Civil Service Exam History: अंग्रेजों के जमाने में कैसे होते थे सिविल सर्विसेज के एग्जाम, कौन था देश का पहला IAS?
Civil Service Exam History: अंग्रेजों के समय IAS जैसी सिविल सर्विस कैसे होती थी, ICS परीक्षा क्या थी और भारत के पहले सिविल सर्वेंट की दिलचस्प कहानी जानिए यहां.

Civil Service Exam History: आज के समय में IAS बनने के लिए उम्मीदवारों को UPSC की प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है. हर साल लाखों युवा इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिलती है. IAS को देश की सबसे प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब भारत पर अंग्रेजों का शासन था, तब अफसरों की भर्ती कैसे होती थी? उस समय परीक्षा कहां होती थी, कौन इसमें शामिल हो सकता था और आखिर देश का पहला IAS जैसा अधिकारी कौन था?
हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि आज की IAS सेवा की जड़ें अंग्रेजों के समय की Indian Civil Service (ICS) में छिपी हैं. बता दें कि उस दौर में सिविल सर्विस की नौकरी को अंग्रेजी शासन की सबसे ताकतवर नौकरी माना जाता था. लेकिन उस समय परीक्षा का तरीका, नियम और चयन प्रक्रिया आज के मुकाबले बिल्कुल अलग हुआ करता था. ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि अंग्रेजों के समय यह परीक्षा कैसे होती थी और आखिर देश का पहला IAS अधिकारी कौन था.
लंदन में होती थी परीक्षा, भारतीयों के लिए रास्ता था मुश्किल
अंग्रेजों के शासन में सिविल सर्विस को Indian Civil Service यानी ICS कहा जाता था. शुरुआत में इस परीक्षा में ज्यादातर अंग्रेज ही शामिल होते थे. सबसे बड़ी बात यह थी कि परीक्षा भारत में नहीं, बल्कि इंग्लैंड के लंदन शहर में आयोजित की जाती थी. इसलिए भारतीय युवाओं को परीक्षा देने के लिए हजारों किलोमीटर दूर समुद्र पार करके इंग्लैंड जाना पड़ता था. उस समय यात्रा में कई सप्ताह लग जाते थे और खर्च भी बहुत ज्यादा होता था. यही वजह थी कि बहुत कम भारतीय इस परीक्षा तक पहुंच पाते थे. बता दें कि परीक्षा में अंग्रेजी, इतिहास, कानून और कई दूसरे विषयों से सवाल पूछे जाते थे. बाद में 1922 में पहली बार ICS परीक्षा भारत के इलाहाबाद में भी आयोजित की गई, जिससे भारतीय उम्मीदवारों के लिए रास्ता कुछ आसान हुआ.
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सत्येंद्रनाथ टैगोर बने थे पहले भारतीय सिविल सर्विस अधिकारी
जब भारतीयों के लिए इस परीक्षा को पास करना लगभग असंभव माना जाता था, तब एक युवा ने इतिहास रच दिया. उनका नाम था Satyendranath Tagore. उन्होंने 1863 में ICS परीक्षा पास की और भारतीय सिविल सेवा में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने थे. यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल था. सत्येंद्रनाथ टैगोर प्रसिद्ध कवि Rabindranath Tagore के बड़े भाई थे. उन्होंने साबित कर दिया कि भारतीय भी अपनी मेहनत और योग्यता के दम पर अंग्रेजों की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर सकते हैं. उनकी सफलता ने आगे आने वाली पीढ़ियों को भी सिविल सर्विस में जाने की प्रेरणा दी.
ICS से IAS तक का सफर, आज कैसे होता है चयन?
भारत को आजादी मिलने के बाद ICS की जगह Indian Administrative Service यानी IAS ने ले ली. वहीं आज UPSC इस परीक्षा का आयोजन करता है. उम्मीदवारों को पहले प्रारंभिक परीक्षा, फिर मुख्य परीक्षा और उसके बाद इंटरव्यू से गुजरना पड़ता है. इसके बाद मेरिट के आधार पर चयन होता है. पहले जहां परीक्षा के लिए इंग्लैंड जाना पड़ता था, वहीं आज देश के कई शहरों में परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं.
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