एयरफोर्स में क्या जिम्मेदारी संभालते थे एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, कितना बड़ा यह पद?
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ नियुक्त किए गए हैं. आइए जानते हैं कि एयर मार्शल का पद कितना बड़ा होता है और जितेंद्र मिश्रा क्या जिम्मेदारियों संभाल चुके हैं.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के कुशल संचालन के लिए रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त किया है. भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके मिश्रा अब अयोध्या में राम मंदिर की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था की कमान संभालेंगे. ट्रस्ट ने इसके साथ ही तीन नए ट्रस्टी महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव की भी नियुक्ति की है. ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि वायुसेना में जितेंद्र मिश्रा किस पद पर रहे और एयर मार्शल का ओहदा असल में कितना बड़ा माना जाता है.
वेस्टर्न एयर कमांड की संभाली थी कमान
अपने करियर के आखिरी और सबसे अहम दौर में जितेंद्र मिश्रा वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे, जो वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण कमानों में गिनी जाती है. इसी जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के वक्त वेस्टर्न कमांड की अगुवाई की और इस अहम सैन्य अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. करीब 39 साल तक वायुसेना की सेवा करने के बाद वे 30 अप्रैल 2026 को रिटायर हुए थे.
कितना बड़ा होता है एयर मार्शल का पद
वायुसेना में एयर चीफ मार्शल फोर-स्टार जनरल सर्वोच्च पद होता है. उनके ठीक नीचे एयर मार्शल थ्री-स्टार जनरल का स्थान आता है. इस पद पर आसीन अधिकारी सीधे तौर पर वायुसेना प्रमुख को रिपोर्ट करते हैं और देश की हवाई सुरक्षा से जुड़े बड़े नीतिगत फैसले लेते हैं.
एयर मार्शल की ताकत
एयर मार्शल के पद पर रहने वाले अधिकारी को ही वायुसेना की विभिन्न कमानों जैसे वेस्टर्न, ईस्टर्न, साउदर्न कमान का 'कमांडर-इन-चीफ' बनाया जाता है. वेस्टर्न कमान के प्रमुख के तौर पर उनके एक आदेश पर सैकड़ों लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम और हजारों वायुसैनिक तुरंत एक्शन में आ जाते है.
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प्रशासनिक और रणनीतिक शक्तियां
इस पद के अधिकारी के पास युद्ध की योजना बनाने, नए हथियारों व तकनीकों के परीक्षण की निगरानी करने और सीमाओं पर फॉरवर्ड बेस की सुरक्षा रणनीति तैयार करने का पूरा जिम्मा होता है. उनके पास अपनी कमान के तहत आने वाले अरबों रुपये के रक्षा बजट और संसाधनों के प्रबंधन का पूरा वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार होता है.
यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो एयर मार्शल का पद वायुसेना प्रमुख के ठीक नीचे का दूसरा सबसे बड़ा पद माना जाता है. इस रैंक तक पहुंचने वाले अधिकारी अपने पूरे करियर में दशकों की मेहनत, कई बड़ी कमानों का अनुभव और गंभीर जिम्मेदारियां निभाने के बाद ही यहां तक पहुंच पाते हैं.
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