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S या J आकार में ही समुद्र के नीचे क्यों बिछाई जाती हैं तेल-गैस की पाइपलाइन, गजब है इसके पीछे का विज्ञान
भारत और यूएई के बीच प्रस्तावित समुद्री पाइपलाइन इंजीनियरिंग का एक चमत्कार होगी. समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत अब जमीन के साथ-साथ समंदर के नीचे भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. यूएई के साथ सीधी समुद्री पाइपलाइन बनाने की योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे तनावपूर्ण रास्तों पर निर्भरता कम हो सके. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों फीट गहरे पानी में पाइपलाइन बिछाना कैसे संभव होता है? यह प्रक्रिया केवल पाइप बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे 'S' और 'J' आकार का गजब का विज्ञान काम करता है. इंजीनियरिंग के इस अद्भुत प्रदर्शन में पाइपों को सीधा बिछाने के बजाय विशेष तकनीकों के जरिए एक निश्चित घुमाव दिया जाता है, जो उनकी मजबूती और सुरक्षा के लिए अनिवार्य है.
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समुद्र के नीचे पाइपलाइन बिछाने के लिए 'S-Lay' सबसे प्रचलित और पुरानी तकनीक है. इसका उपयोग मुख्य रूप से कम और मध्यम गहराई वाले पानी में किया जाता है. इस प्रक्रिया में, एक विशेष जहाज पर पाइप के टुकड़ों को आपस में वेल्डिंग के जरिए जोड़ा जाता है.
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जैसे-जैसे जहाज आगे बढ़ता है, पाइप लाइन जहाज के पिछले हिस्से से समंदर में उतरती है. इस दौरान पाइप हवा में एक कर्व बनाता है और समुद्र तल पर जाकर टिक जाता है. जहाज से लेकर समंदर के फर्श तक का यह सफर पाइप को अंग्रेजी के 'S' अक्षर जैसा आकार देता है. यह आकार पाइप को झुकने या टूटने से बचाने के लिए जरूरी तनाव प्रदान करता है.
Published at : 16 May 2026 08:25 AM (IST)
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मेघा प्रसादसीनियर एडिटर (पॉलिटिकल अफेयर्स)
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