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हाई वोल्टेज तारों से चलने वाली ट्रेन में जनरेटर का क्या है रोल? समझिए पूरा सिस्टम
Electric Train Power System: रेलवे का मकसद यही होता है कि सफर के दौरान यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो. इसीलिए इलेक्ट्रिक ट्रेनों में भी जनरेटर भी लगाया जाता है. चलिए जानें इसका क्या काम है.
पटरी के ऊपर दौड़ते मोटे तार, इंजन से जुड़ा पेंटोग्राफ और तेज रफ्तार से भागती ट्रेन… देखने में सब कुछ साफ लगता है कि ट्रेन सीधे बिजली से चल रही है, लेकिन फिर सवाल उठता है कि जब ऊपर से हजारों वोल्ट की बिजली मिल रही है, तो ट्रेन के पीछे जनरेटर यान क्यों लगाया जाता है? क्या बिजली सप्लाई में कोई कमी रह जाती है या फिर इसके पीछे कोई खास तकनीकी वजह है? जवाब जानकर आप भी चौंक सकते हैं.
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भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है. रोजाना करोड़ों यात्री लंबी और छोटी दूरी का सफर ट्रेन से करते हैं. बीते कुछ सालों में रेलवे ने तेजी से विद्युतीकरण किया है और आज देश के ज्यादातर रूट पर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव दौड़ रहे हैं.
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इससे न सिर्फ ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी है, बल्कि डीजल पर निर्भरता कम होने से पर्यावरण को भी बड़ा फायदा हुआ है. इलेक्ट्रिक ट्रेन को बिजली पटरी के ऊपर लगे ओवरहेड तारों से मिलती है. इन तारों में करीब 25 हजार वोल्ट यानी 25 केवी एसी करंट होता है.
Published at : 09 Jan 2026 08:18 AM (IST)
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