यूपी में बाढ़ से कितना नुकसान हुआ? अब लेखपाल की रिपोर्ट नहीं, सेटेलाइट तस्वीरें बताएंगी, जानें कैसे?
Lucknow News: लगातार बारिश और नदियों के उफान से करीब 2.75 करोड़ से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं. सेटेलाइट तस्वीरों से बाढ़ का दायरा और प्रभावित जमीन की स्थिति साफ होगी. किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा.

उत्तर प्रदेश में बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन में अब पारदर्शिता आएगी. इसरो (ISRO) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की मदद से सेटेलाइट के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे किया जाएगा. जिसमें पहला ट्रायल इसी मानसून सीजन में शुरू होगा, इसके अंतर्गत 25 जिलों की 116 तहसीलों का आकलन होगा. यह कदम राज्य सरकार की ओर से लिया गया है, ताकि पारंपरिक सर्वे में होने वाली मनमानी और गड़बड़ियों पर लगाम लगाई जा सके.
लगातार बारिश और नदियों के उफान से करीब 2.75 करोड़ से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं. सेटेलाइट तस्वीरों से बाढ़ का दायरा और प्रभावित जमीन की स्थिति साफ होगी, जिससे किसानों को सही मुआवजा और राहत मिल सकेगी.
पारंपरिक सर्वे की कमियां
बता दें कि पहले बाढ़ नुकसान का आकलन तहसील स्तर पर लेखपालों की रिपोर्ट पर आधारित था. इस प्रक्रिया में अक्सर अनियमितताओं और गलत आंकड़ों की शिकायतें सामने आती थीं, जिससे प्रभावितों को पूरा मुआवजा नहीं मिल पाता था. अब सेटेलाइट डेटा के जरिए सटीक जानकारी मिलने से यह समस्या दूर होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल समय बचाएगी, बल्कि राहत वितरण में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगी.
प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति
उत्तर प्रदेश के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार बारिश से गंगा, यमुना समेत कई नदियां उफान पर हैं. प्रयागराज में गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर से करीब 2,600 घर प्रभावित हुए हैं, जबकि 1,594 गलियां और मोहल्ले जलमग्न हैं. स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी है.
वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे कई घाट डूब गए हैं. जल पुलिस और प्रशासन ने अलर्ट जारी कर लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है. मथुरा में यमुना के बढ़ने से बाढ़ का पानी उतरने के बाद मकानों में दरारें और फर्श धंसने की शिकायतें आई हैं. कई घर रहने लायक नहीं बचे, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होने की सलाह दी है.
ISRO की भूमिका
ISRO के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें उपलब्ध कराएगा. यह डेटा राज्य आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपा जाएगा, जो नुकसान का सटीक आकलन करेगा. यह तकनीक न केवल वर्तमान संकट में मददगार होगी, बल्कि भविष्य में बाढ़ प्रबंधन के लिए भी नीति निर्माण में उपयोगी साबित होगी.
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