दुनिया के किन देशों के बीच चलती हैं ट्रेनें, देख लें लिस्ट
दुनिया के कई देशों के बीच चलने वाली अंतरराष्ट्रीय ट्रेनें सरहदों को जोड़ने का बड़ा माध्यम हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस और बांग्लादेश के साथ मैत्री व बंधन एक्सप्रेस प्रमुख हैं.

- चीन-उत्तर कोरिया यात्री ट्रेन सेवा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है.
- भारत-पाकिस्तान समझौता एक्सप्रेस भावनात्मक जुड़ाव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है.
- मैत्री और बंधन एक्सप्रेस भारत-बांग्लादेश कनेक्टिविटी को बेहतर बना रही हैं.
- ट्रांस-साइबेरियन रेलवे रूस, मंगोलिया, चीन को जोड़ता है, यह विश्व का सबसे लंबा मार्ग है.
दुनिया के नक्शे पर खिंची लकीरें अक्सर इंसानों को बांट देती हैं, लेकिन रेल की पटरियां उन्हें जोड़ने का काम करती हैं. हाल ही में चीन और उत्तर कोरिया के बीच शुरू हुई पैसेंजर ट्रेन सेवा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय रेल संपर्कों को चर्चा में ला दिया है. भारत से लेकर यूरोप और एशिया के सुदूर कोनों तक, कई ऐसी ट्रेनें हैं जो न केवल देशों को जोड़ती हैं, बल्कि व्यापार और संस्कृति का सेतु भी बनती हैं. आइए जानते हैं दुनिया के उन प्रमुख रेल मार्गों के बारे में जो सरहदों को पार करते हैं.
चीन और उत्तर कोरिया के बीच नई शुरुआत
हाल ही में चीन और उत्तर कोरिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देते हुए बीजिंग और प्योंगयांग के बीच पैसेंजर ट्रेन सेवा को फिर से बहाल किया है. कई सालों के इंतजार के बाद यह ट्रेन जब बीजिंग पहुंची, तो इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक लेन-देन के नए अध्याय के रूप में देखा गया है. यह सेवा न केवल बॉर्डर पार यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि इस क्षेत्र में पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति देगी.
भारत और पाकिस्तान समझौता एक्सप्रेस
भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14607) सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय ट्रेन रही है. यह ट्रेन अमृतसर के अटारी जंक्शन से शुरू होकर पाकिस्तान के लाहौर तक जाती है. इस यात्रा के लिए सबसे जरूरी शर्त वैध पाकिस्तानी वीजा है, जिसके बिना टिकट नहीं मिल सकता है. यह सप्ताह में दो बार, सोमवार और गुरुवार को चलती है. महज 27 किमी की दूरी तय करने वाली यह ट्रेन वाघा बॉर्डर पर रुकती है और दोनों देशों के लोगों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानी जाती है.
थार लिंक एक्सप्रेस रेगिस्तान के बीच से रास्ता
राजस्थान के रास्ते पाकिस्तान जाने वाली थार लिंक एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14890) भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है. यह जोधपुर के भगत की कोठी स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करती है और बाड़मेर व मानाबाओ होते हुए सीमा पार करती है. पाकिस्तान में यह हैदराबाद और खोखरापार के रास्ते कराची तक का सफर तय करती है. इस ट्रेन के लिए भी यात्रियों को पहले से वीजा की औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं, जिसके बाद ही ऑफलाइन टिकट जारी किए जाते हैं.
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मैत्री एक्सप्रेस भारत-बांग्लादेश का ऐतिहासिक मेल
कोलकाता और बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बीच चलने वाली मैत्री एक्सप्रेस दोनों देशों के बीच दोस्ती की मिसाल है. यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलती है और लगभग 375 किमी का सफर तय करती है. इस यात्रा के दौरान दो जगह इमिग्रेशन चेक होते हैं- भारतीय सीमा पर गेदे और बांग्लादेशी सीमा पर दोरशोना. सुबह कोलकाता से निकलकर यह शाम तक ढाका पहुंच जाती है, जिससे यात्रियों को एक ही दिन में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने की सुविधा मिलती है.
बंधन एक्सप्रेस पश्चिम बंगाल से खुलना तक
भारत और बांग्लादेश के बीच कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए 2017 में बंधन एक्सप्रेस की शुरुआत की गई. यह पूरी तरह वातानुकूलित ट्रेन है जो कोलकाता से बांग्लादेश के खुलना शहर के बीच चलती है. लाल, ग्रे और आसमानी रंगों वाले कोच वाली यह ट्रेन सप्ताह में एक बार चलती है और जेसोर में इसका संक्षिप्त स्टॉपेज होता है. मैत्री एक्सप्रेस की तरह इसमें भी यात्रा के लिए वैध वीजा अनिवार्य है और सुरक्षा जांच की कड़ी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.
भारत और नेपाल जयनगर-जनकपुर रेल सेवा
भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल के साथ भी रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है. बिहार के जयनगर से नेपाल के कुर्था (जनकपुर) के बीच चलने वाली ट्रेन सेवा सीमावर्ती इलाकों के लोगों के लिए वरदान साबित हुई है. यह मार्ग न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि दोनों देशों के बीच रोजमर्रा के व्यापार को भी सुगम बनाता है. नेपाल के साथ रेल संपर्क को भविष्य में और विस्तार देने की योजनाएं भी पाइपलाइन में हैं.
ट्रांस-साइबेरियन रेलवे दुनिया का सबसे लंबा रेल मार्ग
जब अंतरराष्ट्रीय रेल यात्रा की बात आती है, तो रूस की ट्रांस-साइबेरियन रेलवे का नाम सबसे ऊपर आता है. यह विशाल रेल नेटवर्क रूस को मंगोलिया और चीन से जोड़ता है. यात्री मॉस्को से चलकर बीजिंग तक का लंबा और रोमांचक सफर तय कर सकते हैं. यह मार्ग बर्फीले मैदानों, पहाड़ों और घने जंगलों से होकर गुजरता है, जो इसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और साहसिक रेल मार्गों में से एक बनाता है.
यूरोप का विशाल रेल नेटवर्क सीमाओं का अंत
यूरोप में ट्रेन से एक देश से दूसरे देश जाना उतना ही आसान है, जितना भारत में एक शहर से दूसरे शहर जाना. फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और पोलैंड जैसे देश आपस में हाई-स्पीड ट्रेनों से जुड़े हुए हैं. यूरोस्टार जैसी ट्रेनें लंदन को पेरिस और ब्रुसेल्स से जोड़ती हैं. शेंगेन क्षेत्र के कारण यहां यात्रियों को अक्सर बार-बार वीजा दिखाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे रेल यात्रा हवाई सफर का एक बेहतरीन विकल्प बन जाती है.
एशियाई देशों के बीच बढ़ता रेल जाल
एशिया में चीन तेजी से अपने रेल नेटवर्क का विस्तार पड़ोसी देशों में कर रहा है. हाल के वर्षों में चीन ने लाओस के साथ एक महत्वपूर्ण रेल लिंक स्थापित किया है. इसके अलावा, थाईलैंड, मलेशिया और वियतनाम के बीच भी रेल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है. सिंगापुर से पुर्तगाल तक ट्रेन से जाने का सपना अब हकीकत के करीब है, जिसमें थाईलैंड, चीन, रूस और यूरोप के कई देश शामिल होते हैं.
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