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30 की उम्र में क्यों बढ़ रहा है ब्रेन फॉग? डॉक्टर ने बताए इसके कारण और बचाव के तरीके
ब्रेन फॉग कोई मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है, बल्कि लक्षणों का एक समूह है. इसमें मानसिक थकान, कन्फ्यूजन, ध्यान की कमी, छोटी-छोटी बातें भूल जाना और मल्टीटास्किंग में परेशानी शामिल है.
30 की उम्र को कभी दिमागी क्षमता का सुनहरा दौर माना जाता था. लेकिन अब कई युवा यह महसूस कर रहे हैं कि बात याद रखने में दिक्कत हो रही है. मीटिंग में ध्यान भटक जाता है, सोचने की रफ्तार धीमी लगती है और छोटे-छोटे शब्द भी अचानक याद नहीं आते हैं. कई लोगों को लगता है कि यह याददाश्त में कमी की वजह से हो रहा है. लेकिन यह याददाश्त खोना नहीं होता है, बल्कि एक तरह की मानसिक धुंध होती है जिसे आम भाषा में ब्रेन फॉग कहा जाता है. डॉक्टरों के अनुसार यह कोई अलग बीमारी नहीं बल्कि कई अंदरूनी कारणों का संकेत है. तनाव, नींद की कमी, पोषण की कमी, ज्यादा स्क्रीन टाइम और कोविड के बाद की रिकवरी ये सभी चीजें मिलकर दिमाग की कार्यक्षमता पर असर डाल सकते हैं. हालांकि अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में सही लाइफस्टाइल से इसमें सुधार किया जा सकता है.
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ब्रेन फॉग कोई मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है, बल्कि लक्षणों का एक समूह है. इसमें मानसिक थकान, कन्फ्यूजन, ध्यान की कमी, छोटी-छोटी बातें भूल जाना और मल्टीटास्किंग में परेशानी शामिल है. लोग इसे ऐसे महसूस करते हैं जैसे दिमाग लो पावर मोड पर चला रहा हो.
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डॉक्टर के अनुसार युवा वयस्कों में ब्रेन फोग मानसिक थकान, कन्फ्यूजन और खराब एकाग्रता के रूप में दिखाई देता है. यह डिमेंशिया नहीं है, बल्कि अक्सर तनाव, बर्नआउट, एंग्जायटी या पोस्ट कोविड रिकवरी का असर होता है. वहीं इस उम्र में काम का दबाव, आर्थिक बोझ, बच्चों की परवरिश, सोशल स्टेटस और लगातार डिजिटल एक्स्पोजर बढ़ गया है.ऐसे में लंबे काम के घंटे मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं, जिससे ध्यान और वर्किंग मेमोरी प्रभावित होती है.
Published at : 01 Mar 2026 10:03 AM (IST)
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