एक्सप्लोरर

इस देश में आसमान छूती है अमीरी, फिर पीएम से मंत्री तक साइकिल चलाने पर क्यों हैं मजबूर?

जहां करोड़ों की समृद्धि जेब में हो, वहां सड़कों पर साइकिल की घंटी क्यों गूंजती है, कार के हॉर्न क्यों नहीं? क्योंकि इस देश ने साबित कर दिया है विकास इंजनों से नहीं, पैडल से भी मुमकिन है. आइए जानें.

जहां करोड़ों की समृद्धि जेब में हो, वहां सड़कों पर साइकिल की घंटी क्यों गूंजती है, कार के हॉर्न क्यों नहीं? क्योंकि इस देश ने साबित कर दिया है विकास इंजनों से नहीं, पैडल से भी मुमकिन है. आइए जानें.

एक ऐसा देश जहां अमीरी आसमान छूती है, बैंक बैलेंस करोड़ों में है और टेक्नोलॉजी दुनिया को दिशा देती है, फिर भी प्रधानमंत्री से लेकर आम ऑफिस कर्मचारी तक साइकिल की सीट पकड़कर ही पैडल मारते हुए निकलते हैं. आखिर ऐसा क्या राज है कि दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक अपने नेताओं को भी दो पहियों पर चलने के लिए मजबूर कर देता है? जवाब उतना सीधा नहीं जितना दिखता है. आइए जानें.

1/7
नीदरलैंड… दुनिया का वो अनोखा देश जहां अमीरी शो-ऑफ बनकर सड़कों पर दहाड़ती नहीं, बल्कि सादगी बनकर पैडल में सिमट जाती है. यहां की सड़कों पर लग्जरी कारें जरूर हैं, लेकिन भीड़ नहीं है. ऑफिस की ओर बढ़ते लोग मिलते हैं, लेकिन मोटर की गूंज में नहीं, साइकिल की हल्की सर्राहट में. और यही दृश्य इस देश की सबसे बड़ी पहचान है.
नीदरलैंड… दुनिया का वो अनोखा देश जहां अमीरी शो-ऑफ बनकर सड़कों पर दहाड़ती नहीं, बल्कि सादगी बनकर पैडल में सिमट जाती है. यहां की सड़कों पर लग्जरी कारें जरूर हैं, लेकिन भीड़ नहीं है. ऑफिस की ओर बढ़ते लोग मिलते हैं, लेकिन मोटर की गूंज में नहीं, साइकिल की हल्की सर्राहट में. और यही दृश्य इस देश की सबसे बड़ी पहचान है.
2/7
यहां के लोग पैसा खर्च करना नहीं भूल गए, बस उन्होंने जिंदगी जीने का तरीका बदल दिया है. जहां दुनिया ट्रैफिक में फंसकर वक्त गंवाती है, नीदरलैंड के लोग हर सुबह ताजी हवा में पैडल मारते हुए मंजिल तक पहुंचते हैं. और यह सब किसी सरकारी आदेश की मजबूरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनाव है, एक जिम्मेदार संस्कृति है.
यहां के लोग पैसा खर्च करना नहीं भूल गए, बस उन्होंने जिंदगी जीने का तरीका बदल दिया है. जहां दुनिया ट्रैफिक में फंसकर वक्त गंवाती है, नीदरलैंड के लोग हर सुबह ताजी हवा में पैडल मारते हुए मंजिल तक पहुंचते हैं. और यह सब किसी सरकारी आदेश की मजबूरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक चुनाव है, एक जिम्मेदार संस्कृति है.
3/7
कहानी 1970 के दशक से शुरू होती है, जब दुनिया पेट्रोल संकट से जूझ रही थी, नीदरलैंड एक अलग ही मुसीबत में था. यहां सड़कों पर बच्चों की बढ़ती दुर्घटनाएं और बिगड़ता शहरी संतुलन बहुत परेशान कर रहा था.
कहानी 1970 के दशक से शुरू होती है, जब दुनिया पेट्रोल संकट से जूझ रही थी, नीदरलैंड एक अलग ही मुसीबत में था. यहां सड़कों पर बच्चों की बढ़ती दुर्घटनाएं और बिगड़ता शहरी संतुलन बहुत परेशान कर रहा था.
4/7
इस देश में ट्रैफिक इतना बढ़ गया था कि लोग कारों से डरने लगे थे. तब जनता ने बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया Stop de Kindermoord यानि बच्चों की हत्या बंद करो. तब सरकार को जनता की आवाज सुननी ही पड़ी.
इस देश में ट्रैफिक इतना बढ़ गया था कि लोग कारों से डरने लगे थे. तब जनता ने बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया Stop de Kindermoord यानि बच्चों की हत्या बंद करो. तब सरकार को जनता की आवाज सुननी ही पड़ी.
5/7
इसके बाद शहरों का नक्शा बदला गया, कार लेन घटाई गईं, साइकिल ट्रैक चौड़े किए गए. फुटपाथ सुरक्षित किए गए. ब्रिज, अंडरपास, स्मार्ट पार्किंग सब कुछ साइकिल की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया. इसका परिणाम है कि नीदरलैंड आज दुनिया का सबसे सुरक्षित, सबसे सुव्यवस्थित और सबसे स्टाइलिश साइकिलिंग देश बन चुका है.
इसके बाद शहरों का नक्शा बदला गया, कार लेन घटाई गईं, साइकिल ट्रैक चौड़े किए गए. फुटपाथ सुरक्षित किए गए. ब्रिज, अंडरपास, स्मार्ट पार्किंग सब कुछ साइकिल की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया. इसका परिणाम है कि नीदरलैंड आज दुनिया का सबसे सुरक्षित, सबसे सुव्यवस्थित और सबसे स्टाइलिश साइकिलिंग देश बन चुका है.
6/7
यहां साइकिल चलाना मजबूरी नहीं सम्मान है. प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे संसद तक अपनी साइकिल पर जाते हैं. न रेड-बीकन गाड़ी, न भारी सुरक्षा काफिला. क्योंकि यहां पावर का मतलब दिखावा नहीं, सादगी और जवाबदेही है.
यहां साइकिल चलाना मजबूरी नहीं सम्मान है. प्रधानमंत्री मार्क रुट्टे संसद तक अपनी साइकिल पर जाते हैं. न रेड-बीकन गाड़ी, न भारी सुरक्षा काफिला. क्योंकि यहां पावर का मतलब दिखावा नहीं, सादगी और जवाबदेही है.
7/7
अगर पीएम साइकिल चला सकते हैं तो मंत्री, अधिकारी, प्रोफेसर और बिजनेसमैन भी उसी लाइन में चलते हैं. यह यहां की नॉर्मल संस्कृति है और समाज इसे ही सभ्यता मानता है.
अगर पीएम साइकिल चला सकते हैं तो मंत्री, अधिकारी, प्रोफेसर और बिजनेसमैन भी उसी लाइन में चलते हैं. यह यहां की नॉर्मल संस्कृति है और समाज इसे ही सभ्यता मानता है.

जनरल नॉलेज फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

कौन है 'विमल पान मसाला' कंपनी का मालिक, कितनी है कमाई?
कौन है 'विमल पान मसाला' कंपनी का मालिक, कितनी है कमाई?
एक दिन में कितनी ट्रेनें चलाता है रेलवे, कितनी कमाई- कितना खर्च?
एक दिन में कितनी ट्रेनें चलाता है रेलवे, कितनी कमाई- कितना खर्च?
80 साल में कितनी बदली भारत की सुरक्षा? अभी कितनी है सैन्य ताकत
80 साल में कितनी बदली भारत की सुरक्षा? अभी कितनी है सैन्य ताकत
अंतरिक्ष में इंसान रो भी नहीं सकता, आंखों से बाहर क्यों नहीं आते आंसू?
अंतरिक्ष में इंसान रो भी नहीं सकता, आंखों से बाहर क्यों नहीं आते आंसू?

वीडियोज

Sansani: कैमरे में कैद मर्डर की LIVE पिक्चर
Bollywood News: इलायची ऐड पर घिरे SRK, अजय और टाइगर, FDA ने भेजा नोटिस (16.08.26)
Udne ki Asha: Sachin-Sailee के जाने पर रोया Laksh, Roshini को लगी मिर्ची!
Amit Shah On Vande Matarm: वंदे मातरम् पर Amit Shah का कांग्रेस पर हमला, कहा - 'जनता से मांगे माफी'
Vande Mataram Controversy: वंदे मातरम् पर कांग्रेस को बीजेपी ने घेरा, कहा- 'संविधान का अपमान किया'

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'जिंदा या मुर्दा लाओ इनाम पाओ', ईरान की स्कीम सुनकर बौखला उठेंगे ट्रंप
'जिंदा या मुर्दा लाओ इनाम पाओ', ईरान की स्कीम सुनकर बौखला उठेंगे ट्रंप
पंजाब में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 12 IPS अधिकारियों के तबादले
पंजाब में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 12 IPS अधिकारियों के तबादले
देवदत्त पडिक्कल ने खोला 'ऐतिहासिक पारी' का राज, जानें क्या कहा
देवदत्त पडिक्कल ने खोला 'ऐतिहासिक पारी' का राज, जानें क्या कहा
Batwara 1947 बनी सनी देओल-प्रीति जिंटा की हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म, 4 मूवीज का तोड़ा रिकॉर्ड
'बंटवारा 1947' बनी सनी देओल-प्रीति जिंटा की हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म, 4 मूवीज का तोड़ा रिकॉर्ड
करीबी नेता की 'आत्महत्या' पर ममता बोलीं, 'दर्दनाक बात है कि...'
करीबी नेता की 'आत्महत्या' पर ममता बोलीं, 'मानसिक तनाव झेलना पड़ा'
जावेद अख्तर ने PAK राष्ट्रपति की उधेड़ी बखिया, कहा - 'हिंदुओं की...'
जावेद अख्तर ने PAK राष्ट्रपति की उधेड़ी बखिया, कहा - 'हिंदुओं की...'
घरों में क्यों लगाया जाता है MCB? जानें क्या होती है जरूरत
घरों में क्यों लगाया जाता है MCB? जानें क्या होती है जरूरत
थम्ब्स अप इमोजी पर छिड़ी बहस, लोगों ने कहा सबसे Rude है तरीका
थम्ब्स अप इमोजी पर छिड़ी बहस, लोगों ने कहा सबसे Rude है तरीका
Embed widget