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क्या पब्लिक टॉयलेट से होता है UTI? डॉक्टरों ने बताई इसके पीछे की सच्चाई और बचाव के तरीके
यूटीआई तब होता है, जब बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट में पहुंचकर बढ़ने लगते हैं. ज्यादातर मामलों में यह बैक्टीरिया व्यक्ति के अपने शरीर से ही आते हैं, खासकर आंतों में पाए जाने वाले E.coli बैक्टीरिया.
पब्लिक टॉयलेट का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का डर बैठ जाता है. खासतौर पर महिलाएं अक्सर यह सोचकर टॉयलेट इस्तेमाल करने से बचती है कि कहीं संक्रमण न हो जाए. लेकिन क्या सच में पब्लिक टॉयलेट यूटीआई की वजह बनते हैं या फिर यह सिर्फ एक आम गलतफहमी है. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि क्या सच में पब्लिक टॉयलेट से यूटीआई होता है और इसे लेकर डॉक्टर क्या सच्चाई बताते हैं..
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दरअसल यूटीआई तब होता है, जब बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट में पहुंचकर बढ़ने लगते हैं. ज्यादातर मामलों में यह बैक्टीरिया व्यक्ति के अपने शरीर से ही आते हैं, खासकर आंतों में पाए जाने वाले E. coli बैक्टीरिया. यह स्किन के जरिए यूरिनरी ओपनिंग तक पहुंचते हैं. यानी यूटीआई का सीधा संबंध टॉयलेट सीट से नहीं बल्कि बैक्टीरिया के शरीर में मूवमेंट्स से होता है.
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अक्सर लोग टॉयलेट सीट को यूटीआई के लिए जिम्मेदार मानते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है. टॉयलेट सीट आमतौर पर हार्ड और नॉन पोरस मटेरियल की होती है. जिस पर बैक्टीरिया ज्यादा देर तक जिंदा नहीं रह पाते. इसके अलावा जांघों की स्किन का सीधा संपर्क यूरिनरी ओपनिंग से नहीं होता है. इसलिए सीट से संक्रमण होने के चांस बहुत कम होते हैं.
Published at : 26 Dec 2025 08:02 AM (IST)
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