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क्या समंदर में कहीं भी चल सकते हैं जहाज, आखिर सुरक्षित शिपिंग के लिए कितना गहरा होना चाहिए पानी?
जहाजों के लिए समंदर का चुनाव गहराई के आधार पर होता है. जहाज का ड्राफ्ट और समुद्र की गहराई का अनुपात ही सुरक्षित सफर तय करता है. इसमें स्क्वाट प्रभाव और ज्वार-भाटा का भी बड़ा योगदान होता है.
समंदर की अनंत गहराई को देखकर अक्सर लगता है कि जहाज कहीं भी बेरोकटोक चल सकते हैं, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. शिपिंग का पूरा गणित पानी की गहराई और जहाज के वजन पर टिका होता है. क्या आपने कभी सोचा है कि हजारों टन वजनी जहाज समुद्र तल से टकराए बिना कैसे गुजर जाते हैं? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि 'ड्राफ्ट' और 'अंडर कील क्लीयरेंस' जैसे तकनीकी विज्ञान का हाथ है, जो समुद्री सुरक्षा की आधारशिला हैं. चलिए जानें.
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समुद्र की गहराई तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक 'ड्राफ्ट' है. सरल भाषा में कहें तो जहाज का वह हिस्सा जो पानी के नीचे डूबा रहता है, उसे ही ड्राफ्ट कहते हैं. जहाज जितना बड़ा और भारी होगा, उसका ड्राफ्ट उतना ही ज्यादा होगा.
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सुरक्षा का नियम स्पष्ट है कि समुद्र की गहराई जहाज के ड्राफ्ट से काफी ज्यादा होनी चाहिए. यदि गहराई कम हुई, तो जहाज समुद्र के तल से टकराकर फंस सकता है, जो एक बड़ी समुद्री दुर्घटना को न्योता दे सकता है.
Published at : 19 Apr 2026 05:05 PM (IST)
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