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क्या ब्रेन रॉट दिमाग को वाकई पहुंचा रहा नुकसान? डॉक्टर ने बताया माइंडलेस स्क्रॉलिंग का असर
लगातार बिना किसी मतलब के स्क्रीन देखना दिमाग की एक्टिविटी को धीरे-धीरे कम करता है. ज्यादा स्क्रीन टाइम से दिमाग को सही तरह की चुनौती नहीं मिलती, जिससे सोचने और समझने की क्षमता पर असर पड़ता है.
सोशल मीडिया पर घंटों बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करने के बाद जो सुन्नपन और दिमागी थकान महसूस होती है, उसे आजकल ब्रेन रॉट कहा जा रहा है. यह शब्द 2024 में ऑक्सफोर्ड का वर्ड ऑफ द ईयर भी बना था. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक इंटरनेट मीम है या वाकई दिमाग के अंदर कुछ गलत हो रहा है. इसे लेकर एक्सपर्ट्स माइंडलेस स्क्रॉलिंग के असर को समझाते हैं.
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एक्सपर्ट्स के अनुसार लगातार बिना किसी मतलब के स्क्रीन देखना दिमाग की एक्टिविटी को धीरे-धीरे कम करता है. ज्यादा स्क्रीन टाइम से दिमाग को सही तरह की चुनौती नहीं मिलती, जिससे सोचने और समझने की क्षमता पर असर पड़ता है.
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डॉक्टर बताते हैं कि रोजाना दो घंटे या उससे ज्यादा माइंडलेस स्क्रॉलिंग करने से दिमाग के ग्रे मैटर में कमी आ सकती है. यह असर दिमाग के उन हिस्सों पर पड़ता है, जो याददाश्त, फोकस और फैसले लेने से जुड़े होते हैं. लंबे समय में इससे ध्यान लगाने और जानकारी याद रखने में दिक्कत हो सकती है.
Published at : 01 Feb 2026 07:39 AM (IST)
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मेघा प्रसादसीनियर एडिटर (पॉलिटिकल अफेयर्स)
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