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Explained: क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? कैसे बजट सत्र के मुकाबले बदल गई मानसून सत्र की तस्वीर?

Parliament Monsoon Session 2026:कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने PM मोदी को पत्र लिखकर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है. खरगे कहा, 'बिल पर बिना देखे कोई फैसला नहीं लिया जा सकता.'

20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में एक बार फिर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 यानी परिसीमन बिल को पास कराने की कोशिश होगी. अप्रैल 2026 के बजट सत्र में यह बिल 54 वोटों से गिर गया   था. लेकिन पिछले तीन महीनों में संसद का पूरा राजनीतिक गणित बदल गया है. विपक्षी गठबंधन में दरारें आ चुकी हैं, 37 सांसद चार अलग-अलग विपक्षी दलों से तोड़कर सत्ता पक्ष में आ गए हैं और कुछ क्षेत्रीय दल शर्तों के साथ समर्थन को तैयार हैं. सवाल यह है कि क्या NDA इस बार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार कर पाएगी...

क्या है 131वां संशोधन बिल और क्यों है विवादित?

यह बिल दो बड़े काम करता है:

  • लोकसभा की सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 तक करना
  • 33 फीसदी महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को परिसीमन के बाद लागू करने का संवैधानिक आधार तैयार करना.

बिल के मुताबिक, हर एक राज्य में उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का सिद्धांत वापस लाया जाएगा. विवाद इसलिए है क्योंकि तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों को डर है कि   जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ाने से उनकी सियासी ताकत घट जाएगी. जिन राज्यों ने जनसंख्या कंट्रोल में सफलता पाई है, वे अपने प्रतिनिधित्व में कमी से परेशान हैं.

अप्रैल 2026: जब बिल गिर गया था

17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में वोटिंग हुई. कुल 528 सांसदों ने वोट डाले. संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट चाहिए थे. सरकार को 298 वोट मिले, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े. यानी 54 वोट कम   पड़ गए थे.

कांग्रेस, TMC, DMK, शिवसेना (UBT), NCP (शरद पवार), सपा, RJD और वाम दल ने साथ मिलकर बिल को हराया. DMK प्रमुख एम.के. स्टालिन ने बिल की हार को 'तमिलनाडु की जीत' करार दिया था.

तीन महीनों में कौन से बड़े बदलाव हुए?

अप्रैल से अब तक संसद का गणित पूरी तरह पलट चुका है. यह 1985 के दल-बदल कानून के बाद सबसे बड़ा दल-बदल है. 37 सांसद  चार विपक्षी दलों से तोड़कर सत्ता पक्ष में आ गए हैं.

  • TMC का बंटवारा: ममता बनर्जी की पार्टी के 20 सांसदों ने बगावत कर दी और नेशनल कॉमन पीपुल्स इनिशिएटिव (NCPI) नाम की नई पार्टी बनाकर NDA को समर्थन दे दिया.
  • शिवसेना (UBT) का कमजोर होना: उद्धव ठाकरे के गुट के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो गए.
  • AAP का विलय: आम आदमी पार्टी के 7 सांसद बीजेपी में विलय हो गए.

इन बदलावों के बाद NDA की ताकत 292 से बढ़कर 329 हो गई है. लोकसभा में फिलहाल तीन सीटें खाली हैं, इसलिए दो-तिहाई का आंकड़ा घटकर 360 हो गया है. यानी NDA अब 360 के आंकड़े से महज 31 वोट दूर है. अप्रैल में यह अंतर 62 वोट था.

'मिशन 360': कहां से मिलेंगे बाकी के वोट?

केंद्र सरकार ने 'मिशन 360' का नाम दिया है, यानी दो-तिहाई बहुमत हासिल करना. NDA की निगाहें कई विपक्षी दलों पर हैं:

  • DMK ने कांग्रेस से नाता तोड़ा: पार्टी ने कांग्रेस के करीब बैठना भी स्वीकार नहीं किया और INDIA गठबंधन की बैठक का बहिष्कार किया. स्टालिन ने अपने सांसदों को साफ कह दिया, 'पार्टी की विचारधारा और तमिलनाडु के हित राजनीतिक गठबंधनों से पहले आएंगे.' वे इश्यू-बेस्ड समर्थन पर विचार करेंगे. सरकार को उम्मीद है कि अगर 'सभी राज्यों में 50 फीसदी सीट बढ़ाने' की गारंटी बिल में शामिल की जाए, तो DMK समर्थन कर सकता है.
  • NCP (शरद पवार) 8 सांसद: सुप्रिया सुले ने साफ किया है कि अगर सरकार हर राज्य में 50 फीसदी सीट बढ़ाने की लिखित गारंटी दे, तो NCP समर्थन पर विचार कर सकती है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, 'हमारे पास बिल का टेक्स्ट नहीं है. जब होगा, 24 घंटे में जवाब देंगे.' NCP ने अभी कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है.
  • शिवसेना (UBT) को कशमकश: संजय राउत ने कहा है कि अगर सरकार विपक्ष के संशोधनों को शामिल करती है, तो वे पुनर्विचार कर सकते हैं.
  • DMK और NCP(SP) का साथ: एकसाथ दोनों का समर्थन मिल जाए, तो NDA की संख्या 329 से बढ़कर 359 हो जाएगी. BJD और YSRCP जैसे कुछ और क्षेत्रीय दलों के समर्थन से 360 का आंकड़ा पार किया जा सकता है.

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दावा किया, 'अब NDA के पास दो-तिहाई बहुमत है. महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पास हो जाएं'.

विपक्ष की रणनीति: बिल को गिराने की कोशिश

विपक्षी गठबंधन INDIA अब पहले जैसा एकजुट नहीं रहा. TMC बंट चुकी है, शिवसेना (UBT) कमजोर हुई है, DMK कांग्रेस से अलग हो गया है और NCP (शरद पवार) समर्थन की शर्त रख रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है. खरगे कहा, '131वां संशोधन बिल अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा. अब सरकार संशोधित बिल ला रही है, जिसे देखे बिना कोई फैसला नहीं लिया जा सकता.'

विपक्ष के लिए तत्काल उद्देश्य NDA को 360-वोट की सीमा से नीचे रखना है. अगर NDA दो-तिहाई समर्थन हासिल करने में विफल रहती है, तो संविधान संशोधन एक बार फिर गिर जाएगा. संसद में:

  • 19 जुलाई: सर्वदलीय बैठक
  • 20 जुलाई: मानसून सत्र शुरू
  • 21 जुलाई: NDA संसदीय दल की बैठक (प्रधानमंत्री मोदी संबोधित करेंगे)
  • 13 अगस्त: सत्र समाप्त

तो क्या मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास होगा या नही?

चार बड़े बदलाव समीकरण को पूरी तरह बदल रहे हैं:

  • संख्यात्मक बदलाव: NDA अब 329 सांसदों के साथ 360 के आंकड़े से महज 31 वोट दूर है.
  • राजनीतिक बदलाव: TMC, शिवसेना (UBT) और AAP में बगावत/विलय से NDA मजबूत हुई है.
  • सामरिक बदलाव: NCP(SP) और DMK के शर्तों के साथ समर्थन से NDA और करीब आ सकती है.
  • बिल का फॉर्मूला: सरकार 'सभी राज्यों में 50 फीसदी सीट बढ़ाने' की गारंटी देकर दक्षिणी राज्यों की चिंता दूर करने की कोशिश कर रही है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब अगर NDA DMK के 22 और NCP(SP) के 8 सांसद अपने साथ ला पाई, तो बिल पास हो सकता है. अगर नहीं तो यह सत्र अप्रैल 2026 की तरह ही निराशाजनक साबित हो सकता है. विपक्ष के लिए तत्काल उद्देश्य NDA को 360-वोट की सीमा से नीचे रखना है. भले ही सत्ता गठबंधन सबसे बड़ा गुट बनकर उभरे, लेकिन दो-तिहाई समर्थन हासिल करने में विफल रहने से संविधान संशोधन को पारित होने से रोका जा सकेगा.

20 जुलाई से शुरू हो रहा है यह बड़ा खेल और इसके नतीजे आने वाले दशकों के चुनावी नक्शे को फिर से लिखेंगे.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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