US Wars History: दुनिया के कितने देशों को तबाह कर चुका अमेरिका, किस नंबर पर आता है ईरान?
US Wars History: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव जारी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अमेरिका ने अब तक कितने देशों पर हमला किया है.

US Wars History: यूनाइटेड स्टेट्स, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे झगड़े के दौरान ग्लोबल टेंशन फिर से बढ़ चुकी है. ईरानी मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर हाल के हमले की रिपोर्ट ने दुनिया भर में अमेरिकी मिलिट्री दखल के इतिहास के बारे में एक बड़ी बहस को फिर से शुरू कर दिया है. दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद से यूनाइटेड स्टेट्स ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई मिलिट्री ऑपरेशंस किए हैं. कुछ पुराने रिकॉर्ड्स बताते हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स दुनिया भर में सैकड़ों दखल में शामिल रहा है.
यूनाइटेड स्टेट्स मिलिट्री दखल के ग्लोबल आंकड़े
यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस और इंडिपेंडेंस रिसर्च ग्रुप जैसे संस्थानों की पुरानी स्टडीज और रिपोर्ट के मुताबिक यूनाइटेड स्टेट्स ने 1776 और 2026 के बीच दुनिया भर में 400 से ज्यादा मिलिट्री दखल किए हैं. इन ऑपरेशन का एक बड़ा हिस्सा 1950 के बाद हुआ. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूनाइटेड स्टेट्स एक ग्लोबल सुपरपावर के तौर पर उभरा. अकेले 1945 से यूनाइटेड स्टेट्स ने कम से कम 30 देशों पर बमबारी की और दुनिया के अलग-अलग इलाकों के करीब 96 देशों में किसी ना किसी तरह के मिलिट्री दखल दिए. इन दखल में सीधे युद्ध, हवाई हमले, नेवी के झगड़े, साथियों को मिलिट्री सपोर्ट और राजनीतिक घटनाक्रम पर असर डालने के लिए बनाए गए गुप्त ऑपरेशन शामिल हैं.
यूएस मिलट्री ऑपरेशन से सबसे ज्यादा प्रभावित देश
कुछ देशों में यूनाइटेड स्टेट्स की मिलिट्री की खास तौर पर बड़े पैमाने पर भागीदारी रही है. सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में वियतनाम, इराक, अफगानिस्तान और लाओस शामिल हैं. वियतनाम युद्ध के दौरान यूनाइटेड स्टेट्स ने पूरे दूसरे विश्व युद्ध में इस्तेमाल किए गए बमों से ज्यादा बम गिराए. लाओस बाद में इतिहास में सबसे ज्यादा बमबारी वाले देश के तौर पर जाना जाने लगा. क्योंकि कोल्ड वॉर के दौरान यहां लाखों टन विस्फोटक गिराए गए थे.
21वीं सदी में आतंक के खिलाफ युद्ध के तहत शुरू किए गए अफगानिस्तान और इराक के युद्ध से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ और लंबे समय तक अस्थिरता बनी रही. इन संघर्षों की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों को हटाया गया, आर्थिक गिरावट आई और साथ ही बड़ी संख्या में आम लोगों की मौत भी हुई.
शासन में बदलाव और राजनीतिक दखल
मिलिट्री युद्ध के अलावा यूनाइटेड स्टेट्स पर कई देशों में राजनीतिक दखल और शासन में बदलाव को सपोर्ट करने या फिर उन्हें ऑर्गेनाइज करने का भी आरोप लगा है. ईरान में 1953 का तख्तापलट इसका सबसे मशहूर उदाहरण है. यहां सीआईए ने डेमोक्रेटिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग को हटाने में मदद की थी. 1973 में चिली में यूनाइटेड स्टेट्स के शामिल होने के बारे में भी ऐसे ही आरोप लगे हैं. यहां साल्वाडोर अलेंदे की सरकार गिरा दी गई थी. इसी के साथ 2011 में लीबिया में मिलिट्री दखल ने मुअम्मर गद्दाफी के पतन में मदद की थी.
यूनाइटेड स्टेट्स के दखल के इतिहास में ईरान की स्थिति
ईरान उन देशों में से एक रहा है जहां पर यूनाइटेड स्टेट्स ने कई बार राजनीतिक और सैन्य दोनों तरह से दखल दिया है. 1953 के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खास तौर पर तनाव से ग्रस्त हो चुके हैं. इसने ईरान के राजनीतिक माहौल को बदल दिया है. बाद में 1988 में ऑपरेशन प्रेइंग मेंटिस के दौरान सीधी मिलिट्री लड़ाई हुई. यूनाइटेड स्टेट्स नेवी की सेना फारस की खाड़ी में ईरानी सेना से भिड़ गई. 2025-2026 में भी तनाव फिर से बढ़ चुका है. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरानी मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर हमलों की खबरें सामने आई हैं.
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