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Deer:क्या है वो कस्तूरी जो हिरण के अंदर मौजूद,बाजार में ये बेशकीमती
कस्तूरी और उसके सुंगध के बारे में हम सभी लोगों ने जरूर सुना है. क्या आपको मालूम है कि ये कस्तूरी कहां,कैसे बनती है और इसका क्या इस्तेमाल होता है.कई मामलों में दुनिया में ये बेशकीमती चीज मानी जाती है.
हिरण के अंदर मौजूद कस्तूरी किस काम आती है और दुनिया में ये इतना महंगा क्यों बिकता है.
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कबीर दास का दोहा है “कस्तूरी कुण्डली बसै मृग ढ़ूँढ़ै बन माहि। ऐसे घटी घटी राम हैं दुनिया देखै नाँहि॥ इसका अर्थ है कि हिरण की नाभि में कस्तूरी होता है, लेकिन हिरण उससे अनभिज्ञ होकर उसकी सुगंध के कारण कस्तूरी को पूरे जंगल में ढ़ूँढ़ता है. ऐसे ही भगवान हर किसी के अंदर वास करते हैं फिर भी हम उन्हें देख नहीं पाते हैं.
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बता दें कि ये हिरण की नाभि के पास एक थैली में होती है. ये दिखने में अंडाकार 3-7.5 सेंटीमीटर लंबी और 2.5-5 सेंटीमीटर चौड़ी होती है. इसकी महक हिरण को दीवाना बनाती रहती है और वो समझ ही नहीं पाता कि ये सुगंध कहां से आ रही है. हिरण इसकी सुंगध को मतवाला होकर सारे वन में ढूंढता रहता है.
Published at : 31 Mar 2024 12:36 PM (IST)
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