66 घंटे की फ्लाइट में झेला नर्क, फिर भी अमेरिका से लौटे इस शख्स ने क्यों कहा- 'हथकड़ियां थीं जरूरी'
US Deported Indians: अमेरिका से डिपोर्ट कर भेजे गए 116 अवैध प्रवासियों को लेकर US सेना का विमान पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. इस बार भी भारतीय लोग हथकड़ियां और बेड़ियों से बंधे थे.

US Deported Indians: डंकी रूट से अमेरिका गए 116 भारतीयों को लेकर एक विशेष विमान शनिवार (15 फरवरी, 2025) की देर रात अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा. इनमें सबसे ज्यादा पुरुष थे, जिन्हें यात्रा के दौरान हथकड़ियों और बेड़ियों में जकड़ा गया था. निर्वासितों में पंजाब के 67 लोग हैं, जबकि 33 लोग हरियाणा के रहने वाले हैं. भारत आने के बाद इन लोगों ने अपनी आपबीती बताई है.
कपूरथला जिले के भोलाथ क्षेत्र के सुरखा गांव के 25 वर्षीय मनदीप सिंह ने कहा, "हम सभी को लगभग 66 घंटे तक हथकड़ी और बेड़ियों में रखा गया था. यह एक भयावह अनुभव था, लेकिन अधिकारियों ने समझाया कि यह हमारी सुरक्षा के लिए जरूरी था, क्योंकि कोई भी यात्री हताशा में कुछ भी कर सकता था." मनदीप ने अमेरिका जाने के लिए एक एजेंट को 45 लाख रुपये दिए थे, लेकिन आव्रजन अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया और अब वह भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है.
भोजन और बुनियादी जरूरतों से वंचित
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निर्वासितों को यात्रा के दौरान बहुत कम भोजन दिया गया और 15 दिनों से न नहाने या ब्रश करने की स्थिति में थे. होशियारपुर के दसूया के बोदल चौनी गांव के 20 वर्षीय मंताज सिंह, जो साढ़े तीन महीने अमेरिकी हिरासत केंद्र में रहे, उन्होंने कहा, "शुरुआत में हथकड़ियां और बेड़ियां असहज लग रही थीं, लेकिन जब अधिकारियों ने समझाया कि यह सुरक्षा के लिए है तो हमें समझ आ गया. इतनी नाजुक मानसिक स्थिति में किसी के साथ कुछ भी हो सकता था."
संसद में उठा मामला
इस निर्वासन के बाद संसद में विपक्ष ने जोरदार विरोध किया. कई नेताओं ने हथकड़ी पहनकर प्रदर्शन किया और सरकार से अमेरिका से जवाब मांगने की मांग की. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में बयान देते हुए कहा, "निर्वासन कोई नई बात नहीं है. हम अमेरिकी सरकार से बातचीत कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निर्वासितों के साथ यात्रा के दौरान कोई दुर्व्यवहार न हो."
उन्होंने कहा कि 2012 से अमेरिका की निर्वासन प्रक्रिया में 'प्रतिबंधों के उपयोग' का प्रावधान है, लेकिन भारत सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि भारतीय नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए.
डिप्रेशन में कई लोग
कई निर्वासित डिप्रेशन में हैं, क्योंकि उन्होंने अमेरिका में बेहतर भविष्य की उम्मीद में लाखों रुपये खर्च किए थे. 19 वर्षीय निशान सिंह (कपूरथला) ने कहा कि वह मीडिया से बात नहीं करना चाहते, क्योंकि "मीडिया हमारी कहानियों में दिलचस्पी रखता है, लेकिन हमारे दर्द को नहीं समझता." भोलाथ के 20 वर्षीय जशनप्रीत ने कहा, "अब हमारे जख्मों पर नमक मत छिड़को." अब सवाल यह है कि क्या भारत सरकार निर्वासितों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी या उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया जाएगा.
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Source: IOCL


























