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E20 Petrol: गन्ने से कैसे चलती है कार? जानें एथेनॉल से E20 पेट्रोल बनने का पूरा सफर

E20 Petrol: एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरा, मक्का और कुछ दूसरे अनाजों से तैयार किया जाता है. पहले भारत में एथेनॉल उत्पादन काफी हद तक गन्ने पर निर्भर था.

E20 Petrol: एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरा, मक्का और कुछ दूसरे अनाजों से तैयार किया जाता है. पहले भारत में एथेनॉल उत्पादन काफी हद तक गन्ने पर निर्भर था.

E20 Petrol: देशभर के पेट्रोल पंप पर बिकने वाले पेट्रोल में अब 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है, क्योंकि सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से E20 फ्यूल को अनिवार्य कर दिया है. यानी अब हर लीटर पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा रहा है. हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि आखिर यह एथेनॉल तैयार कैसे होता है और खेत में उगा गन्ना किस तरह आपकी कार के फ्यूल टैंक तक पहुंचता है. चलिए तो आज हम आपको बताते हैं कि गन्ने से कार कैसे चलती है और एथेनॉल से E20 पेट्रोल बनने का पूरा सफर क्या है..

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एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरा, मक्का और कुछ दूसरे अनाजों से तैयार किया जाता है. पहले भारत में एथेनॉल उत्पादन काफी हद तक गन्ने पर निर्भर था, लेकिन अब मक्का भी इसका प्रमुख कच्चा माल बन चुका है. इससे साल भर उत्पादन संभव हो रहा है.
एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरा, मक्का और कुछ दूसरे अनाजों से तैयार किया जाता है. पहले भारत में एथेनॉल उत्पादन काफी हद तक गन्ने पर निर्भर था, लेकिन अब मक्का भी इसका प्रमुख कच्चा माल बन चुका है. इससे साल भर उत्पादन संभव हो रहा है.
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एथेनॉल बनाने की शुरुआत खेतों से गन्ना काटने के बाद होती है. गन्ने को चीनी मिलों में लाया जाता है, जहां बड़ी मशीनों से उसका रस निकाला जाता है. चीनी बनाने की प्रक्रिया के दौरान शीरा भी तैयार होता है, जिसका उपयोग लंबे समय से एथेनॉल उत्पादन में किया जाता रहा है. वहीं आधुनिक प्लांट सीधे गन्ने के रस से भी एथेनॉल तैयार करते हैं.
एथेनॉल बनाने की शुरुआत खेतों से गन्ना काटने के बाद होती है. गन्ने को चीनी मिलों में लाया जाता है, जहां बड़ी मशीनों से उसका रस निकाला जाता है. चीनी बनाने की प्रक्रिया के दौरान शीरा भी तैयार होता है, जिसका उपयोग लंबे समय से एथेनॉल उत्पादन में किया जाता रहा है. वहीं आधुनिक प्लांट सीधे गन्ने के रस से भी एथेनॉल तैयार करते हैं.
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जब गन्ने का रस, शीरा या अनाज आधारित मिश्रण तैयार हो जाता है, तब उसमें यीस्ट मिलाया जाता है. इसके बाद फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू होती है. इसी दौरान यीस्ट मिश्रण में मौजूद प्राकृतिक शुगर को धीरे-धीरे अल्कोहल में बदल बदल देता है.
जब गन्ने का रस, शीरा या अनाज आधारित मिश्रण तैयार हो जाता है, तब उसमें यीस्ट मिलाया जाता है. इसके बाद फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू होती है. इसी दौरान यीस्ट मिश्रण में मौजूद प्राकृतिक शुगर को धीरे-धीरे अल्कोहल में बदल बदल देता है.
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यह प्रक्रिया उत्पादन के तरीके के अनुसार कुछ घंटे से लेकर कुछ दिनों तक चलती है. इसके बाद एक ऐसा तरल तैयार होता है, जिसमें अल्कोहल के साथ पानी और दूसरे तत्व भी मौजूद होते हैं.
यह प्रक्रिया उत्पादन के तरीके के अनुसार कुछ घंटे से लेकर कुछ दिनों तक चलती है. इसके बाद एक ऐसा तरल तैयार होता है, जिसमें अल्कोहल के साथ पानी और दूसरे तत्व भी मौजूद होते हैं.
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फर्मेंटेशन के बाद तैयार मिश्रण को डिस्टिलेशन यूनिट में भेजा जाता है. यहां निश्चित तापमान पर इसे गर्म किया जाता है, जिससे अल्कोहल भाप बनकर अलग हो जाता है. बाद में इस भाप को ठंडा करके दोबारा तरल रूप में बदल दिया जाता है. इस प्रक्रिया से हाई क्वालिटी वाला एथेनॉल प्राप्त होता है.
फर्मेंटेशन के बाद तैयार मिश्रण को डिस्टिलेशन यूनिट में भेजा जाता है. यहां निश्चित तापमान पर इसे गर्म किया जाता है, जिससे अल्कोहल भाप बनकर अलग हो जाता है. बाद में इस भाप को ठंडा करके दोबारा तरल रूप में बदल दिया जाता है. इस प्रक्रिया से हाई क्वालिटी वाला एथेनॉल प्राप्त होता है.
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वहीं डिस्टिलेशन के बाद एथेनॉल में थोड़ी नमी बची रहती है. इसलिए इसे एक एक्स्ट्रा डिहाइड्रेशन प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिसमें बचा हुआ पानी भी पूरी तरह निकाल दिया जाता है. इसके बाद जो उत्पाद तैयार होता है, उसे एनहाइड्रस या फ्यूल ग्रेड एथेनॉल कहा जाता है. यही एथेनॉल पेट्रोल में मिलाने के लिए उपयुक्त माना जाता है.
वहीं डिस्टिलेशन के बाद एथेनॉल में थोड़ी नमी बची रहती है. इसलिए इसे एक एक्स्ट्रा डिहाइड्रेशन प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिसमें बचा हुआ पानी भी पूरी तरह निकाल दिया जाता है. इसके बाद जो उत्पाद तैयार होता है, उसे एनहाइड्रस या फ्यूल ग्रेड एथेनॉल कहा जाता है. यही एथेनॉल पेट्रोल में मिलाने के लिए उपयुक्त माना जाता है.
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फ्यूल ग्रेड एथेनॉल तैयार होने के बाद इसकी क्वालिटी की जांच की जाती है. इसमें शुद्धता, रासायनिक संरचना और दूसरे मानकों की जांच की जाती है ताकि यह सरकारी मानकों पर खरा उतर सके.
फ्यूल ग्रेड एथेनॉल तैयार होने के बाद इसकी क्वालिटी की जांच की जाती है. इसमें शुद्धता, रासायनिक संरचना और दूसरे मानकों की जांच की जाती है ताकि यह सरकारी मानकों पर खरा उतर सके.
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सभी टेस्ट पूरे होने के बाद एथेनॉल टैंकरों के जरिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो तक पहुंचाया जाता है.
सभी टेस्ट पूरे होने के बाद एथेनॉल टैंकरों के जरिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के डिपो तक पहुंचाया जाता है.
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कंपनियों के डिपो में तय अनुपात के अनुसार एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जाता है. फिलहाल E20  ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. ब्लेंडिंग पूरी होने के बाद यही ईंधन सामान्य वितरण प्रक्रिया के जरिए देशभर के पेट्रोल पंप तक पहुंचाया जाता है और फिर वाहन चालकों को उपलब्ध कराया जाता है.
कंपनियों के डिपो में तय अनुपात के अनुसार एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जाता है. फिलहाल E20  ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है. ब्लेंडिंग पूरी होने के बाद यही ईंधन सामान्य वितरण प्रक्रिया के जरिए देशभर के पेट्रोल पंप तक पहुंचाया जाता है और फिर वाहन चालकों को उपलब्ध कराया जाता है.

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