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टोटलाइजर से कैसे बदलेगी EVM वोटों की गिनती, पुराने सिस्टम से कितना अलग?

टोटलाइजर तकनीक ईवीएम के बूथवार आंकड़ों को छिपाकर मतदाताओं की पहचान सुरक्षित रखने का एक साधन है. आइए इस बारे में थोड़ा और विस्तार से जानें.

टोटलाइजर तकनीक ईवीएम के बूथवार आंकड़ों को छिपाकर मतदाताओं की पहचान सुरक्षित रखने का एक साधन है. आइए इस बारे में थोड़ा और विस्तार से जानें.

टोटलाइजर मशीन

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मौजूदा व्यवस्था में चुनाव संपन्न होने के बाद स्ट्रांग रूम से ईवीएम मशीनों को बाहर निकाला जाता है. मतगणना केंद्र पर प्रत्येक ईवीएम के कंट्रोल यूनिट को बारी-बारी से खोला जाता है. इसके बाद उस विशेष बूथ पर किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले हैं, यह आंकड़ा अलग से दर्ज किया जाता है.
मौजूदा व्यवस्था में चुनाव संपन्न होने के बाद स्ट्रांग रूम से ईवीएम मशीनों को बाहर निकाला जाता है. मतगणना केंद्र पर प्रत्येक ईवीएम के कंट्रोल यूनिट को बारी-बारी से खोला जाता है. इसके बाद उस विशेष बूथ पर किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले हैं, यह आंकड़ा अलग से दर्ज किया जाता है.
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निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों की मशीनों को इसी तरह एक-एक करके गिना जाता है और अंत में सभी वोटों को जोड़कर विजेता की घोषणा होती है. इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी कमी यह है कि किस क्षेत्र या बूथ के लोगों ने किस उम्मीदवार को वोट दिया, इसकी सटीक जानकारी सार्वजनिक हो जाती है.
निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों की मशीनों को इसी तरह एक-एक करके गिना जाता है और अंत में सभी वोटों को जोड़कर विजेता की घोषणा होती है. इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी कमी यह है कि किस क्षेत्र या बूथ के लोगों ने किस उम्मीदवार को वोट दिया, इसकी सटीक जानकारी सार्वजनिक हो जाती है.
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टोटलाइजर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो कई ईवीएम मशीनों के डेटा को एक साथ जोड़ने की सुविधा देता है. चुनाव आयोग द्वारा साल 2016 में दिए गए चुनावी सुधार प्रस्तावों के मुताबिक, यह मशीन केबल के माध्यम से ईवीएम से जुड़ती है.
टोटलाइजर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो कई ईवीएम मशीनों के डेटा को एक साथ जोड़ने की सुविधा देता है. चुनाव आयोग द्वारा साल 2016 में दिए गए चुनावी सुधार प्रस्तावों के मुताबिक, यह मशीन केबल के माध्यम से ईवीएम से जुड़ती है.
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यह एक समय में 14 ईवीएम मशीनों को आपस में जोड़कर सभी उम्मीदवारों को मिले कुल वोटों का समेकित परिणाम दिखाती है. इस व्यवस्था से यह तो पता चल जाएगा कि उन 14 बूथों के समूह में किस प्रत्याशी को कुल कितने मत मिले, लेकिन यह कभी उजागर नहीं होगा कि किसी एक निश्चित बूथ से उसे कितने वोट मिले थे.
यह एक समय में 14 ईवीएम मशीनों को आपस में जोड़कर सभी उम्मीदवारों को मिले कुल वोटों का समेकित परिणाम दिखाती है. इस व्यवस्था से यह तो पता चल जाएगा कि उन 14 बूथों के समूह में किस प्रत्याशी को कुल कितने मत मिले, लेकिन यह कभी उजागर नहीं होगा कि किसी एक निश्चित बूथ से उसे कितने वोट मिले थे.
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टोटलाइजर कोई नई खोज नहीं है, इसे साल 2007 में ही तैयार कर लिया गया था और इसका सफल प्रदर्शन चुनाव आयोग के सामने किया गया था. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) जैसी सरकारी कंपनियों ने इस तकनीक को विकसित किया था.
टोटलाइजर कोई नई खोज नहीं है, इसे साल 2007 में ही तैयार कर लिया गया था और इसका सफल प्रदर्शन चुनाव आयोग के सामने किया गया था. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) जैसी सरकारी कंपनियों ने इस तकनीक को विकसित किया था.
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विधि आयोग ने भी अपने सुझावों में इस प्रणाली को अपनाने की सिफारिश की थी. चुनाव आयोग भी पहले इसके पक्ष में था, लेकिन मंत्रियों के एक समूह द्वारा असहमति जताए जाने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका.
विधि आयोग ने भी अपने सुझावों में इस प्रणाली को अपनाने की सिफारिश की थी. चुनाव आयोग भी पहले इसके पक्ष में था, लेकिन मंत्रियों के एक समूह द्वारा असहमति जताए जाने के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका.
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कागजी मतपत्रों (बैलेट पेपर) के दौर में मतदाताओं की गोपनीयता बनाए रखने का पहले से कानूनी प्रावधान मौजूद था. चुनाव नियमावली के नियम 59A के तहत, यदि चुनाव आयोग को लगता था कि किसी क्षेत्र में नतीजों के बाद हिंसा या मतदाताओं को धमकाने की आशंका है, तो वहां के सभी मतपत्रों को एक बड़े ड्रम में आपस में मिला दिया जाता था.
कागजी मतपत्रों (बैलेट पेपर) के दौर में मतदाताओं की गोपनीयता बनाए रखने का पहले से कानूनी प्रावधान मौजूद था. चुनाव नियमावली के नियम 59A के तहत, यदि चुनाव आयोग को लगता था कि किसी क्षेत्र में नतीजों के बाद हिंसा या मतदाताओं को धमकाने की आशंका है, तो वहां के सभी मतपत्रों को एक बड़े ड्रम में आपस में मिला दिया जाता था.
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इसके बाद गिनती शुरू होती थी, जिससे बूथवार रुझान छिपा रहता था. ईवीएम आने के बाद मशीन-दर-मशीन अलग गिनती होने से यह सुरक्षा चक्र खत्म हो गया. टोटलाइजर के विरोध में सबसे प्रमुख तर्क पारदर्शिता और वोटों के सत्यापन से जुड़ा है. वर्तमान प्रक्रिया में मतदान समाप्त होने पर पोलिंग एजेंटों को फॉर्म 17C पार्ट-1 दिया जाता है, जिसमें पड़े कुल वोटों का ब्योरा होता है. गिनती के दिन फॉर्म 17C पार्ट-2 भरकर ईवीएम से निकले मतों का मिलान किया जाता है. यदि 14 मशीनों के वोट एक साथ जोड़ दिए जाएंगे, तो एजेंटों के लिए अपने-अपने बूथ के वोटों का सटीक मिलान करना और गड़बड़ी की पहचान करना कठिन हो जाएगा.
इसके बाद गिनती शुरू होती थी, जिससे बूथवार रुझान छिपा रहता था. ईवीएम आने के बाद मशीन-दर-मशीन अलग गिनती होने से यह सुरक्षा चक्र खत्म हो गया. टोटलाइजर के विरोध में सबसे प्रमुख तर्क पारदर्शिता और वोटों के सत्यापन से जुड़ा है. वर्तमान प्रक्रिया में मतदान समाप्त होने पर पोलिंग एजेंटों को फॉर्म 17C पार्ट-1 दिया जाता है, जिसमें पड़े कुल वोटों का ब्योरा होता है. गिनती के दिन फॉर्म 17C पार्ट-2 भरकर ईवीएम से निकले मतों का मिलान किया जाता है. यदि 14 मशीनों के वोट एक साथ जोड़ दिए जाएंगे, तो एजेंटों के लिए अपने-अपने बूथ के वोटों का सटीक मिलान करना और गड़बड़ी की पहचान करना कठिन हो जाएगा.

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