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दानेदार यूरिया या नैनो यूरिया, आपके खेत के लिए क्या बेहतर?

खेती की लागत घटाकर पैदावार बढ़ानी है तो खाद का यह हिसाब समझना रहेगा आपके लिए फायदेमंद. क्या 45 किलो की भारी बोरी से बेहतर है नैनो यूरिया की एक छोटी बोतल? आपके लिए क्या ज्यादा सही जान लें.

खेती की लागत घटाकर पैदावार बढ़ानी है तो खाद का यह हिसाब समझना रहेगा आपके लिए फायदेमंद. क्या 45 किलो की भारी बोरी से बेहतर है नैनो यूरिया की एक छोटी बोतल? आपके लिए क्या ज्यादा सही जान लें.

खेती-किसानी में यूरिया के बिना अच्छी पैदावार की हासिल करना मुश्किल लगता है. सालों से किसान फसलों को हरा-भरा रखने के लिए सफेद बोरियों वाले दानेदार यूरिया पर ही पूरा भरोसा करते आए हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से बाजार में आया लिक्विड नैनो यूरिया तेजी से अपनी जगह बना रहा है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपका फायदा किसमें है.

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पारंपरिक दानेदार यूरिया का इस्तेमाल हम सीधे जमीन पर बिखर कर करते हैं. इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि खेत में डालने के बाद पौधे इसका सिर्फ 30 से 40 फीसदी हिस्सा ही ले पाते हैं. बाकी बची खाद या तो धूप और हवा में उड़ जाती है या फिर बारिश के पानी के साथ जमीन के बहुत नीचे बह जाती है.
पारंपरिक दानेदार यूरिया का इस्तेमाल हम सीधे जमीन पर बिखर कर करते हैं. इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि खेत में डालने के बाद पौधे इसका सिर्फ 30 से 40 फीसदी हिस्सा ही ले पाते हैं. बाकी बची खाद या तो धूप और हवा में उड़ जाती है या फिर बारिश के पानी के साथ जमीन के बहुत नीचे बह जाती है.
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दूसरी तरफ लिक्विड नैनो यूरिया को सीधे पानी में मिलाकर पौधों की पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है. इसके नैनो पार्टिकल्स इतने बारीक होते हैं कि पौधे के स्टोमेटा उन्हें तुरंत सोख लेते हैं. इसी वजह से नैनो यूरिया की एफिशिएंसी 80 फीसदी से भी ज्यादा होती है. यानी जितनी खाद आप डालते हैं, उसका पूरा असर सीधा फसल पर नजर आता है.
दूसरी तरफ लिक्विड नैनो यूरिया को सीधे पानी में मिलाकर पौधों की पत्तियों पर स्प्रे किया जाता है. इसके नैनो पार्टिकल्स इतने बारीक होते हैं कि पौधे के स्टोमेटा उन्हें तुरंत सोख लेते हैं. इसी वजह से नैनो यूरिया की एफिशिएंसी 80 फीसदी से भी ज्यादा होती है. यानी जितनी खाद आप डालते हैं, उसका पूरा असर सीधा फसल पर नजर आता है.
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जमीन की सेहत के मामले में भी दोनों में बड़ा फर्क है. जरूरत से ज्यादा दानेदार यूरिया डालने से मिट्टी की प्राकृतिक नमी और उसकी फर्टिलिटी धीरे-धीरे खराब होने लगती है. जमीन कठोर हो जाती है और उसमें मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया मरने लगते हैं. जबकि नैनो यूरिया का पत्तियों पर छिड़काव होने से मिट्टी की क्वालिटी पर कोई बुरा असर बिल्कुल नहीं पड़ता है.
जमीन की सेहत के मामले में भी दोनों में बड़ा फर्क है. जरूरत से ज्यादा दानेदार यूरिया डालने से मिट्टी की प्राकृतिक नमी और उसकी फर्टिलिटी धीरे-धीरे खराब होने लगती है. जमीन कठोर हो जाती है और उसमें मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया मरने लगते हैं. जबकि नैनो यूरिया का पत्तियों पर छिड़काव होने से मिट्टी की क्वालिटी पर कोई बुरा असर बिल्कुल नहीं पड़ता है.
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लागत और ट्रांसपोर्ट के झंझट को देखें तो नैनो यूरिया यहां भी किफायती नजर आता है. 45 किलो की भारी-भरकम दानेदार बोरी को दुकान से खेत तक ढोना बड़ा सिरदर्द होता है. वहीं नैनो यूरिया की सिर्फ 500 एमएल की एक छोटी बोतल उस पूरी बोरी के बराबर काम करती है. इसे आप अपनी जेब या बाइक की डिक्की में रखकर आसानी से खेत ले जा सकते हैं.
लागत और ट्रांसपोर्ट के झंझट को देखें तो नैनो यूरिया यहां भी किफायती नजर आता है. 45 किलो की भारी-भरकम दानेदार बोरी को दुकान से खेत तक ढोना बड़ा सिरदर्द होता है. वहीं नैनो यूरिया की सिर्फ 500 एमएल की एक छोटी बोतल उस पूरी बोरी के बराबर काम करती है. इसे आप अपनी जेब या बाइक की डिक्की में रखकर आसानी से खेत ले जा सकते हैं.
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इस्तेमाल करने के तरीके में भी थोड़ा ध्यान रखना पड़ता है. दानेदार यूरिया अक्सर बुआई के वक्त या फिर पहली सिंचाई के साथ दिया जाता है. लेकिन नैनो यूरिया का सही असर तभी मिलता है जब पौधों पर अच्छी पत्तियां आ चुकी हों. पत्तियों के सही फुटाव के बाद ही इसका स्प्रे करना चाहिए जिससे फसल पोषण को तेजी से और पूरा खींच सके.
इस्तेमाल करने के तरीके में भी थोड़ा ध्यान रखना पड़ता है. दानेदार यूरिया अक्सर बुआई के वक्त या फिर पहली सिंचाई के साथ दिया जाता है. लेकिन नैनो यूरिया का सही असर तभी मिलता है जब पौधों पर अच्छी पत्तियां आ चुकी हों. पत्तियों के सही फुटाव के बाद ही इसका स्प्रे करना चाहिए जिससे फसल पोषण को तेजी से और पूरा खींच सके.
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पर्यावरण और भूजल की सेफ्टी को लेकर भी नैनो यूरिया कहीं ज्यादा सेफ है. दानेदार यूरिया का अधिक केमिकल पानी में घुलकर जमीन के नीचे के पीने वाले पानी को दूषित करता है. इसके साथ ही इससे नाइट्रस ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी बनती हैं. नैनो यूरिया पत्तियों पर ही खप जाता है. जिससे हवा और पानी दोनों सुरक्षित रहते हैं.
पर्यावरण और भूजल की सेफ्टी को लेकर भी नैनो यूरिया कहीं ज्यादा सेफ है. दानेदार यूरिया का अधिक केमिकल पानी में घुलकर जमीन के नीचे के पीने वाले पानी को दूषित करता है. इसके साथ ही इससे नाइट्रस ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी बनती हैं. नैनो यूरिया पत्तियों पर ही खप जाता है. जिससे हवा और पानी दोनों सुरक्षित रहते हैं.
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कीमत के हिसाब से देखें तो नैनो यूरिया जेब पर हल्का पड़ता है. सरकार भी इस आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए लगातार जोर लगा रही है जिससे किसानों की इनपुट कॉस्ट कम हो सके. जब खाद की बर्बादी रुकेगी और फसल को पूरा न्यूट्रिशन मिलेगा तो पैदावार का दाना चमकदार बनेगा और मंडी में उसकी कीमत भी ज्यादा मिलेगी.
कीमत के हिसाब से देखें तो नैनो यूरिया जेब पर हल्का पड़ता है. सरकार भी इस आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के लिए लगातार जोर लगा रही है जिससे किसानों की इनपुट कॉस्ट कम हो सके. जब खाद की बर्बादी रुकेगी और फसल को पूरा न्यूट्रिशन मिलेगा तो पैदावार का दाना चमकदार बनेगा और मंडी में उसकी कीमत भी ज्यादा मिलेगी.
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अब किसानों के पास नैनो यूरिया एक ऐसे ऑप्शन के तौर पर आया है जो कि ज्यादा एफिशिएंट और किफायती है. लेकिन आप दोनों को भी सही मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आप शुरुआती बेस डोज के रूप में बहुत कम दानेदार यूरिया डालें और बाद के टॉप ड्रेसिंग में नैनो यूरिया का स्प्रे अपनाएं. तो खेती का खर्च आधा हो जाएगा.
अब किसानों के पास नैनो यूरिया एक ऐसे ऑप्शन के तौर पर आया है जो कि ज्यादा एफिशिएंट और किफायती है. लेकिन आप दोनों को भी सही मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आप शुरुआती बेस डोज के रूप में बहुत कम दानेदार यूरिया डालें और बाद के टॉप ड्रेसिंग में नैनो यूरिया का स्प्रे अपनाएं. तो खेती का खर्च आधा हो जाएगा.

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