Magh Mela 2026: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? कुछ देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस द्वारा संगम में स्नान करने से कथित तौर पर रोकने और उनके कुछ समर्थकों की पिटाई की घटना में अब तक क्या-क्या हुआ?

उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अनशन अभी भी जारी है. इस मामले में सियासत भी शुरू हो गई है. सोमवार 19 जनवरी को दोपहर 12 बजे शंकराचार्य प्रेस वार्ता करेंगे.
इससे पहले सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया है कि प्रदेश सरकार के इशारे पर प्रशासन के उच्च अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य जी के साथ यह दुर्व्यहार सनातन धर्म का अपमान है , यदि भारत के सर्वोच्च धर्म गुरु के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार हो रहा है तो सामान्य जन मानस के साथ क्या कुछ नहीं हो सकता, जब कुछ संत सरकार की मदद से भोग विलास की सुविधाएं प्राप्त कर लेते है तो उनका ऐसे समय में उनका द्वारा चुप्पी साध लेना या फ़ोन बंद कर लेना स्वाभाविक है.
इन सबके बीच एक सीसीटीवी फुटेज में सामने आई है. इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का काफिला बैरिकेड तोड़ते हुआ दिखे हैं. CCTV वीडियो में देखा जा सकता हैं कि कैसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थक पुलिस को धक्का देकर बैरिकेडिंग तोड़ कर आगे बढ़ गए. जबकि वहां पर लाखो श्रद्धालु पहले से मौजूद थे. दावा है कि इसी वजह से पुलिस ने काफिले को रोका था.
शंकराचार्य मामले पर क्या बोली सपा?
उधर, समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रयागराज में माघ मेला में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस द्वारा संगम में स्नान करने से कथित तौर पर रोकने और उनके कुछ समर्थकों की पिटाई की घटना की निंदा करते हुए रविवार को पूरे मामले की जांच की मांग की.
यादव ने यहां एक बयान में कहा कि प्रयागराज में माघमेला क्षेत्र में पिछले साल की तरह ही इस साल फिर से साधु-संतों-भक्तों के साथ हुआ दुर्व्यवहार अक्षम्य है.
उन्होंने कहा, 'यह घोर निन्दनीय है. सदियों से चली आ रही शाही-स्नान की अखंड सनातनी परंपरा में गत वर्ष भी इसी सरकार द्वारा विघ्न डाला गया था.' यादव ने कहा कि प्रश्न ये है कि ऐसी घटनाएं भाजपा की सरकार में ही क्यों हो रही हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'मौनी अमावस्या का शाही-स्नान क्या पहली बार हो रहा है. इस अवस्था के लिए भाजपा का कुशासन और नाकाम व्यवस्था ही दोषी है.' उन्होंने वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर हो रहे सौंदर्यीकरण कार्य पर सवाल उठाने के लिए विपक्ष की आलोचना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा, 'अहंकारी भाजपा शासन और प्रशासन अपने से बड़ा किसी को नहीं मानता है. अब क्या इसका दोष भी ‘एआई’ पर मढ़ेंगे?'
आदित्यनाथ ने आरोप लगाया था कि विपक्ष मणिकर्णिका घाट पर हो रहे मरम्मत कार्य को गलत तरीके से पेश करने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) से बनाई गई तस्वीरों का इस्तेमाल कर रहा है.
सपा प्रमुख ने पूरे मामले की जांच की मांग की और कहा कि भाजपा सरकार लापरवाह और संवेदनहीन है. रविवार को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके समर्थकों को संगम में जाने से कथित तौर पर रोके जाने और विरोध करने पर कुछ समर्थकों की पिटाई किये जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया.
शंकराचार्य के मामले में क्या बोली पुलिस?
पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना किसी अनुमति के 200-250 समर्थकों के साथ पुल नंबर दो का अवरोधक तोड़कर स्नान घाट की तरफ प्रवेश किया.
पांडेय के मुताबिक, उन्हें बताया गया था कि श्रद्धालुओं की खासी भीड़ है, इसके बावजूद वह नहीं माने और रोकने पर वह स्नान किए बगैर वापस चले गए. वहीं, शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को प्रशासन ने जानबूझकर स्नान करने से रोका तथा यह घटना पूरी तरह से सुनियोजित थी.
योगीराज ने दावा किया, 'शंकराचार्य के समर्थक शांतिपूर्ण ढंग से संगम नोज की तरफ स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन षड़यंत्र के तहत प्रशासन के लोगों ने समर्थकों को धक्का दिया और संतों को बर्बरतापूर्वक पीटा.'
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Source: IOCL























