मानसून सत्र में पेश नहीं हो पाएगा 130वां संविधान संशोधन बिल? JPC सदस्यों में नहीं बनी एक राय, कहा- ‘अभी चर्चा की जरूरत’
130th Amendment Bill: बैठक में जब रिपोर्ट को स्वीकार करने की बात आई, तब सभी सदस्यों ने क्लॉज बाई क्लॉज वोटिंग कराने की मांग की. इसके बाद तय किया गया कि बिल पर अभी और चर्चा की जरूरत है.

- 130वें संविधान संशोधन विधेयक पर जेपीसी रिपोर्ट स्वीकार नहीं हुई।
- समिति सदस्यों में सहमति न बन पाने के कारण फैसला टल गया।
- जेपीसी ने पद हटाने की बजाय केवल निलंबन का प्रस्ताव दिया।
- विपक्ष के विरोध के बाद बिल जेपीसी को भेजा गया था।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संविधान में 130वें संशोधन को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से प्रस्तावित विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को शुक्रवार (17 जुलाई, 2026) को आयोजित बैठक में अपनी अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करना था, लेकिन जेपीसी सदस्यों के बीच सहमति न बन पाने की वजह से फिलहाल अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने का फैसला टाल दिया गया है.
संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के चेयरमैन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अपराजिता सारंगी के मुताबिक, अभी प्रस्तावित विधेयक को लेकर और चर्चा की जरूरत है और आगे भी इस बिल पर समिति में चर्चा जारी रहेगी.
बिल को लेकर JPC सदस्यों ने अधिकारियों संग की बैठक
130वें संविधान संशोधन बिल पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में शुक्रवार (17 जुलाई, 2026) को हुई बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय के अधिकारियों ने सदस्यों की तरफ से उठाए गए विभिन्न सवालों के जवाब दिए.
अधिकारियों की तरफ से बिल से जुड़े सभी सवालों और इसके क्या-क्या प्रभाव पड़ने वाले हैं, उसको लेकर विस्तृत रूप से जेपीसी के सभी सदस्यों को जानकारी दी गई. सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद जब रिपोर्ट को स्वीकार करने की बात आई, तब सभी सदस्यों ने क्लॉज बाई क्लॉज वोटिंग कराने की मांग की. इसके बाद यह तय किया गया कि अभी प्रस्तावित विधेयक की रिपोर्ट को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है और अभी बिल पर और चर्चा की जरूरत है.
संसद में विपक्ष के विरोध के बाद बिल को जेपीसी के पास भेजा गया था
केंद्र सरकार की तरफ से जब विधेयक को संसद में लाया गया, तब लगभग सभी विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया था. विपक्षी दलों का मानना था कि सरकार इसका दुरुपयोग करके विपक्षी दलों की सरकारों को अस्थिर करने के लिए कर सकती है. उसके बाद इस बिल को जेपीसी के पास विस्तृत चर्चा के लिए भेज दिया गया था.
हालांकि, जेपीसी में भेजने के बाद भी कांग्रेस, टीएमसी और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दल जेपीसी में शामिल नहीं हुए थे. जेपीसी चेयरमैन अपराजिता सारंगी ने बताया कि भले ही कई राजनीतिक दल जेपीसी में शामिल नहीं हुए हों, लेकिन जेपीसी ने उन दलों से भी सुझाव मांगे थे.
पहले बिल में क्या थे प्रावधान?
- 30 दिन हिरासत के बाद 31वें दिन पद स्वतः समाप्त
- 5 साल या उससे ज्यादा सजा वाले नेताओं पर नियम लागू
- गिरफ्तारी ही कार्रवाई का आधार
अब JPC ने बिल को लेकर कई अहम बदलाव सुझाए हैं. समिति का कहना है कि ‘पद से हटाने’ की जगह सिर्फ निलंबन का प्रावधान हो, ताकि अदालत से राहत मिलने पर नेता दोबारा पद संभाल सके. इसके अलावा, पांच साल की सजा वाले सभी अपराधों की जगह सिर्फ गंभीर अपराधों की तय सूची बनाई जाए. साथ ही, सनसेट क्लॉज जोड़ा जाए, यानी कोर्ट से बरी होते ही निलंबन स्वतः समाप्त हो जाए.
जेपीसी की शुक्रवार (17 जुलाई) को हुई बैठक में समिति को ड्राफ्ट रिपोर्ट को स्वीकार करना था, लेकिन जेपीसी में NDA के ज्यादातर सदस्य होने के बाद भी सहमति ना बनने के चलते फिलहाल जेपीसी ने तय किया कि अभी ड्राफ्ट पर और चर्चा किए जाने की जरूरत है. ज्यादातर विपक्षी पार्टियां अभी भी इस बिल को लेकर सहमत नहीं है और सरकार का फिलहाल महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने पर ज्यादा जोर है. ऐसे में दो तिहाई बहुमत के लिए कई विपक्षी दलों के समर्थन की जरूरत भी सरकार को है.
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