोग ने सैलरी स्ट्रक्चर को थोड़ा व्यवस्थित किया और कई नए भत्तों को भी इसमें शामिल किया. इसके बाद छठा वेतन आयोग आया, जिसने बड़ा बदलाव करते हुए पे बैंड और ग्रेड पे को लागू किया. इससे सैलरी कैलकुलेशन ज्यादा पारदर्शी और व्यवस्थित हो गया.
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सातवां वेतन आयोग
बात करें सातवें वेतन आयोग की तो इसने सिस्टम को और आसान बनाते हुए पे मैट्रिक्स लागू किया. इसमें अलग-अलग लेवल तय किए गए, जिससे कर्मचारियों को प्रमोशन और वेतन वृद्धि समझने में आसानी हुई. इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर के जरिए बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी की गई. वहीं अब आठवें वेतन आयोग के लागू होने से कर्मचारियों को और भी ज्यादा लाभ मिलने वाला है.
Source: IOCL

























