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अमेरिका में किस धर्म के लोग सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे, जानें किस पायदान पर आते हैं हिंदू-मुस्लिम?

प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट आई है, जिसने अमेरिका के धार्मिक ढांचे की नई हकीकत बयां की है. इस अध्ययन में खुलासा हुआ है कि एक खास धर्म ने एजुकेशन के दम पर अमेरिका के सभी समूहों को पीछे छोड़ दिया है.

दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका को 'अवसरों की भूमि' कहा जाता है, जहां दुनिया भर के लोग अपने सपनों को पूरा करने पहुंचते हैं, लेकिन क्या धर्म और शिक्षा के बीच भी कोई गहरा संबंध हो सकता है? प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) की हालिया 'रिलिजियस लैंडस्केप स्टडी' ने इस पर से पर्दा उठा दिया है. इस चौंकाने वाली रिपोर्ट में सामने आया है कि अमेरिका में रहने वाले विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच शिक्षा के स्तर में जमीन-आसमान का अंतर है. जहां कुछ अल्पसंख्यक समुदाय पढ़ाई-लिखाई के मामले में औसत अमेरिकी नागरिक से कहीं आगे निकल गए हैं, वहीं कुछ पारंपरिक समूहों के लिए यह सफर अब भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.

अमेरिका में शिक्षा का धार्मिक गणित 

प्यू रिसर्च सेंटर द्वारा किए गए सर्वे से यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका में हिंदू और यहूदी समुदाय के लोग अन्य सभी धार्मिक समूहों की तुलना में चार साल की कॉलेज डिग्री हासिल करने में सबसे आगे हैं. आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में रहने वाले 70 प्रतिशत हिंदुओं के पास बैचलर डिग्री या उससे अधिक शिक्षा है. हिंदुओं के बाद यहूदी समुदाय का नंबर आता है, जहां 65 प्रतिशत लोग उच्च शिक्षित हैं. यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर पूरे अमेरिका के औसत को देखा जाए, तो केवल 35 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों के पास ही कॉलेज की डिग्री है. यानी हिंदू समुदाय की शिक्षा दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है.

ईसाई समुदायों के भीतर शिक्षा का उतार-चढ़ाव

ईसाई धर्म अमेरिका का सबसे बड़ा धार्मिक समूह है, लेकिन इसके अलग-अलग पंथों (Subgroups) के बीच शिक्षा का स्तर काफी भिन्न है. 'मेनलाइन प्रोटेस्टेंट' समूहों में 40 प्रतिशत लोग कॉलेज ग्रेजुएट हैं, जो राष्ट्रीय औसत से थोड़ा बेहतर है. इसमें विशेष रूप से 'एपिसकोपल चर्च' (Episcopal Church) के सदस्य 67 प्रतिशत की उच्च शिक्षा दर के साथ यहूदियों के भी करीब नजर आते हैं. इसके विपरीत, 'इवेंजेलिकल प्रोटेस्टेंट' में यह आंकड़ा गिरकर 29 प्रतिशत और ऐतिहासिक रूप से अश्वेत प्रोटेस्टेंट (Historically Black Protestant) चर्चों में केवल 24 प्रतिशत रह जाता है.

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कैथोलिक समुदाय की बात करें तो यहां 35 प्रतिशत लोग कॉलेज ग्रेजुएट हैं, जो ठीक राष्ट्रीय औसत के बराबर है. हालांकि, कैथोलिकों के भीतर नस्लीय आधार पर बड़ा अंतर देखा गया है. एशियाई मूल के कैथोलिकों में 53 प्रतिशत और श्वेत कैथोलिकों में 43 प्रतिशत उच्च शिक्षित हैं, जबकि हिस्पैनिक कैथोलिकों में यह दर केवल 20 प्रतिशत है.

मुस्लिम और अन्य धर्मों की स्थिति

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में मुस्लिम समुदाय और अन्य धार्मिक समूहों (जैसे बौद्ध और रूढ़िवादी ईसाई) की शिक्षा दर 35 प्रतिशत से 45 प्रतिशत के बीच है. मुस्लिम समुदाय की शिक्षा दर राष्ट्रीय औसत के आसपास या उससे थोड़ी बेहतर बनी हुई है. हालांकि, हिंदुओं की तुलना में यह अंतर काफी बड़ा है. वहीं, जो लोग किसी भी धर्म को नहीं मानते (Atheists and Agnostics), उनमें भी शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा पाया गया है. 53 प्रतिशत अज्ञेयवादी (Agnostics) और 48 प्रतिशत नास्तिक (Atheists) कॉलेज ग्रेजुएट हैं. इसके विपरीत, जो लोग खुद को 'किसी विशेष धर्म का नहीं' (Nothing in particular) बताते हैं, उनमें केवल 29 प्रतिशत ही डिग्री धारक हैं. 

शिक्षा के इस अंतर के पीछे के बड़े कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदुओं की इतनी अधिक शिक्षा दर के पीछे मुख्य कारण 'चयनात्मक आप्रवासन' (Selective Immigration) है. भारत से अमेरिका जाने वाले ज्यादातर लोग डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या आईटी पेशेवर होते हैं, जिनके पास पहले से ही उच्च शिक्षा की डिग्री होती है. अमेरिका की वीजा नीतियां भी अक्सर उच्च कौशल वाले लोगों को प्राथमिकता देती हैं. यहूदी समुदाय में शिक्षा को लेकर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व हमेशा से रहा है, जो उनके आंकड़ों में झलकता है. दूसरी ओर, कुछ समूहों में शिक्षा की कमी के पीछे सामाजिक-आर्थिक कारण, संसाधनों तक कम पहुंच और ऐतिहासिक असमानताएं जिम्मेदार हो सकती हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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