दांव पर टीम इंडिया का अटूट रिकॉर्ड, पहली बार भारत में वनडे सीरीज जीत पाएगी न्यूजीलैंड? कल इंदौर में तीसरा वनडे
IND vs NZ 3rd ODI: भारत और न्यूजीलैंड की तीन मैचों की वनडे सीरीज 1-1 की बराबरी पर है. अब तीसरा वनडे मैच रविवार, 18 जनवरी को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेला जाएगा.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज रोमांचक मोड़ पर आ गई है. टीम इंडिया ने वडोदरा में पहला वनडे जीता तो कीवी टीम ने राजकोट में बाजी मारी. अब दोनों टीमों के बीच तीसरा वनडे मैच रविवार, 18 जनवरी को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में खेला जाएगा. जो भी टीम इस मैच को जीतेगी सीरीज उसके नाम हो जाएगी. अब तक घर पर वनडे में शानदार रिकॉर्ड रखने वाली भारतीय टीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज जीतने के लिए रविवार को होने वाले तीसरे और अंतिम वनडे मैच में तीनों विभाग में अच्छा प्रदर्शन करना होगा. वहीं न्यूजीलैंड की टीम की नजरें भी सीरीज जीतकर इतिहास रचने पर होगी.
बता दें कि मार्च 2019 के बाद से टीम इंडिया ने अपने घरेलू मैदान पर कोई द्विपक्षीय वनडे सीरीज नहीं हारी है. तब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 0-2 से पिछड़ने के बाद भारतीय टीम ने दमदार वापसी करते हुए सीरीज 3-2 से जीती थी. हालांकि, अब भारत का यह रिकॉर्ड दांव पर लगा है. न्यूजीलैंड के लिए भी यह मैच काफी महत्वपूर्ण है. कीवी टीम ने 1989 से द्विपक्षीय वनडे मैचों के लिए भारत का दौरा किया है, लेकिन यहां कभी भी वनडे सीरीज नहीं जीती है.
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर नहीं चाहेंगे कि उनके नेतृत्व में घरेलू मैदान पर टीम को एक और सीरीज में हार का सामना करना पड़े. विशेषकर तब जबकि उन्होंने कई अनचाहे रिकॉर्ड बनाए हैं. गंभीर के कोच रहते हुए भारत ने घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट मैच हारे हैं और पहली बार श्रीलंका में वनडे सीरीज गंवाई.
राजकोट में खेले गए दूसरे वनडे में भारत की हार किसी एक असाधारण पारी के कारण नहीं बल्कि न्यूजीलैंड का बीच के ओवरों में शानदार नियंत्रण बनाए रखने के कारण हुई. डेरिल मिचेल का नाबाद शतक सुनियोजित आक्रामकता पर आधारित था. उन्होंने विशेषकर भारत के स्पिनरों को निशाना बनाया. यह एक ऐसा विभाग है, जिसमें भारत हाल के दिनों में संघर्ष करता नजर आ रहा है.
इंदौर के होल्कर स्टेडियम की छोटी बाउंड्री और गेंदबाजों को विकेट से बहुत कम मदद मिलने के कारण गलती की गुंजाइश और भी कम हो जाती है. स्पिन गेंदबाजी का सामना करने की भारत की क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं. टीम की बल्लेबाजी में गहराई और मजबूती होने के बावजूद उसके बल्लेबाज बीच के ओवरों में स्पिनरों के सामने असहज दिख रहे हैं. बल्लेबाज महत्वपूर्ण मौकों पर स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पा रहे हैं. अब बड़े स्कोर वाले मैदान पर बीच के ओवर निर्णायक साबित हो सकते हैं.
Source: IOCL


















