15 August Boondi Ladoo History: 15 अगस्त पर बूंदी ही क्यों बांटी जाती है? कहां से हुई थी इसकी शुरूआत
15 August Boondi Ladoo History: 15 अगस्त पर झंडा फहराने के बाद मिठाई बांटने की परंपरा है. बूंदी को सस्ती, आसानी से बनने वाली और बड़ी मात्रा में बांटने के कारण पसंद किया जाता है.

15 August Boondi Ladoo History: हर साल 15 अगस्त को भारतमें धूम धाम से बनाया जाता है, स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में झंडा फहराने के बाद नाच गाना होता है, और इस सबसे आम बात ये है कि इस दिन बूंदी के लड्डू बाटे जाते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है कि इस दिन बूंदी के लड्डू ही क्यों बाटे जाते है. कई लोग इसे लेकर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं और कुछ लोग इसकी असली वजह जानना चाहते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे क्या सच्चाई है.
15 अगस्त और मिठाई बांटने की परंपरा
15 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रेजों की करीब 200 साल की गुलामी से आजादी मिली थी. इस दिन को हर साल स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस खास मौके पर देशभर में झंडा फहराया जाता है, देशभक्ति के गीत गाए जाते हैं और लोगों में मिठाई बांटी जाती है. मिठाई बांटने की यह परंपरा खुशी जताने का एक आम तरीका है. भारत में जब भी कोई अच्छी बात होती है या कोई त्योहार आता है, तो लोग एक-दूसरे का मुंह मीठा करते हैं. यही परंपरा स्वतंत्रता दिवस पर भी निभाई जाती है और स्कूल, कॉलेज व सरकारी दफ्तरों में झंडा फहराने के बाद बच्चों और कर्मचारियों को मिठाई दी जाती है.
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बूंदी ही क्यों बनी खास मिठाई
अब सवाल यह है कि इतनी सारी मिठाइयों में बूंदी को ही क्यों चुना जाता है. बता देें कि इसकी कोई एक तय वजह नहीं है, लेकिन कुछ आसान कारण हैं जिनकी वजह से बूंदी सबसे लोकप्रिय पसंद बन गई. पहला कारण है कि बूंदी बनाना आसान होता है और इसे बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में तैयार किया जा सकता है. 15 अगस्त पर स्कूलों और दफ्तरों में सैकड़ों-हजारों लोगों को मिठाई बांटनी होती है, इसलिए ऐसी मिठाई चाहिए जो जल्दी बने और सस्ती भी पड़े. दूसरा कारण है कि बूंदी की कीमत बाकी मिठाइयों जैसे लड्डू, बर्फी या पेड़े से काफी कम होती है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों तक यह आसानी से पहुंच जाती है. तीसरा कारण यह भी है कि बूंदी का पीला-केसरिया रंग तिरंगे के रंग से मिलता-जुलता लगता है.
आज के समय में बूंदी बांटना सिर्फ एक मिठाई देने की रस्म नहीं रह गई है, बल्कि यह खुशी और एकता का प्रतीक बन चुकी है. स्कूलों में बच्चे झंडा फहराने के बाद जब बूंदी खाते हैं, तो यह उनके लिए आजादी के जश्न का हिस्सा बन जाता है. यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है और आज भी लगभग हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में इसे निभाया जाता है.
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