यूपी बना डिजिटल हब: 1.34 लाख से ज्यादा स्मार्ट क्लासरूम के साथ देश में नंबर-1
UP News: उत्तर प्रदेश के स्कूलों में तेजी से बढ़ते स्मार्ट क्लासरूम ने शिक्षा का स्तर बदला है. 1.34 लाख स्मार्ट क्लासों, टैबलेट वितरण और डिजिटल कंटेंट के जरिए बच्चे आधुनिक तरीके से सीख रहे हैं.

UP News: उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली अब पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर आधुनिकता की ओर बढ़ रही है. राज्य के परिषदीय और माध्यमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम (Smart Classrooms) की स्थापना ने न केवल बच्चों के सीखने के तरीके को बदला है, बल्कि सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों के नजरिए को भी बदला है.
आंकड़ों में डिजिटल क्रांति (Facts & Figures)
उत्तर प्रदेश सरकार ने 'डिजिटल इंडिया' विजन को धरातल पर उतारते हुए रिकॉर्ड स्तर पर काम किया है. हालिया सरकारी रिपोर्टों और UDISE+ 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार:
देश में अग्रणी: उत्तर प्रदेश 1,34,533 स्मार्ट क्लासरूम के साथ देश में सबसे आगे है.
लक्ष्य की ओर कदम: वित्तीय साल 2025 के अंत तक प्रदेश के लगभग 74% परिषदीय स्कूलों को पूरी तरह स्मार्ट क्लास की सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है.
रिसोर्स वितरण: शिक्षकों को अब तक 2,09,863 टैबलेट वितरित किए जा चुके हैं, ताकि वे डिजिटल कंटेंट का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें.
बरेली की उपलब्धि: बरेली उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला जिला बना है, जहां के सभी 100% सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासेस संचालित की जा रही हैं.
कैसे बदल रही है पढ़ाई?
स्मार्ट क्लासरूम में केवल एक कंप्यूटर नहीं होता, बल्कि यह एक संपूर्ण इकोसिस्टम है. इसमें इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल (IFPs), आधुनिक ऑडियो-विजुअल सिस्टम और दीक्षा (DIKSHA) पोर्टल से जुड़ा डिजिटल कंटेंट शामिल है.
1. दृश्य-श्रव्य माध्यम: छात्र अब विज्ञान के कठिन प्रयोगों और इतिहास की कहानियों को 3D एनिमेशन के माध्यम से देख और समझ रहे हैं.
2. इंटरैक्टिव बोर्ड: ब्लैकबोर्ड की जगह टच-सेंसिटिव बोर्ड्स ने ले ली है, जिससे पढ़ाई अधिक मनोरंजक हो गई है.
3. वाई-फाई और कनेक्टिविटी: भारतनेट (BharatNet) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है.
ऑपरेशन कायाकल्प और मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय
सरकार 'मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय' योजना के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक स्कूल बना रही है, जहां प्री-प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा एक ही छत के नीचे डिजिटल माध्यम से दी जाएगी. इन स्कूलों में साइंस लैब, कंप्यूटर लैब और स्मार्ट लाइब्रेरी की सुविधा अनिवार्य की गई है.
स्मार्ट क्लासरूम केवल तकनीक का समावेश नहीं है, बल्कि यह उन बच्चों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो निजी स्कूलों की भारी फीस नहीं भर सकते. उत्तर प्रदेश अब एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहा है जहां शिक्षा का माध्यम केवल किताबें नहीं, बल्कि पूरी डिजिटल दुनिया है.
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