कार खरीदने के बाद बाहर से कराने जा रहे ये मॉडिफिकेशन? पहले जानें नियम
Car Modification: कार को मॉडिफाई कराना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन मॉडिफिकेशन की सीमा और उसका असर सबसे जरूरी है. आइए इससे जुड़ी सारी डिटेल्स जानते हैं.

अगर आप अपनी कार को ज्यादा स्टाइलिश और अलग लुक देने के लिए आफ्टरमार्केट मॉडिफिकेशन कराने की सोच रहे हैं तो पहले यह जानना जरूरी है कि हर बदलाव कानूनी नहीं होता. कुछ मॉडिफिकेशन ऐसे हैं जिन्हें नियमों के दायरे में किया जा सकता है, जबकि कुछ बदलाव सड़क सेफ्टी और गाड़ी के मेन स्ट्रक्चर को प्रभावित कर सकते हैं और इनके लिए चालान भी हो सकता है. ऐसे में कार को मॉडिफाई कराने से पहले यह समझना जरूरी है कि कौन-से बदलाव सेफ और नियमों के मुताबिक हैं?
कार के टायर अपग्रेड किए जा सकते हैं, लेकिन नए टायर निर्माता की तय स्पेसिफिकेशन के हिसाब से होने चाहिए. टायर का लोड इंडेक्स और स्पीड रेटिंग भी गाड़ी के लिए उपयुक्त होनी चाहिए. इसी तरह सस्पेंशन में भी बदलाव किया जा सकता है, लेकिन इससे कार का ग्राउंड क्लीयरेंस बहुत ज्यादा बढ़ना या कम होना नहीं चाहिए और गाड़ी की सेफ्टी भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
कौन-से मॉडिफिकेशन हैं लीगल?
- कार के लुक को बेहतर बनाने के लिए बॉडी किट भी लगाई जा सकती है. फ्रंट स्प्लिटर, बॉडी क्लैडिंग और साइड पैनल जैसे बदलाव किए जा सकते हैं, बशर्ते वे कार के मूल स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव न करें. इसी तरह LED DRLs लगाना भी किया जा सकता है, क्योंकि इनका इस्तेमाल गाड़ी की विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए किया जाता है.
- अगर आप कार का रंग बदलना चाहते हैं तो इसमें खास सावधानी जरूरी है. रंग बदलने के लिए RTO की इजाजत लेनी पड़ती है और बदलाव के बाद RC में भी इसकी जानकारी अपडेट करानी होती है. वहीं कार पर विनाइल या बॉडी रैप लगाना एक अलग ऑप्शन है, जिससे फैक्ट्री पेंट को सेफ रखते हुए कार का लुक बदला जा सकता है.
- इसी तरह आफ्टरमार्केट CNG किट लगाना भी पॉसिबल है, लेकिन किट की फिटमेंट के बाद RTO में इसे रजिस्टर कराना जरूरी होता है ताकि गाड़ी के रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में फ्यूल से जुड़ी जानकारी अपडेट की जा सके.

किन मॉडिफिकेशन से बचना चाहिए?
- कार में बहुत तेज आवाज वाला हॉर्न या प्रेशर हॉर्न लगाना नियमों के खिलाफ हो सकता है. जानकारी के मुताबिक 100 डेसिबल से ज्यादा आवाज वाले हॉर्न की अनुमति नहीं है. इसी तरह जरूरत से ज्यादा बड़े अलॉय व्हील या ऐसे व्हील जो गाड़ी की तय स्पेसिफिकेशन से बाहर हों, परेशानी पैदा कर सकते हैं.
- कार की खिड़कियों पर डार्क टिंट फिल्म लगाना भी नियमों के खिलाफ हो सकता है. कार के शीशों में निर्धारित विजिबिलिटी बनाए रखना जरूरी है. इसलिए अपनी पसंद के लिए बहुत ज्यादा डार्क फिल्म लगवाने से बचना चाहिए.
- इसी तरह लाउड आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट लगाकर कार की आवाज बदलना भी सही नहीं है. इससे ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है और गाड़ी के PUC से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है. इसलिए केवल दिखने या आवाज के लिए कंपनी के मूल एग्जॉस्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव कराने से बचना बेहतर है.
- फैंसी या डिजाइनर नंबर प्लेट लगाना भी सही नहीं है. गाड़ी के मुताबिक नंबर प्लेट का इस्तेमाल करना जरूरी है. नंबर प्लेट पर अक्षर और नंबर साफ दिखाई देने चाहिए और हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट से जुड़े नियमों का पालन करना चाहिए.

मॉडिफिकेशन कराने से पहले क्या ध्यान रखें?
- कार को मॉडिफाई कराना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन मॉडिफिकेशन की सीमा और उसका असर सबसे जरूरी है. ऐसा बदलाव नहीं करना चाहिए जिससे कार का मूल स्ट्रक्चर, सुरक्षा, प्रदूषण स्तर या सड़क पर दूसरे लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो. खासकर रंग, इंजन, CNG किट जैसे बदलावों में RTO से जुड़े नियमों को पहले समझना जरूरी है.
- ऐसे में अगर आप अपनी कार को कस्टमाइज कराना चाहते हैं, तो केवल अच्छे लुक की बजाय कानूनी अनुमति, सुरक्षा और वाहन निर्माता की स्पेसिफिकेशन को प्राथमिकता दें. गलत मॉडिफिकेशन बाद में चालान, RC से जुड़ी परेशानी या वाहन की वारंटी और सुरक्षा पर असर डाल सकता है.
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