एक्सप्लोरर

झारखंड में उठी CBI जांच की मांग, जानें क्या हैं CBI जांच के नियम और कैसे होती है यह?

JPSC Protest CBI Enquiry: झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बीते दिन पुलिस ने लाठीचार्ज किया, वे परीक्षा में धांधली के लिए सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. चलिए जानें कि यह कैसे होती है.

JPSC Protest CBI Enquiry: दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद झारखंड में पिछले कई दिनों से हजारों छात्र अपनी मेहनत के हक के लिए आवाज उठा रहे हैं. राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर छात्रों का आक्रोश उस समय चरम पर पहुंच गया, जब विधानसभा का घेराव करने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया. इस दौरान कई युवा घायल हुए, लेकिन वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. छात्र केवल एक ही मांग पर अड़े हैं मामले की सीबीआई जांच हो. आइए समझते हैं कि छात्रों की इस मांग के बीच झारखंड में कौन सा कानूनी पेच फंसा है और देश में सीबीआई जांच के नियम क्या कहते हैं.

क्या सीबीआई देश में कहीं भी अपनी मर्जी से जांच शुरू कर सकती है?

इसका जवाब है नहीं, सीबीआई के पास देश के हर कोने में खुद से मामला दर्ज करने की ताकत नहीं है. दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम (DSPE Act, 1946) की धारा 2 के तहत सीबीआई को केवल केंद्र शासित प्रदेशों में ही किसी भी अधिसूचित अपराध की स्वतंत्र जांच का अधिकार मिला हुआ है. अगर सीबीआई को किसी राज्य की सीमा के अंदर कोई जांच करनी है, तो धारा 6 के अनुसार उसे उस संबंधित राज्य सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है. इसके बिना केंद्रीय एजेंसी राज्य में कदम नहीं रख सकती हैं.

सीबीआई किस तरह के मामलों की जांच करती है?

समय के साथ सीबीआई एक बहुआयामी जांच एजेंसी बन चुकी है और यह मुख्य रूप से तीन अलग-अलग विभागों के जरिए काम करती है:

भ्रष्टाचार रोधी शाखा: यह केंद्रीय कर्मचारियों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और सरकारी निकायों के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामलों की जांच करती है.

आर्थिक अपराध शाखा: यह बैंक धोखाधड़ी, फर्जी भारतीय मुद्रा (नकली नोट), साइबर क्राइम और बड़े वित्तीय घोटालों की फाइलें संभालती है.

विशेष अपराध शाखा: यह राज्य सरकारों के अनुरोध या अदालतों के आदेश पर हत्या, अपहरण और संगठित अपराध जैसे सनसनीखेज मामलों की छानबीन करती है.

यह भी पढ़ें: हर सेकंड कितना पानी फेंकती है वॉटर कैनन, जानें ये कितने खतरनाक


झारखंड में उठी CBI जांच की मांग, जानें क्या हैं CBI जांच के नियम और कैसे होती है यह?

क्या पुलिस द्वारा दर्ज किए मामले को सीबीआई अपने हाथ में ले सकती है?

राज्य पुलिस के किसी केस को सीबीआई तीन प्रमुख स्थितियों में ही टेकओवर (जब्त) कर सकती है-

  • पहली स्थिति यह है कि राज्य सरकार खुद केंद्र सरकार से केस सीबीआई को सौंपने की लिखित सिफारिश करे और केंद्र सरकार (सीबीआई की राय लेने के बाद) उस पर अपनी सहमति दे.
  • दूसरी स्थिति में राज्य सरकार DSPE एक्ट की धारा 6 के तहत औपचारिक सहमति पत्र जारी करे और केंद्र सरकार धारा 5 के तहत अधिसूचना निकाले.
  • तीसरी स्थिति तब बनती है जब देश का सुप्रीम कोर्ट या संबंधित राज्य का हाई कोर्ट पुलिस केस की जांच सीधे सीबीआई को सौंपने का निर्देश दे दे.

सीबीआई जांच की प्रक्रिया क्या है?

किसी केस का आदेश मिलते ही सीबीआई सबसे पहले प्राथमिक दर्ज प्राथमिकी या प्रारंभिक जांच कायम करती है. इसके बाद जांच अधिकारी घटना स्थल पर पहुंचकर भौतिक और डिजिटल तरीके से सबूत जुटाते हैं, गवाहों के बयान दर्ज करते हैं और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेते हैं. जरूरत पड़ने पर आरोपियों और संदिग्धों को समन भेजकर पूछताछ की जाती है और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर कानून के तहत गिरफ्तारी की जाती है. जांच पूरी होने पर सीबीआई अपनी अंतिम रिपोर्ट या चार्जशीट संबंधित विशेष सीबीआई अदालत में दाखिल करती है, जहां मुकदमा चलता है.

क्या केंद्र सरकार खुद ही सीबीआई जांच का आदेश दे सकती है?

इसका जवाब है नहीं, केंद्र सरकार अकेले अपने दम पर ऐसा नहीं कर सकती है. हालांकि DSPE एक्ट की धारा 5 केंद्र को यह शक्ति देती है कि वह सीबीआई का क्षेत्राधिकार किसी भी राज्य तक बढ़ा सके, लेकिन धारा 6 इस पर कड़ा नियंत्रण लगाती है. धारा 6 के अनुसार, केंद्र सरकार चाहे कोई भी निर्देश जारी कर दे, लेकिन जब तक संबंधित राज्य सरकार अपनी सहमति नहीं देती है, तब तक सीबीआई राज्य की पुलिस सीमा के भीतर कोई समानांतर जांच शुरू नहीं कर सकती है.

सामान्य सहमति क्या है और झारखंड में इसे लेकर क्या स्थिति है?

आमतौर पर राज्य सरकारें केंद्रीय जांच एजेंसी को अपने यहां काम करने के लिए एकमुश्त सामान्य सहमति देकर रखती हैं, ताकि हर नए केस के लिए अलग से अनुमति न लेनी पड़े. लेकिन झारखंड सरकार ने नवंबर 2020 में सीबीआई को दी गई यह जनरल कंसेंट वापस ले ली थी. इसका मतलब यह है कि अब सीबीआई अगर झारखंड में किसी भी अधिकारी पर केस दर्ज करना चाहती है या किसी घोटाले की जांच करना चाहती है, तो उसे हर बार राज्य सरकार से अलग से लिखित इजाजत मांगनी होगी.


झारखंड में उठी CBI जांच की मांग, जानें क्या हैं CBI जांच के नियम और कैसे होती है यह?

तो क्या झारखंड में अब सीबीआई की एंट्री का कोई रास्ता नहीं है?

नहीं ऐसा नहीं है, कानूनी तौर पर इसके लिए एक बहुत मजबूत रास्ता खुला हुआ है. यद्यपि राज्य सरकार की सहमति के बिना केंद्र या सीबीआई खुद कदम नहीं बढ़ा सकते, लेकिन यदि भारत का सर्वोच्च न्यायालय या झारखंड उच्च न्यायालय परीक्षाओं में धांधली के इस मामले का संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दे देते हैं, तो फिर राज्य सरकार की अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं रह जाएगी. तब झारखंड में सीबीआई जांच को कोई सरकार नहीं रोक सकती है. संवैधानिक अदालतों का आदेश राज्य की सहमति पर भारी पड़ता है.

यह भी पढ़ें: McMahon Line से Map War तक, भारत-चीन सीमा विवाद के 10 बड़े सवाल और जवाब

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

झारखंड में उठी CBI जांच की मांग, जानें क्या हैं CBI जांच के नियम और कैसे होती है यह?
झारखंड में उठी CBI जांच की मांग, जानें क्या हैं CBI जांच के नियम और कैसे होती है यह?
कितने बच्चों तक मिलती है मैटरनिटी लीव, क्या तीसरे बच्चे पर बदल जाता है नियम?
कितने बच्चों तक मिलती है मैटरनिटी लीव, क्या तीसरे बच्चे पर बदल जाता है नियम?
McMahon Line से Map War तक, भारत-चीन सीमा विवाद के 10 बड़े सवाल और जवाब
McMahon Line से Map War तक, भारत-चीन सीमा विवाद के 10 बड़े सवाल और जवाब
हर सेकंड कितना पानी फेंकती है वॉटर कैनन, जानें ये कितने खतरनाक
हर सेकंड कितना पानी फेंकती है वॉटर कैनन, जानें ये कितने खतरनाक
Advertisement

वीडियोज

The Traitors 2 का नया Sneak Peek Out, Rhea Chakraborty से Mallika Sherawat तक दिखा बड़ा Drama
Lock Upp 2 की Success Party में Shreya Kalra का जलवा, Farhana Bhatt समेत सितारों ने बिखेरा Glamour
Salman Khan की Seven Dogs 21 August को India में रिलीज, Sanjay Dutt का होगा खास Cameo
Amruta Khanvilkar ने Divorce Rumours पर जताई नाराजगी, Legal Action की दी चेतावनी
Govinda ने मां Nirmala Devi को खोने का दर्द किया बयां, बोले- लगा सब कुछ खत्म हो गया
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
वंदे मातरम बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी, शशि थरूर बोले- राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत...
वंदे मातरम बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी, शशि थरूर बोले- राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत...
रांची आंदोलन: स्वाति मालीवाल का हमला, 'CJP का एक भी नेता...'
रांची आंदोलन: स्वाति मालीवाल का हमला, 'CJP का एक भी नेता...'
पुर्तगाल क्रिकेट टीम का हुआ एलान, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बना कप्तान
पुर्तगाल क्रिकेट टीम का हुआ एलान, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बना कप्तान
गोवा में पेंट हाउस, मुंबई में करोड़ों का बंगला, 100 करोड़ से ज्यादा का है इमरान हाशमी का साम्राज्य, नेटवर्थ जान उड़ जाएंगे होश
100 करोड़ से ज्यादा का है इमरान हाशमी का साम्राज्य, नेटवर्थ जान उड़ जाएंगे होश
JPC भेजा जाएगा FCRA बिल, विरोध के बीच सरकार का बड़ा कदम
JPC भेजा जाएगा FCRA बिल, विरोध के बीच सरकार का बड़ा कदम
Gen-Z का क्या है चुनावी मुद्दा? आंदोलनों के बीच सर्वे के जवाब ने चौंकाया
Gen-Z का क्या है चुनावी मुद्दा? आंदोलनों के बीच सर्वे के जवाब ने चौंकाया
लोकसभा में कल छात्रों पर बयान दे सकते हैं अमित शाह, राहुल-खरगे की संसद में बैठक
लोकसभा में कल छात्रों पर बयान दे सकते हैं अमित शाह, राहुल-खरगे की संसद में बैठक
आरोप से बेदाग बरी होने तक: कैसे अडानी शेयर्स और मार्केट कैप ने की वापसी?
आरोप से बेदाग बरी होने तक: कैसे अडानी शेयर्स और मार्केट कैप ने की वापसी?
Embed widget