डिबाई में 1.15 लाख लोधी वोट, 2027 में किस तरह बनेगा सियासी गणित?
डिबाई विधानसभा सीट पर लोधी वोट ही हार जीत तय करता है. डिबाई विधानसभा सीट पर गैर लोधी ओबीसी वोट 50 हजार के आसपास हैं.

डिबाई सीट की विधानसभा संख्या 68 है. डिबाई विधानसभा सीट बुलंदशहर जिले और बुलंदशहर लोकसभा सीट का हिस्सा है. डिबाई विधानसभा सीट से कल्याण सिंह कई बार विधायक रह चुके हैं. कल्याण सिंह 1996 में बीजेपी से विधायक रहे और अपनी खुद की पार्टी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से भी डिबाई सीट से 2002 में विधायक बने. 2002 में ही राजवीर सिंह भी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से डिबाई से उपचुनाव में विधायक हुए.
कांग्रेस पार्टी आखिरी बार 1985 में डिबाई विधानसभा सीट जीती थी. बीजेपी पहली बार 1991 में डिबाई विधानसभा सीट जीती. 1991, 1993, 1996, 1997, 2017 और 2022 में बीजेपी डिबाई से विधानसभा चुनाव जीती. 2012 में सपा के गुड्डू पंडित डिबाई से विधायक बने. 2007 में बसपा से भी गुड्डू पंडित विधायक बने थे. फिलहाल बीजेपी के चंद्रपाल सिंह डिबाई से बीजेपी विधायक हैं.
2026 में एसआईआर के बाद डिबाई विधानसभा सीट पर 3,15,601 मतदाता बचे है. 2024 लोकसभा चुनाव के समय डिबाई विधानसभा सीट पर 3,52,400 मतदाता थे. एसआईआर के बाद डिबाई विधानसभा सीट पर 36,799 मतदाता कम हुए हैं.
2022 विधानसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट से बीजेपी के चंद्रपाल सिंह विधायक बने. सपा ने हरीश लोधी को टिकट दिया. बसपा ने करणपाल सिंह और कांग्रेस ने सुनीता शर्मा को प्रत्याशी बनाया.
2022 विधानसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट के चुनावी नतीजे-
1. बीजेपी- 1,28,640
2. सपा- 60,615
3. बसपा- 24,516
4. कांग्रेस- 1,947
2022 विधानसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट से बीजेपी के चंद्रपाल सिंह ने जीत दर्ज की. बीजेपी ने लगभग 68 हजार वोटों से सपा के हरीश लोधी को चुनाव हरा दिया. बीजेपी को 58.6 प्रतिशत और सपा को 27.61 फीसदी वोट हासिल हुए. दोनों दलों के बीच लगभग 31 प्रतिशत वोटों का अंतर रहा. बसपा को 24 हजार वोट मिले और कांग्रेस 2 हजार से भी कम वोट हासिल हुए.
2022 विधानसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट पर बीजेपी को लगभग 15-20 हजार लोधी वोट नहीं मिले. बीजेपी को डिबाई में ब्राह्मण, लोधी, क्षत्रिय, जाट, पाल समेत अति पिछड़ी जातियों का वोट एक साथ मिला. बीजेपी को सिर्फ मुस्लिम और यादव वोट पूरे नहीं मिले. लोधी समाज में बीजेपी को थोड़ा नुकसान हुआ. एससी समाज में बसपा के मूल काडर से अलग बाकी वोट बीजेपी को मिल गए.
2022 विधानसभा चुनाव में सपा को यादव और मुस्लिम वोट मिले. लोधी समाज का लगभग 15-20 हजार वोट सपा को मिला. यही कारण रहा कि सपा को 60 हजार के आसपास वोट मिले. बसपा को अपने मूल काडर का वोट मिला.
2022 विधानसभा चुनाव के बाद अब 2024 लोकसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट के समीकरण को भी समझना चाहिए.
2024 लोकसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट के चुनावी नतीजे-
1. बीजेपी- 1,30,094
2. कांग्रेस-सपा गठबंधन- 40,271
3. बसपा- 19147
2024 लोकसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट पर बीजेपी के डॉ भोला सिंह 90 हजार वोटों से चुनाव जीते और कांग्रेस के शिवराम को ऐतिहासिक वोटों से चुनाव हरा दिया. बसपा 20 हजार वोट भी नहीं ला पाई.
2024 लोकसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट पर बीजेपी को यादव और मुस्लिम छोड़कर बाकी सारा वोट मिल गया. बसपा के मूल काडर वाला एससी वोट भी बीजेपी लेने में कामयाब रही है. बीजेपी को ओबीसी, एससी और सामान्य वर्ग का वोट एकतरफा मिला.
2024 लोकसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट पर कांग्रेस को सिर्फ सपा के यादव और मुस्लिम वोट ही मिले. कांग्रेस इस सीट पर अपना कोई भी वोट अपने साथ नहीं जोड़ पाई. 2022 में सपा को जो 15-20 हजार लोधी वोट मिले थे, 2024 में डिबाई में वो वापस बीजेपी की ओर चले गए.
2024 लोकसभा चुनाव में डिबाई विधानसभा सीट बसपा को तगड़ा नुकसान हुआ. अपना मूल काडर वाला वोट बीजेपी की तरफ जाने से बसपा नहीं रोक पाई. इसीलिए 2024 में बसपा को 20 हजार से भी कम वोट हासिल हुए.
आंकड़ों के हिसाब से 2027 में बीजेपी डिबाई में आगे दिख रही है, लेकिन डिबाई सीट का इतिहास राजनीतिक समीकरण का माना जाता है.
डिबाई विधानसभा सीट के जातीय समीकरण (अनुमानित)-
1. लोधी- 1.15 लाख
2. एससी- 50 हजार
3. ब्राह्मण- 31 हजार
4. मुस्लिम- 27 हजार
5. यादव- 10 हजार
6. ठाकुर- 28 हजार
7. जाट- 14 हजार
8. बनिया- 7 हजार
9. पाल- 10 हजार
10. कश्यप- 6 हजार
11. प्रजापति- 5 हजार
12. सैनी- 4 हजार
डिबाई विधानसभा सीट पर लोधी वोट ही हार जीत तय करता है. डिबाई विधानसभा सीट पर गैर लोधी ओबीसी वोट 50 हजार के आसपास हैं. डिबाई विधानसभा सीट सामान्य वर्ग के मतदाता 60 हजार के आसपास हैं. एससी मतदाता भी निर्णायक भूमिका में है.





















