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Right to Cooling: गर्मी का भी हो रहा अमीर-गरीब विभाजन! क्या है राइट-टू-कूलिंग जिसकी जोरों से हो रही मांग
Right to Cooling: गर्मी अब वैश्विक असमानता का संकट बनती जा रही है. इसी बीच आइए जानते हैं राइट टू कूलिंग के बारे में.
Right to Cooling: काफी ज्यादा गर्मी अब सिर्फ एक मौसमी परेशानी नहीं रही. यह एक वैश्विक असमानता का संकट बनती जा रही है. भारत से लेकर यूरोप और मिडिल ईस्ट रिकॉर्ड तोड़ तापमान उन लोगों के बीच बढ़ती खाई को दिखा रहा है जो खुद को जानलेवा गर्मी से बचा सकते हैं और जो नहीं बचा सकते. जिस तरफ अमीर परिवार एयर कंडीशन्ड घरों और दफ्तर में आराम करते हैं वहीं लाखों मजदूर, झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले और बेघर नागरिक बिना किसी बुनियादी कूलिंग सुविधा के झुलसा देने वाले तापमान को झेलने को मजबूर है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या है राइट टू कूलिंग.
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राइट टू कूलिंग उस बढ़ती मांग को दर्शा रहा है कि हर व्यक्ति को खतरनाक लू से न्यूनतम सुरक्षा मिलनी चाहिए. इसमें पंखे, साफ पीने का पानी, छाया, हवादार जगह और कूलिंग शेल्टर शामिल हैं.
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काफी ज्यादा गर्मी लोगों पर इस आधार पर काफी अलग-अलग तरह से असर डालती है कि वह कहां और कैसे रहते हैं. अमीर लोग ऐसे घरों में रहते हैं जो गर्मी रोधी होते हैं और उनमें एयर कंडीशनर लगे होते हैं. वहीं गरीब समुदाय तंग, टिन की छतों वाली बस्ती या फिर खराब हवादार कमरों में रहने को मजबूर हैं.
Published at : 28 May 2026 02:50 PM (IST)
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