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इंसान ही नहीं चीटियां भी कर सकती हैं मेडिकल सर्जरी, इनके झुंड में भी होता है कोई न कोई डॉक्टर

Ants Medical Surgery: जिस सर्जरी को इंसान अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है, वही काम अब चींटियां भी कर रही हैं. आइए जानें कि चींटियां अपने साथी की चोट को किस प्रकार से ठीक करती हैं.

Ants Medical Surgery: जिस सर्जरी को इंसान अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानता है, वही काम अब चींटियां भी कर रही हैं. आइए जानें कि चींटियां अपने साथी की चोट को किस प्रकार से ठीक करती हैं.

अब तक आपने अस्पतालों में डॉक्टरों को सर्जरी करते देखा होगा, लेकिन सोचिए अगर यही काम जंगल की सबसे छोटी जीव करे तो? विज्ञान की दुनिया से आई यह खबर हैरान करने वाली है. इंसानों के अलावा अब धरती पर एक और जीव मेडिकल ऑपरेशन करने में सक्षम पाया गया है. ये जीव चींटियां हैं, जो कि न औजार इस्तेमाल करती हैं, न दवाइयां, फिर भी अपने साथियों की जान बचा लेती हैं.

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अब तक मेडिकल सर्जरी को सिर्फ इंसानों की विशेष क्षमता माना जाता था, लेकिन अमेरिका में हुई एक नई वैज्ञानिक खोज ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. शोध में सामने आया है कि कुछ खास प्रजाति की चींटियां अपने जख्मी साथियों का इलाज करने के लिए सर्जरी जैसी प्रक्रिया अपनाती हैं.
अब तक मेडिकल सर्जरी को सिर्फ इंसानों की विशेष क्षमता माना जाता था, लेकिन अमेरिका में हुई एक नई वैज्ञानिक खोज ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. शोध में सामने आया है कि कुछ खास प्रजाति की चींटियां अपने जख्मी साथियों का इलाज करने के लिए सर्जरी जैसी प्रक्रिया अपनाती हैं.
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यही नहीं, जरूरत पड़ने पर वे अपने साथी की टांग को काटकर अलग भी कर देती हैं, ताकि उसकी जान बचाई जा सके. यह अनोखी क्षमता फ्लोरिडा में पाई जाने वाली कारपेंटर चींटियों में देखी गई है. ये चींटियां अपने घोंसले में रहने वाले साथियों की चोट को पहचान लेती हैं.
यही नहीं, जरूरत पड़ने पर वे अपने साथी की टांग को काटकर अलग भी कर देती हैं, ताकि उसकी जान बचाई जा सके. यह अनोखी क्षमता फ्लोरिडा में पाई जाने वाली कारपेंटर चींटियों में देखी गई है. ये चींटियां अपने घोंसले में रहने वाले साथियों की चोट को पहचान लेती हैं.
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अगर किसी चींटी के पैर में गंभीर जख्म होता है, तो झुंड की दूसरी चींटियां उसका इलाज शुरू कर देती हैं. रिसर्च के अनुसार, कारपेंटर चींटियां अपने मुंह का इस्तेमाल करके जख्म की सफाई करती हैं. यदि चोट हल्की होती है तो वे उसे साफ कर संक्रमण से बचाने की कोशिश करती हैं.
अगर किसी चींटी के पैर में गंभीर जख्म होता है, तो झुंड की दूसरी चींटियां उसका इलाज शुरू कर देती हैं. रिसर्च के अनुसार, कारपेंटर चींटियां अपने मुंह का इस्तेमाल करके जख्म की सफाई करती हैं. यदि चोट हल्की होती है तो वे उसे साफ कर संक्रमण से बचाने की कोशिश करती हैं.
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लेकिन अगर चोट गंभीर हो और ठीक होने की संभावना न हो, तो वे बिना हिचकिचाए उस अंग को काटकर अलग कर देती हैं. यह प्रक्रिया बिल्कुल किसी मेडिकल अम्प्यूटेशन जैसी होती है, जो इंसानों में बेहद जटिल मानी जाती है.
लेकिन अगर चोट गंभीर हो और ठीक होने की संभावना न हो, तो वे बिना हिचकिचाए उस अंग को काटकर अलग कर देती हैं. यह प्रक्रिया बिल्कुल किसी मेडिकल अम्प्यूटेशन जैसी होती है, जो इंसानों में बेहद जटिल मानी जाती है.
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रिपोर्ट्स बताती हैं कि किसी अंग को काटकर अलग करना बेहद जटिल और संतुलित प्रक्रिया होती है. इंसानों को भी इस काम में काफी समय, उपकरण और विशेषज्ञता की जरूरत होती है, लेकिन चींटियां यह काम बेहद सटीक तरीके से करती हैं. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक दुनिया की सबसे चौंकाने वाली क्षमताओं में से एक मान रहे हैं.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि किसी अंग को काटकर अलग करना बेहद जटिल और संतुलित प्रक्रिया होती है. इंसानों को भी इस काम में काफी समय, उपकरण और विशेषज्ञता की जरूरत होती है, लेकिन चींटियां यह काम बेहद सटीक तरीके से करती हैं. यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक दुनिया की सबसे चौंकाने वाली क्षमताओं में से एक मान रहे हैं.
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साल 2023 में एरिक फ्रैंक की टीम ने अफ्रीका में पाई जाने वाली मेगापोनेरा एनालिस नाम की चींटियों पर शोध किया था. ये चींटियां अपने शरीर से निकलने वाले एंटीमाइक्रोबियल पदार्थ से जख्मी साथियों का इलाज करती थीं. हालांकि फ्लोरिडा की कारपेंटर चींटियों में यह क्षमता नहीं पाई गई, लेकिन वे अंग काटने में बेहद माहिर हैं.
साल 2023 में एरिक फ्रैंक की टीम ने अफ्रीका में पाई जाने वाली मेगापोनेरा एनालिस नाम की चींटियों पर शोध किया था. ये चींटियां अपने शरीर से निकलने वाले एंटीमाइक्रोबियल पदार्थ से जख्मी साथियों का इलाज करती थीं. हालांकि फ्लोरिडा की कारपेंटर चींटियों में यह क्षमता नहीं पाई गई, लेकिन वे अंग काटने में बेहद माहिर हैं.
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वैज्ञानिकों ने दो तरह की चोटों पर खास ध्यान दिया. पहली चोट जांघ यानी फीमर में और दूसरी निचले हिस्से टिबिया में. जब जांघ में चोट लगती है, तो पहले चींटियां उसकी सफाई करती हैं. अगर इससे फायदा नहीं होता, तो वे टांग को काटकर अलग कर देती हैं. वहीं टिबिया में लगी चोट का इलाज वे सिर्फ सफाई के जरिए ही करती हैं और उस स्थिति में अंग नहीं काटतीं हैं.
वैज्ञानिकों ने दो तरह की चोटों पर खास ध्यान दिया. पहली चोट जांघ यानी फीमर में और दूसरी निचले हिस्से टिबिया में. जब जांघ में चोट लगती है, तो पहले चींटियां उसकी सफाई करती हैं. अगर इससे फायदा नहीं होता, तो वे टांग को काटकर अलग कर देती हैं. वहीं टिबिया में लगी चोट का इलाज वे सिर्फ सफाई के जरिए ही करती हैं और उस स्थिति में अंग नहीं काटतीं हैं.
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इस सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जख्मी चींटियों की जान बच जाती है. आंकड़ों के मुताबिक, जांघ की चोट अगर सिर्फ सफाई से ठीक की जाए तो लगभग 40 प्रतिशत चींटियां बच पाती हैं. लेकिन जब टांग को काट दिया जाता है, तो 90 से 95 प्रतिशत तक चींटियां जीवित रहती हैं. टिबिया की चोट के मामलों में 15 से 75 प्रतिशत चींटियां बच जाती हैं.
इस सर्जरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जख्मी चींटियों की जान बच जाती है. आंकड़ों के मुताबिक, जांघ की चोट अगर सिर्फ सफाई से ठीक की जाए तो लगभग 40 प्रतिशत चींटियां बच पाती हैं. लेकिन जब टांग को काट दिया जाता है, तो 90 से 95 प्रतिशत तक चींटियां जीवित रहती हैं. टिबिया की चोट के मामलों में 15 से 75 प्रतिशत चींटियां बच जाती हैं.

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