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जब घड़ियां नहीं थीं, तब वक्त कैसे देखते थे लोग? पढ़ें पहर बनने की कहानी
घड़ियों से पहले भी इंसान समय का गुलाम नहीं, बल्कि समय का ज्ञानी था. पहर, सूरज, चांद और प्रकृति ने मिलकर वक्त को समझने की कहानी लिखी. आइए जानें कि जब घड़ियां नहीं थीं, तब वक्त कैसे देखा जाता था.
आज हम मोबाइल और घड़ियों पर एक नजर डालते ही समय जान लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब घड़ियां नहीं थीं, तब इंसान वक्त कैसे पहचानता था? बिना मिनट, बिना सेकंड, बिना अलार्म के फिर भी दिनचर्या बिल्कुल तय होती थी. खेतों में काम, पूजा-पाठ, यात्रा और राजकाज सब समय पर होता था. आखिर वह कौन-सी समझ थी, कौन-सा तरीका था, जिसने इंसान को समय का एहसास कराया? आइए समझते हैं.
Published at : 28 Jan 2026 06:10 PM (IST)
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